Monsoon 2026 Forecast: इस साल मानसून पड़ेगा फीका, अल-नीनो का साया; 8 साल में सबसे कम बारिश का बड़ा अलर्ट!

Monsoon 2026 Forecast

देश के करोड़ों किसानों और आम जनता के लिए मौसम विभाग की ओर से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। Monsoon 2026 Forecast को लेकर भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने सोमवार को अपनी पहली रिपोर्ट जारी कर दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 में भारत में मानसून सामान्य से कम रहने के आसार हैं, जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और खेती पर पड़ सकता है।

Monsoon 2026 Forecast: 8 साल में सबसे कम बारिश का अनुमान

14 अप्रैल 2026 को जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस साल मानसून सीजन के दौरान देश में लगभग 80 सेंटीमीटर बारिश होने का अनुमान है। यह आंकड़ा 1971-2020 के औसत (87 सेमी) से काफी कम है। Monsoon 2026 Forecast में बताया गया है कि यह कुल बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का करीब 92% ही रहेगी।

2018 के बाद यह पहली बार है जब मानसून इतना कमजोर रहने वाला है। IMD के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. एम. मोहापात्रा ने स्पष्ट किया है कि लद्दाख और तेलंगाना जैसे कुछ चुनिंदा राज्यों को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून का प्रदर्शन निराशाजनक रह सकता है।


अल-नीनो का खतरा: क्या इस बार मानसून में होगी देरी?

Monsoon 2026 Forecast में मानसून की कमजोरी का सबसे बड़ा कारण ‘अल-नीनो’ (El Niño) को माना जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जून के आसपास समुद्र के तापमान में 3 से 4 डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है। यह स्थिति आमतौर पर भारत में मानसूनी हवाओं को कमजोर कर देती है।

इतिहास गवाह है कि 1951 के बाद से जब भी अल-नीनो सक्रिय हुआ है, 16 में से 10 बार भारत को सूखे या कम बारिश का सामना करना पड़ा है। अल-नीनो की वजह से इस बार मानसून के केरल पहुंचने में भी देरी होने की संभावना है, जिससे बुवाई का सीजन प्रभावित हो सकता है।


उत्तर और पश्चिम भारत में सूखे जैसे हालात की आशंका

मौसम विभाग ने देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए जो अनुमान जारी किए हैं, वे काफी डराने वाले हैं:

  • उत्तर भारत: पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में सामान्य से 20% तक कम बारिश हो सकती है। पश्चिमी यूपी और राजस्थान में सूखे जैसे हालात पैदा होने की आशंका जताई गई है।
  • मध्य और पश्चिम भारत: मध्य प्रदेश और गुजरात में भी 10-15% बारिश कम रहेगी। महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों में भी स्थिति गंभीर हो सकती है।
  • दक्षिण भारत: कर्नाटक और तेलंगाना में पानी की कमी हो सकती है, जिससे बांधों का जलस्तर गिरने का खतरा है।
  • राहत की खबर: केवल पूर्वोत्तर राज्यों (असम, मेघालय) और बिहार-बंगाल में बारिश लगभग सामान्य रहने की उम्मीद है।

आम आदमी की जेब पर पड़ेगा भारी असर: 9 बड़ी बातें

Monsoon 2026 Forecast की यह रिपोर्ट केवल किसानों के लिए नहीं, बल्कि शहरों में रहने वाले लोगों के लिए भी बड़ी चेतावनी है:

  1. महंगाई का झटका: धान, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों का उत्पादन घटने से दालों और सब्जियों के दाम आसमान छू सकते हैं।
  2. बिजली संकट: कम बारिश से बांधों में पानी कम होगा, जिससे बिजली उत्पादन घटेगा और गर्मी बढ़ने पर लोड शेडिंग बढ़ सकती है।
  3. खेती पर संकट: भारत की 64% आबादी खेती पर निर्भर है, कम बारिश से किसानों की लागत बढ़ेगी और ग्रामीण बाजार में मांग घटेगी।
  4. पानी की किल्लत: मानसून के कमजोर होने से पीने के पानी और सिंचाई के लिए जलाशयों पर दबाव बढ़ेगा।

मानसून के देरी से आने का इतिहास और भविष्य

पिछले साल मानसून समय से पहले 24 मई को केरल पहुंच गया था, लेकिन इस बार अल-नीनो सब कुछ बदल सकता है। Monsoon 2026 Forecast के मुताबिक, मानसून की वापसी भी इस बार अनिश्चित रह सकती है। हालांकि, सितंबर के अंत में ‘इंडियन ओशन डाइपोल’ (IOD) के पॉजिटिव होने से आखिरी दौर में कुछ अच्छी बारिश की उम्मीद जरूर बनी हुई है।

कमजोर मानसून की खबर निश्चित रूप से चिंताजनक है, लेकिन समय रहते जल संरक्षण और वैकल्पिक खेती की योजना बनाकर इसके असर को कम किया जा सकता है। मई के अंत में IMD एक और विस्तृत रिपोर्ट जारी करेगा। (सच का समय न्यूज़)

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