Karnataka Student Screen Time Policy: कर्नाटक सरकार का बड़ा फैसला; 9वीं-12वीं के छात्रों का स्क्रीन टाइम होगा 1 घंटा, शाम 7 बजे के बाद इंटरनेट पर ‘ब्रेक’

Karnataka Student Screen Time Policy

बेंगलुरु: डिजिटल दुनिया की चकाचौंध के बीच किशोरों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बचाने के लिए कर्नाटक सरकार ने एक नई और सख्त राह चुनी है। Karnataka Student Screen Time Policy के तहत मंगलवार को एक ड्राफ्ट जारी किया गया, जिसमें 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए मनोरंजन के उद्देश्य से स्क्रीन टाइम को रोजाना केवल 1 घंटे तक सीमित करने की सिफारिश की गई है। सबसे चौंकाने वाला प्रस्ताव शाम 7 बजे के बाद इंटरनेट के इस्तेमाल को प्रतिबंधित करने का है।

 Karnataka Student Screen Time Policy news

🛑 शाम 7 बजे के बाद इंटरनेट बंद: क्या है ड्राफ्ट की सिफारिश?

सरकार द्वारा तैयार किए गए इस ड्राफ्ट में छात्रों के ‘डिजिटल वेल-बीइंग’ पर जोर दिया गया है। Karnataka Student Screen Time Policy की मुख्य सिफारिशें इस प्रकार हैं:

  • मनोरंजन की सीमा: पढ़ाई के अलावा मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल दिन में सिर्फ 1 घंटा ही होना चाहिए।
  • 7 PM कर्फ्यू: शाम 7 बजे के बाद इंटरनेट बंद करने का सुझाव दिया गया है ताकि बच्चे समय पर सो सकें।
  • स्लीप हाइजीन: सोने से कम से कम एक घंटा पहले छात्रों को हर तरह की स्क्रीन से दूर रखने की सलाह दी गई है।
  • चाइल्ड प्लान: मोबाइल कंपनियों को ऐसे ‘चाइल्ड प्लान’ बनाने का सुझाव है जिसमें केवल ऑडियो विकल्प हो और तय समय के बाद डेटा अपने आप कट जाए।

🏫 स्कूलों और घरों में आएंगे ये 4 बड़े बदलाव

Karnataka Student Screen Time Policy केवल पाबंदियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था में भी बदलाव का संकेत है:

  1. डिजिटल डिटॉक्स डे: स्कूलों में अब ‘टेक-फ्री पीरियड’ और ‘डिजिटल डिटॉक्स डे’ मनाए जाएंगे। छात्रों से संपर्क के लिए व्हाट्सएप ग्रुप्स की जगह पारंपरिक ‘स्कूल डायरी’ का इस्तेमाल फिर से शुरू होगा।
  2. साइबर सुरक्षा की पढ़ाई: सिलेबस में साइबर बुलिंग, प्राइवेसी और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार को शामिल किया जाएगा।
  3. शिक्षक और अभिभावक की भूमिका: शिक्षकों को ‘लत के संकेतों’ को पहचानने की ट्रेनिंग दी जाएगी, वहीं अभिभावकों को घर में ‘नो-फोन जोन’ बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
  4. AI पर गाइडलाइन: होमवर्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को नियंत्रित करने और नकल रोकने के लिए सख्त नियम बनाए जाएंगे।

🧠 इंटरनेट की लत: 25% टीनेजर्स हैं प्रभावित

स्वास्थ्य विभाग, निमहांस (NIMHANS) और मेंटल हेल्थ अथॉरिटी द्वारा तैयार इस ड्राफ्ट के पीछे गंभीर आंकड़े हैं। सरकार के मुताबिक, राज्य के करीब 25% किशोर इंटरनेट की लत (Internet Addiction) का शिकार हैं। इसके कारण छात्रों में नींद की कमी, चिंता (Anxiety) और ध्यान भटकने (Attention Deficit) जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।

🚫 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन

याद रहे कि यह पॉलिसी मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के उस ऐतिहासिक ऐलान के बाद आई है, जिसमें कर्नाटक ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। ऐसा करने वाला कर्नाटक देश का पहला राज्य बना है। नए ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट’ (DPDP) के तहत अब बच्चों को सोशल मीडिया अकाउंट बनाने के लिए माता-पिता की अनुमति और उम्र का वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा।


💡 ‘सच्च का समय’ का विशेष विश्लेषण:

“सोशल मीडिया पर मिलने वाला ‘इंस्टेंट वैलिडेशन’ (लाइक्स और कमेंट्स) किशोरों के दिमाग में डोपामाइन रिलीज करता है, जो धीरे-धीरे लत में बदल जाता है। Karnataka Student Screen Time Policy इस चक्र को तोड़ने की एक साहसिक कोशिश है। हालांकि, इसे लागू करना एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि इसके लिए घर-घर में माता-पिता के सक्रिय सहयोग की आवश्यकता है।”

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