गूगल की नौकरी छोड़ी खोला रेस्टोरेंट: 4.2 करोड़ का पैकेज ठुकराकर शुरू किया स्टार्टअप, अब कमा रहे ₹21 करोड़ सालाना

Ex Google Engineer Salahuddin Abdul Kafi BBQ Restaurant Startup

आज के डिजिटल युग में गूगल (Google), माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) या मेटा (Meta) जैसी दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना करोड़ों युवाओं का सपना होता है। लेकिन क्या कोई व्यक्ति इन कंपनियों में मिलने वाले करोड़ों रुपये के सालाना पैकेज को महज इसलिए छोड़ सकता है क्योंकि उसका मन उब गया था? जी हां, सोशल मीडिया पर इस वक्त दो ऐसे जांबाज टेक प्रोफेशनल्स की कहानियां जमकर वायरल हो रही हैं, जिन्होंने कॉरपोरेट लाइफ के आराम को लात मारकर फूड इंडस्ट्री में अपनी किस्मत आजमाई और आज सफलता का नया इतिहास रच रहे हैं।

sachksameynews.in की इस विशेष स्टार्टअप और एंटरप्रेन्योरशिप रिपोर्ट में जानिए गूगल के पूर्व इंजीनियर सलाहुद्दीन अब्दुल-काफी और मेटा के पूर्व डेवलपर एल्विन टैन की कहानी, जिन्होंने साबित कर दिया कि असली खुशी और कामयाबी दिल की सुनने से ही मिलती है।

टेबल ऑफ कंटेंट (Table of Content)

  • 1. सलाहुद्दीन अब्दुल-काफी: 4.2 करोड़ का पैकेज छोड़ कैसे बने बार्बेक्यू किंग?
  • 2. खुद के लिए ₹0 सैलरी, सारा पैसा वापस बिजनेस में: सलाहुद्दीन का अनोखा मॉडल
  • 3. माता-पिता का इराकी बैकग्राउंड और कंसास सिटी बार्बेक्यू की वो यादें
  • 4. मेटा के इंजीनियर एल्विन टैन की कहानी: कोडिंग छोड़ लोकल मार्केट में बेच रहे नूडल्स

1. सलाहुद्दीन अब्दुल-काफी: 4.2 करोड़ का पैकेज छोड़ कैसे बने बार्बेक्यू किंग?

गूगल के पूर्व सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर सलाहुद्दीन अब्दुल-काफी (उम्र 35 वर्ष) ने जब पिछले साल अपने $450,000 (करीब 4.2 करोड़ रुपये) के आलीशान सालाना पैकेज वाली नौकरी को छोड़ने का फैसला किया, तो हर कोई हैरान था। सलाहुद्दीन का टेक करियर बेहद शानदार रहा था। उन्होंने गूगल से पहले माइक्रोसॉफ्ट, यूट्यूब और क्रूज जैसी नामी कंपनियों में लगभग 14 सालों तक बेहतरीन काम किया था।

नौकरी छोड़ने की मुख्य वजह: सलाहुद्दीन के अनुसार, एक समय के बाद उनका टेक इंडस्ट्री से पूरी तरह मन भर गया था। उन्हें महसूस होने लगा था कि इस सेक्टर में काम सिर्फ अंधी दौड़ में पैसा कमाने के लिए हो रहा है, न कि जमीनी स्तर पर लोगों की जिंदगी को बेहतर या खुशहाल बनाने के लिए। इसी असंतोष के कारण उन्होंने इस्तीफा दिया और पहले एक एनजीओ (NGO) से जुड़े।

दोस्तों की तारीफ से मिला ‘Kafi BBQ’ का आइडिया

सलाहुद्दीन को बचपन से ही खाना पकाने और नए-नए व्यंजनों के साथ प्रयोग करने का बहुत शौक था। वे अक्सर अपने दोस्तों के लिए वीकेंड पर डिनर पार्टियां और लाइव बार्बेक्यू (BBQ) होस्ट करते थे। उनके हाथ के बने कबाब और बार्बेक्यू खाकर दोस्तों ने तारीफों के पुल बांध दिए और कहा कि ऐसा स्वाद आज तक किसी रेस्टोरेंट में नहीं मिला। इसी हौसले के बाद उन्होंने दिसंबर 2024 में अमेरिका के टेक्सास में “Kafi BBQ” नाम से अपना पहला हलाल बार्बेक्यू रेस्टोरेंट खोला। उनका यह प्रयोग इतना सफल रहा कि ओपनिंग के समय जो खाना उन्होंने 3 दिनों के लिए तैयार किया था, वह पहले ही दिन चंद घंटों में बिक गया।

2. खुद के लिए ₹0 सैलरी, सारा पैसा वापस बिजनेस में: सलाहुद्दीन का अनोखा मॉडल

मौजूदा समय में सलाहुद्दीन के इस स्टार्टअप का सालाना टर्नओवर $2.3 मिलियन (करीब 21 करोड़ रुपये से ज्यादा) तक पहुंच गया है। टेक्सास के फूड लवर्स के बीच ‘Kafi BBQ’ एक बड़ा ब्रांड बन चुका है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी कमाई और सफलता के बावजूद सलाहुद्दीन ने आज तक इस रेस्टोरेंट से अपने लिए एक भी रुपया सैलरी के तौर पर नहीं निकाला है।

 Ex Google Engineer Salahuddin Abdul Kafi BBQ Restaurant Startup

वे अपनी पुरानी नौकरी की बचत (Savings) से ही अपने घर और दैनिक जीवन का खर्च चला रहे हैं। सलाहुद्दीन का कहना है कि रेस्टोरेंट को स्थापित करने में उनका करीब 8.4 करोड़ रुपये ($1 Million) का निवेश हुआ था, जिसे वे अभी तक पूरी तरह वसूल नहीं पाए हैं। इसके अलावा अमेरिका में कमर्शियल रेस्टोरेंट चलाने, बेहतरीन मार्केटिंग करने और उच्च गुणवत्ता का हलाल मीट सप्लाई करने की ऑपरेशनल कॉस्ट बहुत ज्यादा है, इसलिए वे मुनाफे का सारा पैसा वापस बिजनेस को बड़ा करने में ही री-इन्वेस्ट कर रहे हैं।

3. माता-पिता का इराकी बैकग्राउंड और कंसास सिटी बार्बेक्यू की वो यादें

सलाहुद्दीन अब्दुल-काफी के इस अनोखे फूड स्टार्टअप के पीछे उनके बचपन की कुछ बेहद खूबसूरत यादें जुड़ी हुई हैं। सलाहुद्दीन के माता-पिता इराकी मूल के थे, जो बाद में अमेरिका में आकर बस गए थे।

बचपन के दिनों को याद करते हुए सलाहुद्दीन बताते हैं कि उन्होंने पहली बार मिसौरी के मशहूर ‘कंसास सिटी बार्बेक्यू’ (Kansas City BBQ) में नॉन-हलाल बार्बेक्यू का स्वाद और वहां की कुकिंग तकनीक देखी थी। वह स्वाद और स्मोकी फ्लेवर उनके जेहन में इस कदर बैठ गया कि वे हमेशा से अमेरिका में रहने वाले मुस्लिम समुदाय और अन्य नागरिकों के लिए एक ऐसा प्रामाणिक स्थान बनाना चाहते थे, जहां 100% शुद्ध ‘हलाल टेक्सास बार्बेक्यू’ परोसा जा सके। आज उनका यही सपना उनके बिजनेस की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) बन चुका है।

4. मेटा के इंजीनियर एल्विन टैन की कहानी: कोडिंग छोड़ लोकल मार्केट में बेच रहे नूडल्स

सलाहुद्दीन की तरह ही सोशल मीडिया पर फेसबुक की पेरेंट कंपनी ‘मेटा’ (Meta) के पूर्व सॉफ्टवेयर इंजीनियर एल्विन टैन (Alvin Tan) की कहानी भी इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही है। एल्विन ने लाखों रुपये की नौकरी को सिर्फ इसलिए अलविदा कह दिया क्योंकि उन्हें कोडिंग की दुनिया बेहद उबाऊ और तनावपूर्ण लगने लगी थी।

  • बड़ी कंपनियों का कड़वा सच: एक इंटरव्यू के दौरान जब इंफ्लुएंसर लुइसा ते (Louisa Tay) ने एल्विन से पूछा कि लोग तो मेटा में जाने का सपना देखते हैं, फिर आपने इसे क्यों छोड़ा? इस पर एल्विन ने जवाब दिया कि बिग टेक कंपनियों का माहौल अब वैसा नहीं रहा। वहां लगातार छंटनी (Layoffs) का दौर चल रहा है, जिसके कारण उनकी खुद की टीम को कई बार री-स्ट्रक्चर किया गया। ऑफिस के बाहर खड़े होकर यह किसी का भी ड्रीम जॉब हो सकता है, लेकिन अंदर जाने के बाद इंसान सोचने लगता है कि क्या जिंदगी का मतलब सिर्फ कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठना ही है?
  • हॉक्केन मी (Hokkien Mee) का स्टॉल: मेटा छोड़ने के बाद एल्विन ने लोकल फूड मार्केट में एक छोटा सा नूडल्स का स्टॉल लगाया है, जहां वे पारंपरिक ‘हॉक्केन मी’ नूडल्स बेचते हैं। एल्विन स्वीकार करते हैं कि मेटा की सैलरी और इस स्टॉल की कमाई में जमीन-आसमान का अंतर है; मेटा में उन्हें इस स्टॉल से 3 गुना ज्यादा पैसे मिलते थे। लेकिन, उन्हें अपनी कॉर्पोरेट जॉब छोड़ने का कोई अफसोस नहीं है, क्योंकि अब वे जो काम कर रहे हैं, उससे उन्हें मानसिक शांति और सच्ची खुशी मिलती है।

निष्कर्ष: सलाहुद्दीन और एल्विन जैसे टेक प्रोफेशनल्स की ये कहानियां इस बात का जीता-जागता सबूत हैं कि जीवन में केवल भारी-भरकम बैंक बैलेंस ही सब कुछ नहीं होता। जब आप अपने पैशन को अपना प्रोफेशन बनाते हैं, तो न केवल आप इतिहास रचते हैं बल्कि मानसिक रूप से भी संतुष्ट रहते हैं।

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