Karnal Meri Fasal Mera Byora Scam: बंजर जमीन और श्मशान घाट को पोर्टल पर दिखा किया करोड़ों का घोटाला; 2 सरपंच सस्पेंड

करनाल मेरी फसल मेरा ब्यौरा घोटाला

Karnal Meri Fasal Mera Byora Scam (करनाल मेरी फसल मेरा ब्यौरा घोटाला) ने हरियाणा के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। करनाल जिले के दो गांवों, अमुपूर और सांभली में सरपंचों और आढ़तियों ने मिलकर एक ऐसा विशाल घोटाला किया, जिसमें बंजर जमीन, गौचरान, श्मशान घाट और सरकारी स्कूल तक की जमीन को “मेरी फसल मेरा ब्यौरा” पोर्टल पर खेती योग्य दिखाकर करोड़ों रुपये की पेमेंट डकार ली गई।

(sachkasameynews.in) की इस विस्तृत रिपोर्ट में पढ़िए कैसे डिजिटल पोर्टल की खामियों का फायदा उठाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया।

1. घोटाले का मोडस ऑपरेंडी: 3 नामों के इर्द-गिर्द घूमता खेल

इस शातिर घोटाले की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि पोर्टल पर एंट्री हमेशा केवल तीन ही नामों तक सीमित रहती थी। Karnal Meri Fasal Mera Byora Scam को अंजाम देने के लिए कभी भी चौथे व्यक्ति की एंट्री नहीं होने दी गई ताकि राज सुरक्षित रहे।

  • मुख्य किरदार: आढ़ती ईश्वर चंद, उनका पुत्र नवीस कुमार और पुत्रवधु पूनम।
  • फर्जी पट्टेदार: कागजों में किसान ये तीन लोग ही दिखते थे, जबकि जमीन का असली मालिकाना हक ग्राम पंचायत या अन्य विभागों के पास था।
  • मंडियों से साठगांठ: फर्जी फसल दर्ज कर मंडियों से गेटपास कटवाए गए और सीधे बैंक खातों में भुगतान लिया गया।

सरकारी पोर्टल की पारदर्शिता और नियमों के बारे में अधिक जानकारी के लिए Haryana Govt Official Portal पर विजिट कर सकते हैं।

2. अमुपूर और सांभली गांव: सरकारी जमीन पर फर्जीवाड़े का आंकड़ा

Karnal Meri Fasal Mera Byora Scam की शुरुआत 2023 में अमुपूर से हुई और 2024 तक यह सांभली गांव तक फैल गई।

  • अमुपूर गांव: यहां कुल 94 एकड़ 3 कनाल जमीन का पोर्टल हुआ, जिसमें से 6 एकड़ 5 कनाल जमीन पूरी तरह बंजर या झाड़ियों वाली थी।
  • सांभली गांव: यहां 48 एकड़ से अधिक जमीन पोर्टल पर दिखाई गई, जिसमें से 30 एकड़ 3 कनाल जमीन गैर-कृषि योग्य थी।
  • गौचरान की भूमि: सांभली में 147 कनाल जमीन नवीस कुमार के नाम दर्ज की गई, जो पूरी तरह से गौचरान (गाय के चरने की जमीन) थी।

Karnal Meri Fasal Mera Byora Scam Investigation by Agriculture Department

3. पंच बलराज शर्मा की शिकायत और प्रशासनिक कार्रवाई

इस भयावह घोटाले का खुलासा तब हुआ जब अमुपूर के शिक्षित पंच बलराज शर्मा ने सिस्टम में विसंगतियां देखीं। उन्होंने 9 जुलाई 2025 को जिला उपायुक्त को लिखित शिकायत दी।

  1. जांच रिपोर्ट: कृषि विभाग और बीडीपीओ निसिंग की रिपोर्ट में गड़बड़ी की पुष्टि हुई।
  2. निलंबन (Suspension): जांच में दोषी पाए जाने पर सांभली की सरपंच किरणपाल कौर और अमुपूर के सरपंच युद्धवीर सिंह को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया।
  3. SDM जांच: अब नीलोखेड़ी के एसडीएम को 30 दिनों के भीतर विस्तृत जांच पूरी करने के आदेश दिए गए हैं।

भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून और आईपीसी की धाराओं की जानकारी के लिए Indian Kanoon एक डिजिटल रिसोर्स है।

4. भ्रष्टाचार की परतें: श्मशान और जोहड़ तक को नहीं छोड़ा

Karnal Meri Fasal Mera Byora Scam की सबसे शर्मनाक बात यह है कि आरोपियों ने श्मशान घाट, जोहड़ और पब्लिक हेल्थ विभाग की जमीन पर भी धान और गेहूं की फसल दिखा दी।

  • सरकारी स्कूल की जमीन: कागजों में स्कूल की जमीन पर भी लहलहाती फसल दिखाकर भुगतान उठाया गया।
  • करोड़ों का गबन: यह घोटाला केवल लाखों तक सीमित नहीं है, बल्कि जांच अधिकारियों के अनुसार यह कई करोड़ों तक जा सकता है।
गांव का नामगैर-कृषि योग्य जमीन (पोर्टल पर)आरोपी सरपंच
अमुपूर6 एकड़ 5 कनालयुद्धवीर सिंह (निलंबित)
सांभली30 एकड़ 3 कनालकिरणपाल कौर (निलंबित)

डिजिटल सिस्टम में सेंध और जवाबदेही

Karnal Meri Fasal Mera Byora Scam (करनाल मेरी फसल मेरा ब्यौरा घोटाला) यह साबित करता है कि डिजिटल सिस्टम कितना भी आधुनिक क्यों न हो, जमीनी स्तर पर निगरानी के बिना भ्रष्टाचार को रोकना चुनौतीपूर्ण है। यह मामला न केवल सरपंचों की नैतिकता पर सवाल उठाता है, बल्कि कृषि विभाग के वेरिफिकेशन प्रोसेस की पोल भी खोलता है।

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