तालिका (Table of Contents)
- कैप्टन स्मित मच्छर ने अबू धाबी अस्पताल से बताई आपबीती
- कॉकपिट का दरवाजा खोलकर बचाई सैकड़ों जिंदगियां
- हनुमान चालीसा के पाठ ने दिया हिम्मत और हौसला
- पीएम नरेंद्र मोदी ने फोन कर बढ़ाया मान
- सऊदी अरब और यूएई सरकार की सराहना
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में बुधवार सुबह कॉकपिट के अंदर पायलटों के बीच झगड़ा हो गया। ओमानी पायलट ने भारतीय पायलट स्मित मच्छर पर चाकू से हमला कर दिया। इसके बाद विमान तेजी से नीचे जाने लगा।
कैप्टन स्मित मच्छर ने अबू धाबी के अस्पताल से अपनी आपबीती साझा करते हुए कहा कि वे विमान में मौजूद लोगों को मरने नहीं दे सकते थे। गंभीर चोटों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कॉकपिट का दरवाजा खोलकर सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की।
इस साहसिक काम के बाद पूरी दुनिया में उनकी सूझबूझ की सराहना की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनसे फोन पर बातचीत कर उनके स्वास्थ्य का हाल जाना।

कैप्टन स्मित मच्छर ने अबू धाबी अस्पताल से बताई आपबीती
दुबई से आ रही फ्लाइट में जब अचानक हालात बिगड़े, तब कैप्टन स्मित मच्छर गंभीर रूप से घायल हो चुके थे। जमीन पर गिरने और शरीर में गंभीर चोटें आने के बाद भी उनका ध्यान सिर्फ फ्लाइट की सुरक्षा पर था।

स्मित को 17 साल का लंबा अनुभव है और वे पिछले 11 वर्षों से कैप्टन के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि इतने सालों के अनुभव के कारण उन्हें आंखें बंद करके भी समझ आ जाता है कि हवा में विमान के अंदर क्या चल रहा है।
“मुझे लगा कि अगर मैं नहीं उठा और कोई कदम नहीं उठाया, तो हालात और खराब हो जाएंगे। मैं अपनी जान बचाने की कोशिश तो कर रहा था, लेकिन मुझे यह भी पता था कि मैं उन लोगों को मरने नहीं दे सकता।” — कैप्टन स्मित मच्छर
कॉकपिट का दरवाजा खोलकर बचाई सैकड़ों जिंदगियां
जब विमान में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो रही थी, तब कैप्टन ने अपनी आखिरी शक्ति का इस्तेमाल किया। उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोला ताकि अन्य क्रू मेंबर और मदद करने वाले लोग अंदर आ सकें।
उनकी इस त्वरित सोच और साहसिक कदम ने एक बहुत बड़े हादसे को टाल दिया। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि इस पूरे बचाव कार्य में बाकी क्रू सदस्यों की भूमिका भी बेहद अहम थी।
कैप्टन स्मित के इस कारनामे की चर्चा अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी जोर-शोर से हो रही है। उनकी तुलना दुनिया के महान पायलटों से की जा रही है। विस्तृत रिपोर्ट देखने के लिए आप BBC News और Reuters की आधिकारिक वेबसाइट पर पढ़ सकते हैं।
हनुमान चालीसा के पाठ ने दिया हिम्मत और हौसला

अत्यधिक शारीरिक दर्द और गंभीर चोटों से गुजरते हुए कैप्टन स्मित ने आध्यात्मिक शक्ति का सहारा लिया। उन्होंने बताया कि जब भी उन्हें असह्य दर्द होता था, वे मन ही मन हनुमान चालीसा का पाठ करने लगते थे।
उनका कहना है कि भगवान के आशीर्वाद और देशवासियों की प्रार्थनाओं के बल पर ही उनकी जान बची है। वे पूरी तरह सकारात्मक हैं और उन्हें भरोसा है कि वे बहुत जल्द ठीक होकर दोबारा प्लेन उड़ाएंगे।
उन्होंने यह भी साझा किया कि वे विदेश में रहने के बाद भी अपनी भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जुड़े हुए हैं। वे रोजाना सुबह अपने दो साल के बेटे को गोद में बैठाकर हनुमान चालीसा सुनाते हैं।
पीएम नरेंद्र मोदी ने फोन कर बढ़ाया मान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अस्पताल में भर्ती कैप्टन स्मित मच्छर से फोन पर बात की और उनके साहस की दिल खोलकर तारीफ की। पीएम मोदी ने कहा कि पूरे भारत को उनके इस फैसले और बहादुरी पर गर्व है।
पीएम मोदी ने कहा कि देशभर में कैप्टन स्मित के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए महामृत्युंजय जाप और विशेष पूजा-अर्चना चल रही है। 140 करोड़ देशवासी उनके सुरक्षित और सेहतमंद घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने स्मित के माता-पिता भूपेंद्रभाई और गीताबेन तथा उनकी पत्नी सोनलबेन के धैर्य और संस्कारों की भी सराहना की।
सऊदी अरब और यूएई सरकार की सराहना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बातचीत के दौरान सऊदी अरब और यूएई सरकारों का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने कैप्टन स्मित के इलाज और देखभाल में पूरा सहयोग दिया है।
पीएम ने कैप्टन स्मित को भरोसा दिलाया कि भारत सरकार और पूरा देश हर कदम पर उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा, “आप बस पूरी तरह स्वस्थ हो जाइए, बाकी बातें हम सामने बैठकर करेंगे।”
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