SONAM WANGCHUK NEWS

इडियट्‌स वाले सोनम वांगचुक: जेल में ‘इनोवेशन’ और ‘पॉजिटिविटी’

जोधपुर सेंट्रल जेल में करीब 4 महीनों (120 दिनों से अधिक) से बंद सोनम वांगचुक की स्थिति को लेकर उनकी पत्नी गीतांजलि अंग्मो ने हाल ही में कई खुलासे किए हैं:

  • बैरक को ठंडा रखने का प्रयोग: यह सच है कि वांगचुक जेल की मुश्किल परिस्थितियों में भी अपने वैज्ञानिक दृष्टिकोण को नहीं छोड़े हैं। उन्होंने जेल प्रशासन और कोर्ट से थर्मामीटर जैसे उपकरणों की मांग की है ताकि वे जेल के बैरक के तापमान का अध्ययन कर सकें और उसे गर्मियों में ठंडा व सर्दियों में गर्म रखने के लिए ‘पैसिव इंसुलेशन’ जैसे प्रयोग कर सकें।
  • किताबें और चींटियाँ: वे अपना अधिकांश समय पढ़ने और ध्यान (Vipassana) में बिता रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने अपनी पत्नी से ‘Ants: Workers of the World’ जैसी किताबें मंगवाई हैं। वे एकांत कारावास (Solitary Confinement) में चींटियों के व्यवहार और उनकी एकता का बारीकी से अवलोकन कर रहे हैं।
  • जेल स्टाफ को टिप्स: गीतांजलि के अनुसार, जेल का स्टाफ उनसे बच्चों की शिक्षा और बेहतर पेरेंटिंग को लेकर सलाह लेता है। वांगचुक उन्हें ‘रट्टा मार’ पढ़ाई के बजाय व्यावहारिक शिक्षा के महत्व को समझाते हैं।
  • लिख रहे हैं किताब: जेल के अपने अनुभवों पर वे एक किताब भी लिख रहे हैं, जिसका संभावित शीर्षक “Forever Positive” हो सकता है।

गिरफ्तारी का सच: क्यों हैं जोधपुर जेल में?

सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी और उन्हें राजस्थान शिफ्ट करने के पीछे के मुख्य कारण ये हैं:

  • NSA के तहत कार्रवाई: उन्हें 26 सितंबर 2025 को लद्दाख से गिरफ्तार किया गया था। उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया गया है।
  • लेह हिंसा का आरोप: सरकार और लद्दाख प्रशासन का आरोप है कि वांगचुक के भाषणों (जिसमें उन्होंने ‘अरब स्प्रिंग’ और नेपाल के प्रदर्शनों का जिक्र किया था) की वजह से लेह में हिंसा भड़की। 24 सितंबर 2025 को हुई उस हिंसा में 4 लोगों की जान गई थी और कई घायल हुए थे।
  • लद्दाख की मांगें: वे लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची (6th Schedule) में शामिल करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर थे। सरकार का मानना है कि उनकी गतिविधियों से सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order) को खतरा था, इसलिए उन्हें लद्दाख से दूर जोधपुर जेल भेजा गया।

कानूनी स्थिति 

  • उनकी पत्नी ने उनकी रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका (Habeas Corpus) दायर की है।
  • कोर्ट में सरकार का पक्ष है कि उनकी रिहाई से लद्दाख में फिर से शांति भंग हो सकती है, जबकि वांगचुक के वकीलों का कहना है कि यह ‘राजनीतिक बदले’ की कार्रवाई है।

एक खास बात: जेल में उन्हें बाहरी दुनिया से पूरी तरह काट दिया गया है। उनकी पत्नी के अनुसार, उन्हें अखबार भी दिए जाते हैं तो लद्दाख या उनसे जुड़ी खबरों वाले हिस्से काट दिए जाते हैं।

1. विवाद की शुरुआत: 2019 के बाद का लद्दाख

अगस्त 2019 में जब अनुच्छेद 370 हटा और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों (UT) में बांटा गया, तो लद्दाख के लोगों ने पहले इसका स्वागत किया। उन्हें लगा कि अब लेह को अलग पहचान मिलेगी। लेकिन जल्द ही उनकी खुशी चिंता में बदल गई क्योंकि:

  • नौकरियों का डर: स्थानीय लोगों को लगा कि बाहर के लोग आकर उनकी नौकरियां ले लेंगे।
  • जमीन और संस्कृति: लद्दाख के संवेदनशील पर्यावरण और आदिवासी संस्कृति को बाहरी हस्तक्षेप से खतरा महसूस होने लगा।

2. वांगचुक की मांगें (4-Point Agenda)

सोनम वांगचुक ने ‘लद्दाख एपेक्स बॉडी’ (LAB) और ‘कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस’ (KDA) के साथ मिलकर सरकार के सामने 4 मुख्य मांगें रखीं:

  1. छठी अनुसूची (6th Schedule): इसके तहत लद्दाख को स्वायत्त परिषद बनाने का अधिकार मिले ताकि वे अपनी जमीन और संसाधनों की रक्षा खुद कर सकें।
  2. पूर्ण राज्य का दर्जा: वे चाहते हैं कि लद्दाख केवल एक UT न रहे, बल्कि उसे पूर्ण राज्य बनाया जाए।
  3. संसदीय सीटें: लद्दाख के लिए लोक सभा की दो सीटों की मांग।
  4. नौकरी में आरक्षण: स्थानीय युवाओं के लिए भर्ती प्रक्रिया में प्राथमिकता।

3. गिरफ्तारी और जेल तक का सफर (Timeline)

यह मामला तब गंभीर हुआ जब वांगचुक ने “चलो लेह” मार्च और भूख हड़ताल (Fast unto death) शुरू की।

  • दिल्ली मार्च: वांगचुक ने लेह से दिल्ली तक पैदल यात्रा निकाली थी। उन्हें दिल्ली की सीमा (सिंघु बॉर्डर) पर हिरासत में लिया गया, जिससे काफी हंगामा हुआ।
  • लेह में हिंसा (सितंबर 2025): सरकार का दावा है कि 24 सितंबर 2025 को लेह में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़की, जिसमें कुछ लोगों की मौत हुई। प्रशासन ने इसका जिम्मेदार वांगचुक के बयानों को माना।
  • NSA और जोधपुर शिफ्टिंग: उन पर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगाया गया। सुरक्षा कारणों और लद्दाख में माहौल शांत रखने का हवाला देते हुए उन्हें लद्दाख से हजारों किलोमीटर दूर जोधपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट कर दिया गया।

वर्तमान स्थिति: जेल के अंदर का सच

सोनम वांगचुक फिलहाल जोधपुर जेल में एक “सत्याग्रही” की तरह रह रहे हैं।

  • सच्चाई यह है कि वे वहां कोई अपराधी की तरह नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक की तरह समय बिता रहे हैं।
  • वे जेल के बैरकों में तापमान नियंत्रण (Temperature Control) के प्रयोग कर रहे हैं ताकि कैदियों को झुलसा देने वाली गर्मी से राहत मिल सके।
  • उनकी पत्नी गीतांजलि के अनुसार, प्रशासन ने उन्हें कुछ वैज्ञानिक उपकरण भी दिए हैं, जिनका उपयोग वे वहां की दीवारों और छतों के इंसुलेशन को समझने में कर रहे हैं।

निष्कर्ष

सरकार उन्हें “सुरक्षा के लिए खतरा” मानती है, जबकि उनके समर्थक उन्हें “लद्दाख का गांधी” कहते हैं जो हिमालय को बचाने की लड़ाई लड़ रहा है। यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है, जहां उनकी रिहाई और लद्दाख के अधिकारों पर बहस चल रही है।