आर्टेमिस-II मिशन लॉन्च

Artemis 2 Astronauts Capture Earth Photos: 1.8 लाख किमी दूर से कैसी दिखती है हमारी दुनिया? अंतरिक्ष यात्रियों ने भेजीं अद्भुत तस्वीरें

वॉशिंगटन/ह्यूस्टन: आधी सदी से भी ज्यादा समय के बाद, जब इंसान एक बार फिर चंद्रमा की दहलीज पर कदम रखने की तैयारी कर रहा है, तब अंतरिक्ष की गहराइयों से कुछ ऐसी तस्वीरें आई हैं जिन्होंने पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध कर दिया है। नासा (NASA) के ऐतिहासिक मिशन के दौरान Artemis 2 Astronauts Capture Earth Photos की खबर ने इंटरनेट पर सनसनी मचा दी है। पृथ्वी से लगभग 1.8 लाख किलोमीटर की दूरी से खींची गई इन तस्वीरों में हमारी नीली धरती अंतरिक्ष के काले कैनवास पर किसी चमकते हुए रत्न की तरह दिखाई दे रही है।


Artemis 2 Astronauts Capture Earth Photos: अंतरिक्ष से दिखा धरती का

पृथ्वी का घुमावदार हिस्सा सूर्य की रोशनी में चमक रहा है
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आर्टेमिस-2 मिशन पर सवार चार जांबाज अंतरिक्ष यात्रियों ने अपने सफर के दौरान ओरियन कैप्सूल की खिड़की से पृथ्वी के शानदार नजारे कैद किए हैं। Artemis 2 Astronauts Capture Earth Photos के इस संकलन में एक तस्वीर ऐसी है जहाँ पृथ्वी का घुमावदार हिस्सा सूर्य की रोशनी में चमक रहा है, वहीं दूसरी तस्वीर में घने सफेद बादलों से ढकी पूरी धरती नजर आ रही है।

ये अंतरिक्ष यात्री (रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसन) फिलहाल पृथ्वी से 1.8 लाख किमी दूर हैं और लगातार चंद्रमा की ओर बढ़ रहे हैं।


1972 के बाद पहली बार चांद के इतने करीब इंसान

यह मिशन इसलिए खास है क्योंकि 1972 में अपोलो-17 के बाद पहली बार मानव जाति चंद्रमा के इतने करीब पहुँच रही है। हालांकि, इस बार अंतरिक्ष यात्री चांद की सतह पर उतरेंगे नहीं, बल्कि उसकी कक्षा का चक्कर लगाकर सुरक्षित वापस लौटेंगे। यह मिशन भविष्य के ‘आर्टेमिस-3’ के लिए एक टेस्ट रन है, जिसमें इंसान फिर से चांद पर कदम रखेगा।


ट्रांसलूनर इंजेक्शन: जब ओरियन ने पकड़ी 34,000 किमी/घंटा की रफ्तार

शुक्रवार सुबह ओरियन कैप्सूल ने अपने शक्तिशाली थ्रस्टर्स फायर किए और पृथ्वी की कक्षा को छोड़ दिया। इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में ‘ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न’ (TLI) कहा जाता है। इस 6 मिनट के युद्धाभ्यास ने यान की रफ्तार को बढ़ाकर 34,000 किलोमीटर प्रति घंटा कर दिया, जो इसे चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र तक पहुँचाने के लिए आवश्यक थी।


मिशन के अगले 5 दिन: क्या होगा कम्युनिकेशन ब्लैकआउट?

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CSA एस्ट्रोनॉट जेरेमी हैनसेन और नासा के अंतरिक्ष यात्री रीड वाइसमैन, क्रिस्टीना कोच और विक्टर ग्लोवर नेओरियन स्पेसक्राफ्ट से बातचीत की।

जैसे-जैसे ओरियन चांद के करीब पहुँचेगा, मिशन और भी चुनौतीपूर्ण होता जाएगा:

  • चांद का बास्केटबॉल जैसा रूप: छठे दिन चांद खिड़की से इतना बड़ा दिखेगा जैसे कोई बास्केटबॉल पास रखी हो।
  • 50 मिनट का सन्नाटा: जब ओरियन चंद्रमा के ‘डार्क साइड’ (वह हिस्सा जो पृथ्वी से नहीं दिखता) के पीछे जाएगा, तो पृथ्वी से रेडियो संपर्क पूरी तरह कट जाएगा। इसे ‘कम्युनिकेशन ब्लैकआउट’ कहा जाता है।
  • दूरी का नया रिकॉर्ड: यह मिशन अपोलो-13 के 4,00,171 किमी की दूरी का रिकॉर्ड तोड़कर 4,02,336 किमी तक पहुँच सकता है।

वापसी का सफर: ‘गुलेल’ की तरह होगा इस्तेमाल

सातवें दिन ओरियन चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का उपयोग एक ‘फ्री रिटर्न ट्रैजेक्टरी’ के रूप में करेगा। इसे आसान भाषा में ‘स्लिंगशॉट’ (गुलेल) प्रभाव कहते हैं, जो यान को बिना अतिरिक्त ईंधन खर्च किए वापस पृथ्वी की ओर धकेल देगा।

11 अप्रैल की सुबह यह यान करीब 11 लाख किमी का कुल सफर तय कर प्रशांत महासागर में गिरेगा, जहाँ नासा की रिकवरी टीमें इसे सुरक्षित बाहर निकालेंगी।


आर्टेमिस-II मिशन लॉन्च
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