ब्रह्मांड की गहराइयों को नापने निकला इंसान एक बार फिर जीत का परचम लहराकर वापस लौट आया है। Artemis II Moon Mission Crew Landing की ऐतिहासिक सफलता के साथ आज 11 अप्रैल 2026 को सुबह 5:37 बजे नासा के चार अंतरिक्ष यात्रियों ने प्रशांत महासागर में सुरक्षित ‘स्प्लैशडाउन’ किया। 1972 के बाद यह पहली बार है जब कोई मानव मिशन चंद्रमा की दहलीज को पार कर वापस लौटा है, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है।

Artemis II Moon Mission Crew Landing: 11.17 लाख किमी का रोमांचक सफर
नासा का ओरियन कैप्सूल 2 अप्रैल को लॉन्च हुआ था और पिछले 10 दिनों में इसने अंतरिक्ष विज्ञान के कई नए कीर्तिमान स्थापित किए। Artemis II Moon Mission Crew Landing से पहले इस यान ने करीब 11.17 लाख किलोमीटर की लंबी दूरी तय की। 6 अप्रैल को इस मिशन ने पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी (4,06,778 किमी) तक जाने का रिकॉर्ड बनाया, जो पिछले 50 सालों के किसी भी इंसानी मिशन से कहीं ज्यादा है।
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इस मिशन में अमेरिका के रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हेंसन शामिल थे। हालांकि इन यात्रियों ने चांद की सतह पर कदम नहीं रखा, लेकिन इन्होंने चंद्रमा के ‘अंधेरे हिस्से’ (Far Side) के ऊपर से उड़ान भरी और वहां की ऐसी तस्वीरें कैद कीं जो आज से पहले कभी नहीं देखी गईं।
3000 डिग्री तापमान और 6 मिनट का खौफनाक ‘ब्लैकआउट’
धरती पर वापसी का सफर किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। Artemis II Moon Mission Crew Landing के दौरान जब ओरियन यान ने पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया, तो उसकी रफ्तार 42,000 किमी प्रति घंटा थी। हवा के घर्षण के कारण यान के बाहर का तापमान 3,000 डिग्री फेरनहाइट तक पहुंच गया, जो सूरज की सतह के तापमान का लगभग आधा है।
सुबह 5:03 बजे एक ऐसा समय आया जब यान के चारों ओर प्लाज्मा की परत बनने के कारण धरती से संपर्क पूरी तरह टूट गया। इस 6 मिनट के ‘कम्युनिकेशन ब्लैकआउट’ ने नासा के वैज्ञानिकों की धड़कनें बढ़ा दी थीं। लेकिन ओरियन की मजबूत हीट शील्ड ने अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रखा और 5:37 बजे यान पैराशूट के जरिए सैन डिएगो के तट के पास समुद्र में उतर गया।
Artemis II Moon Mission: चांद के अंधेरे हिस्से की अद्भुत फोटोग्राफी
इस मिशन की सबसे बड़ी उपलब्धि चंद्रमा के उन हिस्सों की फोटोग्राफी रही जो पृथ्वी से कभी नजर नहीं आते। अंतरिक्ष यात्रियों ने ‘साउथ पोल-एटकेन’ बेसिन की तस्वीरें लीं, जो सौर मंडल के सबसे पुराने और गहरे गड्ढों में से एक है।

ओरियन यान की खिड़की से चांद की सतह के पीछे छिपती पृथ्वी। नीली धरती पर ऑस्ट्रेलिया और ओशिनिया क्षेत्र के ऊपर बादलों की आवाजाही साफ दिख रही है।

‘टर्मिनेटर’ लाइन पर पड़ती सूरज की तिरछी रोशनी से चांद की ऊबड़-खाबड़ सतह और गहरे गड्ढे बेहद साफ नजर आ रहे हैं।
इसके अलावा, यान की खिड़की से चांद की सतह के पीछे छिपती नीली धरती का नजारा (Earthrise) भी कैमरे में कैद किया गया। यात्रियों ने फ्लाई-बाय के दौरान खास चश्मों का उपयोग कर सूर्य ग्रहण का भी अनुभव किया। ये तस्वीरें न केवल वैज्ञानिक नजरिए से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि भविष्य में चांद पर इंसानी बस्तियां बसाने के लिए नक्शा तैयार करने में भी मदद करेंगी।
अब 2028 में चांद पर उतरने की महा-तैयारी
Artemis II Moon Mission Crew Landing की इस शानदार सफलता ने साल 2028 में होने वाले ‘आर्टेमिस III’ मिशन का रास्ता साफ कर दिया है। नासा का अगला लक्ष्य केवल चांद पर जाना नहीं, बल्कि वहां एक स्थायी ‘लूनर बेस’ बनाना है।
70 के दशक के ‘अपोलो मिशन’ और आज के ‘आर्टेमिस प्रोग्राम’ में यही सबसे बड़ा अंतर है। अपोलो सिर्फ एक स्पेस रेस थी, लेकिन आर्टेमिस भविष्य की तैयारी है। नासा चाहता है कि इंसान चांद पर रहना और काम करना सीखे, ताकि भविष्य में मंगल ग्रह (Mars) की लंबी यात्राओं के लिए चंद्रमा को एक लॉन्चपैड की तरह इस्तेमाल किया जा सके।
Artemis II Vs Apollo: 5 दशकों का फासला और नई तकनीक
आर्टेमिस II मिशन ने अपोलो-13 के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। जहां अपोलो मिशन के दौरान तकनीक सीमित थी, वहीं ओरियन कैप्सूल अत्याधुनिक ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ से लैस है। इस बार अंतरिक्ष यात्रियों में विविधता का भी ध्यान रखा गया है, जिसमें पहली महिला और पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री ने चंद्रमा की कक्षा तक का सफर तय किया।

Artemis II Mission लॉन्च: 52 साल बाद फिर चांद के करीब पहुंचेगा इंसान; नासा ने रचा नया इतिहास


