पानीपत में ‘गब्बर’ बंदर का आतंक: पिल्लों का किया ‘अपहरण’, रेस्क्यू टीम के छूटे पसीने!

monkey kidnap puppy

पानीपत: हरियाणा के पानीपत में इन दिनों एक बंदर की ‘किडनैपिंग’ वाली हरकतों ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। यह बंदर आम तौर पर इंसानों को नहीं, बल्कि कुत्तों के छोटे बच्चों (पिल्लों) को अपना निशाना बना रहा है। पिछले 15 दिनों से यह ‘चूहे-बिल्ली’ का खेल रेलवे रोड स्थित सरकारी कॉलोनी में चल रहा है।

📸 क्या है पूरा मामला?

करीब दो हफ्ते पहले इस बंदर ने एक पिल्ले को उठा लिया था। वह उसे लेकर छतों, पेड़ों और बिजली के खंभों पर घूमता रहता। ताज्जुब की बात यह थी कि वह पिल्ले को नुकसान नहीं पहुँचा रहा था, बल्कि उसे अपनी गोद में चिपका कर रखता था।

🌊 जब पिल्ले को पानी की टंकी में डुबोया…

रेस्क्यू टीम (रॉकस्टार फैमिली, करनाल) ने बड़ी मशक्कत के बाद पहले पिल्ले को छुड़ा लिया। लेकिन अगले ही दिन बंदर ने दूसरे पिल्ले का ‘अपहरण’ कर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इस बार बंदर हिंसक हो गया है। उसने पिल्ले को लेकर पानी की टंकी में डुबकी लगा दी, जिससे लोग बुरी तरह डर गए।

🛡️ रेस्क्यू ऑपरेशन की बड़ी बातें:

  • 6 घंटे की घेराबंदी: टीम ने केले और खाने का लालच देकर बंदर को नीचे बुलाया।
  • वर्दी पहचान गया बंदर: अब बंदर इतना चालाक हो गया है कि रेस्क्यू टीम की गाड़ी और वर्दी देखते ही पिल्ले को लेकर ऊंचे पेड़ों पर गायब हो जाता है।
  • ह्यूमन साइकोलॉजी: टीम के सदस्य पवन शर्मा जाल और सुरक्षा उपकरणों के साथ लगातार बंदर का पीछा कर रहे हैं।

😨 इलाके में दहशत का माहौल

बंदर की इस हरकत से स्थानीय लोग, खासकर माता-पिता बेहद डरे हुए हैं। लोगों का कहना है:

“अगर यह बंदर जानवरों के बच्चों को इस तरह उठा सकता है, तो घर के आंगन में खेल रहे छोटे बच्चों के लिए भी खतरा हो सकता है।”

फिलहाल दूसरा पिल्ला अभी भी बंदर के कब्जे में है और रेस्क्यू टीम उसे बचाने के लिए नए प्लान पर काम कर रही है।

बंदरों द्वारा कुत्तों के पिल्लों को ‘अगवा’ करने या उन्हें अपने साथ रखने की यह घटना सुनने में अजीब लगती है, लेकिन इसके पीछे कुछ ठोस वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक (Animal Psychology) कारण होते हैं।

एक्सपर्ट्स और वन्यजीव वैज्ञानिकों के अनुसार इसके पीछे ये 4 मुख्य वजहें हो सकती हैं:

1. मातृ प्रेम या ‘मैटरनल इंस्टिंक्ट’ (Maternal Instinct)

अक्सर ऐसी मादा बंदरें जिनके अपने बच्चे की मौत हो गई हो, वे गहरे सदमे में होती हैं। अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए वे किसी दूसरे जानवर के छोटे बच्चे (जैसे पिल्ले) को अपना बच्चा समझकर उठा लेती हैं। वे उसे बिल्कुल वैसे ही सीने से चिपका कर रखती हैं जैसे अपने बच्चे को रखती थीं।

2. पिल्लों को ‘खिलौना’ समझना

बंदर बहुत बुद्धिमान और शरारती होते हैं। कई बार नर बंदर या युवा बंदर सिर्फ अपनी जिज्ञासा (Curiosity) के कारण पिल्लों को उठा लेते हैं। उनके लिए वह पिल्ला एक ‘जीवित खिलौने’ जैसा होता है। वे उसे खिलाने या उसके साथ खेलने की कोशिश करते हैं, लेकिन उन्हें यह अंदाजा नहीं होता कि ऊंचाई पर ले जाने या पानी में डुबोने से पिल्ले की जान जा सकती है।

3. कुत्तों से पुरानी ‘दुश्मनी’ का बदला

महाराष्ट्र के बीड़ (Beed) जिले में भी ऐसी ही घटना हुई थी। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर कुत्तों का झुंड किसी बंदर के बच्चे को मार देता है, तो बंदर ‘बदला’ लेने के लिए कुत्तों के बच्चों को निशाना बनाते हैं। वे पिल्लों को उठाकर ऊंचाई पर ले जाते हैं और उन्हें वहां छोड़ देते हैं ताकि वे भूखे मर जाएं या नीचे गिर जाएं। यह उनकी एक रक्षात्मक रणनीति (Defensive Strategy) भी होती है ताकि भविष्य में कुत्तों की संख्या कम रहे।

4. प्रभुत्व (Dominance) दिखाना

बंदर अपने इलाके में अपना दबदबा बनाए रखना चाहते हैं। दूसरे शिकारी जानवर (कुत्ते) के बच्चे को अपने कब्जे में रखकर वे यह संदेश देते हैं कि उस इलाके के ‘राजा’ वही हैं।


खतरा क्यों बढ़ जाता है?

जैसा कि पानीपत वाली खबर में दिखा, जब लोग या रेस्क्यू टीम बंदर के पीछे पड़ती है, तो बंदर ‘पैनिक’ (Panic) मोड में आ जाता है। घबराहट में वह पिल्ले को कसकर दबाता है, पानी में कूद जाता है या उसे ऊंचाई से गिरा देता है। इसीलिए एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ऐसे समय में बंदर को डराने के बजाय उसे शांति से खाने का लालच देकर नीचे बुलाना चाहिए।

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