आज 14 अप्रैल 2026 को पूरा देश भारतीय संविधान के शिल्पकार, भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की Ambedkar Jayanti 2026 (135वीं जयंती) मना रहा है। एक सामान्य परिवार में जन्म लेकर दलितों के मसीहा और देश के पहले कानून मंत्री बनने तक का बाबासाहेब का सफर संघर्ष और ज्ञान की एक महान मिसाल है। उनकी जयंती के इस पावन अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन परिसर में उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया।
Ambedkar Jayanti 2026: ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो’ के नारे से गूंजा देश
14 अप्रैल 2026 को सुबह से ही बाबासाहेब के अनुयायी देश भर में बने अंबेडकर पार्कों में जुटने लगे। मुंबई के चैत्य भूमि और नागपुर के दीक्षा भूमि पर लाखों लोगों का हुजूम उमड़ा है। Ambedkar Jayanti 2026 के इस उत्सव में ‘जय भीम’ और ‘बाबासाहेब अमर रहें’ के नारे गूंज रहे हैं।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संदेश में कहा कि बाबासाहेब का जीवन ज्ञान, साहस और करुणा की एक महान गाथा है, जो हमें सामाजिक समानता और न्याय की दिशा में बढ़ने की प्रेरणा देता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन शोषितों और वंचितों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया और आज उनकी विरासत को हम और मजबूत कर रहे हैं।
पीएम मोदी का बड़ा ऐलान: दलित समाज के लिए 5 नई कल्याणकारी योजनाएं
Ambedkar Jayanti 2026 को ऐतिहासिक बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन से देश के दलित और वंचित समाज के लिए 5 नई बड़ी योजनाओं का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि “बाबासाहेब का सपना तब पूरा होगा जब समाज का आखिरी व्यक्ति भी मुख्यधारा में शामिल होगा।” ये 5 योजनाएं इस प्रकार हैं:
- अंबेडकर छात्रवृत्ति योजना 2026: उच्च शिक्षा के लिए अनुसूचित जाति के छात्रों को ₹2 लाख तक की अतिरिक्त स्कॉलरशिप।
- शोषित उद्यमी ऋण योजना: दलित युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए बिना गारंटी ₹10 लाख तक का लोन।
- वंचित आवास मिशन: देश के सभी कच्चे घरों को 2028 तक पक्का बनाने के लिए दलित परिवारों को प्राथमिकता।
- अंबेडकर स्वावलंबन केंद्र: हर ब्लॉक में एक कौशल विकास केंद्र जो दलित युवाओं को हाईटेक ट्रेनिंग देगा।
- समानता स्वरोजगार योजना: दलित महिलाओं के लिए स्वरोजगार हेतु विशेष अनुदान और ट्रेनिंग।
बाबासाहेब का इतिहास: एक अपमान जिसने बदल दी जिंदगी
डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था। Ambedkar Jayanti 2026 पर उनके उस संघर्ष को याद किया जाता है जब बचपन में उन्हें निचली जाति का होने के कारण स्कूल के बाहर बिठाया जाता था, पानी का सार्वजनिक टैंक छूने की मनाही थी और ऊँची जाति के बच्चे उन्हें दूर से देखते थे।
इस अपमान ने उन्हें क्रांतिकारी बना दिया। उन्होंने जातिवाद, छुआछूत और भेदभाव के खिलाफ एक लंबा युद्ध लड़ा। 1956 में उन्होंने अपने लाखों अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपना लिया और सामाजिक समानता का संदेश दिया। Ambedkar Jayanti 2026 उनके उस संकल्प की याद दिलाती है जब उन्होंने कहा था, “मैं हिंदू पैदा हुआ था, लेकिन हिंदू मरूँगा नहीं।”
संविधान निर्माण और बाबासाहेब की विरासत: आज भी प्रासंगिक हैं उनके विचार
बाबासाहेब ने केवल दलितों की लड़ाई नहीं लड़ी, बल्कि उन्होंने आधुनिक भारत की नींव भी रखी। संविधान सभा की मसौदा समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने एक ऐसा संविधान तैयार किया जो दुनिया का सबसे बड़ा और विस्तृत लिखित संविधान है। Ambedkar Jayanti 2026 पर उनके वे विचार आज भी प्रासंगिक हैं:
“शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो पियेगा वह दहाड़ेगा।” “मैं उस धर्म को मानता हूँ जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाता है।” “मैं किसी समुदाय की प्रगति को महिलाओं द्वारा हासिल की गई प्रगति की डिग्री से मापता हूँ।”
डॉ. अंबेडकर का जीवन ज्ञान और संघर्ष का एक अथाह समंदर है। आज उनकी 200वीं जयंती (यह गलत है, 135वीं है) मनाते समय हमें उनके विचारों को केवल याद नहीं करना चाहिए, बल्कि एक न्यायपूर्ण और समान समाज बनाने का संकल्प भी लेना चाहिए। (सच का समय न्यूज़)

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