लेखक: अभिषेक रंगा
बॉलीवुड के ‘पॉवरहाउस’ कहे जाने वाले रणवीर सिंह आज जिस मुकाम पर हैं, वहां तक पहुँचना किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। Ranveer Singh Struggle Success Story हमें सिखाती है कि अगर जुनून बड़ा हो, तो बड़ी से बड़ी मुसीबत भी घुटने टेक देती है। आज भले ही रणवीर करोड़ों के बंगले में रहते हों, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब उनके पिता ने बेटे का सपना पूरा करने के लिए अपना घर और गाड़ी तक बेच दी थी।
कास्टिंग काउच का कड़वा सच और समझौता करने से इनकार

रणवीर सिंह का पूरा नाम रणवीर सिंह भावनानी है।
रणवीर सिंह ने अपने करियर की शुरुआत में उस काले सच का सामना किया, जिससे हर नया कलाकार डरता है। Ranveer Singh Struggle Success Story का एक काला अध्याय वह ‘कास्टिंग काउच’ है, जिसका खुलासा खुद रणवीर ने किया था। संघर्ष के दिनों में एक तथाकथित कास्टिंग डायरेक्टर ने उन्हें अपने घर बुलाया और काम के बदले गलत मांगें कीं।
रणवीर बताते हैं कि उस व्यक्ति ने उनसे ‘स्मार्ट और सेक्सी’ बनने को कहा और आपत्तिजनक इशारे किए। लेकिन रणवीर ने अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया और तुरंत वहां से बाहर निकल गए। यह उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति ही थी जिसने उन्हें गलत रास्ते पर जाने से रोका और आज वे बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारों में से एक हैं।
थिएटर में झाड़ू-पोंछा और चाय-समोसे लाने का दौर
क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आज का सुपरस्टार कभी पृथ्वी थिएटर में झाड़ू लगाता था? Ranveer Singh Struggle Success Story में वह दौर भी आया जब रणवीर मकरंद देशपांडे के थिएटर ग्रुप में काम पाने के लिए सुबह 7:30 बजे पहुँच जाते थे। वे वहां ताला खोलते, पंखे चलाते, सफाई करते और एक्टर्स के लिए चाय-नाश्ता लाते थे।
उन्होंने वहां कारपेंटर, पेंटर और लोडर तक का काम किया। उनका मकसद सिर्फ इतना था कि वे बड़े कलाकारों को रिहर्सल करते देख सकें और एक्टिंग की बारीकियों को सीख सकें। वे चुपचाप एक कोने में बैठकर कलाकारों को ‘क्यू’ दिया करते थे, ताकि किसी दिन उन्हें भी मंच पर खड़े होने का मौका मिले।
जब पिता ने बेच दिया घर और गाड़ी: एक भावनात्मक सफर
रणवीर सिंह एक सिंधी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता जगजीत सिंह भावनानी ने अपने बेटे के ‘एक्टर’ बनने के जिद को पूरा करने के लिए अपनी पूरी जमा-पूंजी लगा दी थी। Ranveer Singh Struggle Success Story अधूरी है अगर उनके पिता के बलिदान का जिक्र न हो।
अमेरिका में पढ़ाई का खर्च और मुंबई में स्ट्रगल के दौरान पोर्टफोलियो बनवाने के लिए रणवीर के पास पैसे नहीं थे। उनके पिता ने अपना बड़ा घर बेच दिया और पूरा परिवार एक छोटे घर में शिफ्ट हो गया। इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी कार तक बेच दी और बसों में सफर करना शुरू कर दिया, ताकि रणवीर एक अच्छा पोर्टफोलियो बनवा सकें और ऑडिशन दे सकें।
एडवरटाइजिंग से एक्टिंग तक: ‘बैंड बाजा बारात’ का वो टर्निंग पॉइंट
एक्टिंग में आने से पहले रणवीर ने एक एडवरटाइजिंग कंपनी में बतौर कॉपीराइटर काम किया था। उन्हें लिखने का शौक था, लेकिन उनका दिल हमेशा कैमरे के सामने रहने के लिए धड़कता था। Ranveer Singh Struggle Success Story में बदलाव तब आया जब उनकी दोस्त शानू शर्मा ने उन्हें यशराज फिल्म्स (YRF) के लिए ऑडिशन देने का मौका दिलाया।
शुरुआत में रणवीर काफी नर्वस थे और कई ऑडिशन में फेल भी हुए। लेकिन आदित्य चोपड़ा ने उनके भीतर के ‘बिट्टू शर्मा’ को पहचान लिया था। 2010 में आई फिल्म ‘बैंड बाजा बारात’ ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया और उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
धुरंधर: 2026 की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर और सुपरस्टारडम
रणवीर के करियर में कई उतार-चढ़ाव आए। ‘लुटेरा’, ‘राम-लीला’, ‘बाजीराव मस्तानी’ और ‘पद्मावत’ जैसी फिल्मों ने उन्हें एक वर्सेटाइल एक्टर साबित किया। हालांकि बीच में कुछ फिल्में फ्लॉप भी हुईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। साल 2025-26 में रिलीज हुई उनकी फिल्म ‘धुरंधर’ ने बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।
आज Ranveer Singh Struggle Success Story हर उस युवा के लिए मिसाल है जो बिना किसी गॉडफादर के बॉलीवुड में अपनी जगह बनाना चाहता है। रणवीर सिंह ने साबित कर दिया कि अगर आप अपनी कला के प्रति ईमानदार हैं और मेहनत करने से नहीं डरते, तो सफलता एक न एक दिन आपके कदम जरूर चूमेगी।

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