नई दिल्ली: भारत में रसोई गैस के इस्तेमाल को लेकर एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। LPG Cylinder New Rule 2026 के तहत अब सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) घरेलू गैस सिलेंडर (14.2 किलो) में गैस की मात्रा घटाकर 10 किलो करने की तैयारी कर रही हैं। यह फैसला ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण युद्ध के कारण उपजे गैस संकट को देखते हुए लिया जा रहा है।
क्यों लिया गया यह फैसला? (ईरान युद्ध का असर)
LPG Cylinder New Rule 2026 को लागू करने का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन का टूटना है।

- होर्मुज जलमार्ग (Strait of Hormuz) बंद: भारत अपनी जरूरत की 60% एलपीजी इम्पोर्ट करता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। युद्ध के कारण यह रूट असुरक्षित हो गया है और भारत के 6 गैस टैंकर फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं।
- कतर का प्लांट बंद: दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी हब, कतर का ‘रास लफ्फान’ प्लांट हमलों के कारण बंद है, जिससे वैश्विक स्तर पर 20% सप्लाई रुक गई है।
💰 क्या होंगे नए दाम और कैसे होगी पहचान?
राहत की बात यह है कि गैस कम होने पर LPG Cylinder New Rule 2026 के अनुसार दाम भी उसी अनुपात में घटाए जाएंगे।

- कीमतों में कटौती: वर्तमान में दिल्ली में सिलेंडर ₹913 का है। 10 किलो गैस होने पर ग्राहकों को काफी कम पैसे चुकाने होंगे।
- पहचान: ग्राहकों को भ्रम न हो, इसके लिए 10 किलो वाले विशेष सिलेंडरों पर एक नया स्टिकर लगाया जाएगा, जिस पर वजन और कीमत स्पष्ट रूप से लिखी होगी।
📊 सप्लाई बचाने के लिए अब तक उठाए गए कड़े कदम
पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के मुताबिक, स्थिति ‘चिंताजनक’ है। सरकार ने पहले ही कई पाबंदियां लगा दी हैं:
- बुकिंग लॉक-इन पीरियड: शहरों में एक सिलेंडर मिलने के बाद दूसरा 25 दिन बाद ही बुक होगा। ग्रामीण इलाकों में यह समय 45 दिन है।
- PNG यूजर्स पर सख्ती: जिन घरों में पाइप वाली गैस (PNG) है, उनके लिए LPG सिलेंडर रखना अब गैर-कानूनी है। उन्हें अपना सिलेंडर सरेंडर करना होगा।
🛠️ बॉटलिंग प्लांट्स के लिए चुनौती
इस बदलाव को लागू करने के लिए तेल कंपनियों को अपने बॉटलिंग प्लांट्स के सिस्टम को ‘रीकैलिब्रेट’ (फिर से सेट) करना होगा। साथ ही, सरकार को डर है कि चुनावों के नजदीक इस फैसले का विरोध हो सकता है, लेकिन स्टॉक बचाने के लिए कंपनियों के पास अब ज्यादा रास्ते नहीं बचे हैं।
💡 ‘सच्च का समय’ का सुझाव (Consumer Alert):
गैस की बर्बादी बिल्कुल न करें। 14.2 किलो का सिलेंडर जहाँ 40 दिन चलता था, अब 10 किलो गैस लगभग एक महीने (30 दिन) तक चलेगी। सरकार का लक्ष्य है कि कम गैस में ज्यादा से ज्यादा परिवारों की रसोई जलती रहे।

