सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ी सभी FIR रद्द कीं। कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 सितंबर का मार्च वापस लिया। पढ़ें पूरी खबर।
Table of Contents
- सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: सभी FIR रद्द
- संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल
- सरकार का रुख और क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले मामलों पर स्थिति
- कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 सितंबर का मार्च वापस लिया
- आंदोलन की टाइमलाइन और प्रमुख घटनाएं
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: सभी FIR रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़ी सभी एफआईआर (FIR) को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि इस मामले में अब कोई नई FIR भी दर्ज नहीं की जाएगी।
यह आदेश दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल किए गए एक अंतरिम आवेदन पर आया है, जिसमें सरकार ने 25 जुलाई के अदालती आदेश के बाद CJP प्रदर्शन से जुड़ी 13 एफआईआर को आगे न बढ़ाने और खत्म करने की इच्छा जताई थी।
संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 142 (Article 142) के तहत मिली विशेष शक्तियों का प्रयोग करके लिया गया है, ताकि मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| कोर्ट का आधार | संविधान का अनुच्छेद 142 |
| मुख्य शर्त | दोनों पक्ष कोर्ट के समक्ष हुए समझौते का पूरी तरह पालन करेंगे |
| भविष्य के लिए मिसाल | यह फैसला केवल इस मामले के खास तथ्यों पर लागू होगा, इसे अन्य मामलों के लिए कानूनी मिसाल (Precedent) नहीं माना जाएगा |
सरकार का रुख और क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले मामलों पर स्थिति
यद्यपि आम छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR रद्द कर दी गई हैं, सरकार ने अदालत को सूचित किया कि प्रदर्शन के दौरान आपराधिक रिकॉर्ड वाले लगभग 2,873 लोग वहां मौजूद थे।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन व्यक्तियों ने आंदोलन के दौरान गंभीर मारपीट या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था, उन पर कानूनी कार्रवाई और मुकदमे जारी रहेंगे।
कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 सितंबर का मार्च वापस लिया
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना प्रस्तावित 5 सितंबर का मार्च आधिकारिक तौर पर वापस ले लिया है। CJP प्रवक्ता सौरव दास और अभिजीत दीपके ने प्रतिक्रिया देते हुए इस निर्णय को “छात्रों की बड़ी जीत” करार दिया।
CJP ने बयान जारी कर कहा कि छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी अन्यापूर्ण मुकदमों का खारिज होना उनके संघर्ष की सफलता है और अब किसी भी छात्र को प्रताड़ित नहीं किया जाएगा।
आंदोलन की टाइमलाइन और प्रमुख घटनाएं
जंतर-मंतर पर चला यह आंदोलन देश भर में चर्चा का विषय बना रहा। आंदोलन की मुख्य घटनाएं इस प्रकार हैं:
- 20 जून: जंतर-मंतर से कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में आंदोलन की शुरुआत।
- 20 जुलाई: दिल्ली में मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच तीखी झड़प। संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को रोकने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग।
- मुख्य मांग: तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और छात्र-हितैषी मांगों को लेकर आंदोलन कई शहरों में फैला।
- 25 जुलाई: सरकार द्वारा मांगें मानने के आश्वासन के बाद आंदोलन का औपचारिक समापन।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुच्छेद 142 के तहत लिया गया यह फैसला प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए राहत लेकर आया है। जहां एक ओर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को मुकदमों से मुक्ति मिली है, वहीं दूसरी ओर हिंसा फैलाने वाले तत्वों पर कानूनी शिकंजा बरकरार रहेगा।
- भारतीय संविधान और अनुच्छेदों की प्रामाणिक जानकारी के लिए Supreme Court of India Official Website पर जाएं।
- कानूनी प्रक्रियाओं और FIR नियमों के लिए India Code Legislative Department देखें।
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