भारत और फ्रांस के बीच रक्षा संबंधों में आज एक नया ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों आज मुंबई में मुलाकात करेंगे, जहां 3.25 लाख करोड़ रुपये की मेगा राफेल डील पर मुहर लग सकती है।
114 राफेल डील: भारत की सबसे बड़ी सैन्य खरीद
यह डील भारतीय वायुसेना (IAF) की घटती स्क्वाड्रन संख्या को देखते हुए बेहद महत्वपूर्ण है।
- कुल विमान: 114 राफेल फाइटर जेट।
- ‘सुपर राफेल’ (F-5 वेरिएंट): इस डील में 24 विमान ‘सुपर राफेल’ होंगे। ये दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में गिने जाएंगे, जो अभी विकास के चरण में हैं।
- फ्लीट मिक्स: बाकी विमान F-4 वेरिएंट के होंगे, जो वर्तमान में मौजूद F-3 वेरिएंट (अंबाला और हासीमारा बेस) से कहीं अधिक उन्नत हैं।
- कुल संख्या: इस डील के बाद भारत के पास कुल 150+ राफेल (36 पुराने + 114 नए) हो जाएंगे।
🇮🇳 ‘मेक इन इंडिया’ का बड़ा बूस्ट
इस डील की सबसे बड़ी खूबी इसका भारत में निर्माण होना है:
- 96 विमान भारत में बनेंगे: 114 में से केवल 18 विमान फ्रांस से ‘फ्लाइ-अवे’ स्थिति में आएंगे। बाकी 96 का निर्माण दसां एविएशन (Dassault Aviation) भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर भारत में करेगी।
- 60% स्वदेशी सामग्री: इन विमानों में करीब 60% पुर्जे और हथियार (मिसाइल, रडार सिस्टम) भारतीय होंगे।
- टेक्नोलॉजी ट्रांसफर: फ्रांस भारत को एयरफ्रेम और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकों का ट्रांसफर भी करेगा।
🗓️ राष्ट्रपति मैक्रों का कार्यक्रम (मुंबई और दिल्ली)
राष्ट्रपति मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक भारत के दौरे पर हैं।
- द्विपक्षीय बैठक: दोपहर 3:15 बजे मुंबई के लोक भवन में पीएम मोदी के साथ वार्ता।
- इनोवेशन ईयर 2026: शाम 5:15 बजे दोनों नेता ‘भारत-फ्रांस इनोवेशन ईयर 2026’ का उद्घाटन करेंगे।
- AI इम्पैक्ट समिट: इसके बाद मैक्रों दिल्ली रवाना होंगे, जहां वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित ग्लोबल समिट में हिस्सा लेंगे।
📊 राफेल वेरिएंट्स की तुलना
| विशेषता | वर्तमान राफेल (F-3) | नया राफेल (F-4) | सुपर राफेल (F-5) |
| जेनरेशन | 4.5 | 4.5+ (अपग्रेडेड) | 5th Gen के करीब |
| खासियत | न्यूक्लियर क्षमता, मीटियोर मिसाइल | बेहतर डेटा लिंक, साइबर सुरक्षा | स्टील्थ फीचर्स, ड्रोन कंट्रोल |
| डिलीवरी | भारत के पास 36 मौजूद | 2028-29 से शुरू | 2030 के बाद |
यह दौरा न केवल रक्षा क्षेत्र में बल्कि तकनीक, अंतरिक्ष और समुद्री सुरक्षा (Indo-Pacific strategy) में भी दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को अगले 25 वर्षों (Horizon 2047) के लिए नई दिशा देगा।

