नई दिल्ली: भारतीय सशस्त्र बलों (आर्मी, नेवी और एयर फोर्स) में देश की सेवा कर रही महिला अधिकारियों के लिए आज का दिन इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। Women Officers Permanent Commission SC Verdict के तहत सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारी न केवल स्थायी कमीशन (PC) की हकदार हैं, बल्कि जिन अधिकारियों की सेवा समाप्त हो चुकी है, उन्हें भी पूर्ण पेंशन लाभ दिया जाएगा।

अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि महिलाओं को स्थायी कमीशन से वंचित रखना उनकी योग्यता की कमी नहीं, बल्कि व्यवस्था में व्याप्त ‘संस्थागत भेदभाव’ का परिणाम था।
⚖️ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच के 3 बड़े फैसले
जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जवल भुईयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने Women Officers Permanent Commission SC Verdict में तीन मुख्य राहतें प्रदान की हैं:
- पेंशन का अधिकार: जो महिला अधिकारी कानूनी लड़ाई के दौरान सेवा से बाहर (Retire) हो गईं, उन्हें माना जाएगा कि उन्होंने पेंशन के लिए अनिवार्य 20 साल की सेवा पूरी कर ली है। उन्हें सभी पेंशन लाभ मिलेंगे।
- स्थायी कमीशन (PC): वर्तमान में कार्यरत महिला अधिकारियों को 60% कटऑफ अंक प्राप्त करने पर स्थायी कमीशन दिया जाएगा।
- एसीआर (ACR) में सुधार: कोर्ट ने पाया कि महिलाओं की परफॉर्मेंस रिपोर्ट (ACR) इस पूर्वाग्रह के साथ लिखी गई थी कि उन्हें आगे मौका नहीं मिलेगा। अब इसे सुधारने और समान मूल्यांकन करने का आदेश दिया गया है।
🚩 सेनाओं की स्थिति: कहाँ क्या बदला?
सुप्रीम कोर्ट ने तीनों सेनाओं के मूल्यांकन के तरीकों पर अलग-अलग टिप्पणियां कीं:
- थलसेना (Army): कोर्ट ने पाया कि महिलाओं को जरूरी ट्रेनिंग से वंचित रखा गया और उनके ACR मेरिट के खिलाफ लिखे गए। आर्टिकल 142 के तहत ‘पूर्ण न्याय’ करते हुए इन्हें स्थायी कमीशन के योग्य माना गया।
- नौसेना (Navy): यहाँ ‘डायनेमिक वैकेंसी मॉडल’ को तो सही माना गया, लेकिन मूल्यांकन के मापदंडों में पारदर्शिता की कमी पाई गई।
- वायुसेना (Air Force): कोर्ट ने कहा कि न्यूनतम प्रदर्शन मानक जल्दबाजी में लागू किए गए थे, जिसे सुधारने की जरूरत है।
⏳ 23 साल लंबी कानूनी लड़ाई का अंत
यह मामला 2003 में वकील बबीता पुनिया द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका से शुरू हुआ था।
- 2010: दिल्ली हाईकोर्ट ने महिलाओं के पक्ष में फैसला सुनाया।
- 2019: केंद्र सरकार ने नीति तो बनाई, लेकिन एक क्लॉज जोड़ दिया कि इसका फायदा सिर्फ मार्च 2019 के बाद आने वाली महिलाओं को मिलेगा।
- 2026: अब सुप्रीम कोर्ट ने उन सभी विसंगतियों को दूर कर दिया है, जिससे उन महिलाओं को न्याय मिला है जिन्होंने दशकों तक यह लड़ाई लड़ी।
💡 ‘सच्च का समय’ का विशेष विश्लेषण:
“यह फैसला केवल पेंशन या नौकरी के बारे में नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के ‘संवैधानिक सम्मान’ की जीत है। सेना की कॉम्बैट यूनिट्स (इन्फैंट्री, आर्मर्ड) में अभी भी महिलाओं की सीधी एंट्री पर पाबंदी है, लेकिन इस फैसले ने भविष्य में उन दरवाजों को खोलने की नींव रख दी है।”
यह JAG और AEC विभाग पर लागू नहीं होगा क्योंकि उन्हें 2010 से ही यह मौका मिल रहा था। बाकी थलसेना, नौसेना और वायुसेना की पात्र महिला अधिकारियों पर यह प्रभावी होगा।

