Iran America Ceasefire

Iran America Ceasefire: 40 दिन की भीषण जंग के बाद थमी मिसाइलें; ट्रंप ने किया 2 हफ्ते के युद्धविराम का ऐलान

वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में पिछले 40 दिनों से जारी बारूद की बारिश आखिरकार थम गई है। Iran America Ceasefire की खबर ने पूरी दुनिया को बड़ी राहत दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि अमेरिका और ईरान के बीच 14 दिनों (2 हफ्ते) के युद्धविराम पर सहमति बन गई है।इस ऐतिहासिक मोड़ के पीछे चीन की कूटनीति को सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है।

Iran America Ceasefire: कैसे मुमकिन हुआ यह समझौता?

लगातार 40 दिनों तक चले खूनी संघर्ष के बाद, जिसमें मिसाइलें, ड्रोन और एयरस्ट्राइक आम बात हो गई थी, Iran America Ceasefire का लागू होना किसी चमत्कार से कम नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, चीन के अंतिम समय में हस्तक्षेप ने इस डील को अंतिम रूप देने में मदद की। इस समझौते के तहत न केवल अमेरिका और ईरान, बल्कि इजराइल और लेबनान में सक्रिय हिजबुल्लाह भी अपनी सैन्य कार्रवाइयों को रोकेंगे।

ट्रम्प ने ट्रूथ प्लेटफॉर्म पर अपना बयान पोस्ट किया।

ट्रम्प ने ट्रूथ प्लेटफॉर्म पर अपना बयान पोस्ट किया।


ट्रंप की चेतावनी

सीजफायर से ठीक पहले डोनाल्ड ट्रंप का रुख काफी कड़ा था। उन्होंने ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही बाधित हुई, तो अमेरिका ईरान के अहम बुनियादी ढांचे को मलबे में तब्दील कर देगा।


ईरान का शांति प्रस्ताव: क्या हैं मुख्य शर्तें?

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने दावा किया है कि यह समझौता उनकी शर्तों पर हुआ है। ईरान ने जो 10 सूत्रीय एजेंडा पेश किया है, उसमें ये बातें शामिल हैं:

  • प्रतिबंध हटाना: ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंधों को तुरंत खत्म करना।
  • सैन्य वापसी: क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हटाना।
  • आर्थिक मुआवजा: जंग में हुए नुकसान की भरपाई के लिए फंड की मांग।
  • होर्मुज पर नियंत्रण: ईरान ने प्रति जहाज 20 लाख डॉलर की फीस का प्रस्ताव भी रखा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और ग्लोबल इकोनॉमी

Iran America Ceasefire का सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल और गैस बाजार पर पड़ेगा। समझौते के अनुसार, ईरानी सेना अब होर्मुज से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को सुरक्षा प्रदान करेगी। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जीवनदान जैसा है, क्योंकि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा ऊर्जा के लिए इसी समुद्री रास्ते पर निर्भर है।


अयातुल्ला खामेनेई की 40वीं और तेहरान में जश्न

सहयोगवश, इस सीजफायर का ऐलान उसी दिन हुआ जब ईरान अपने पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का 40वां दिन (चेहल्लुम) मना रहा है। 28 फरवरी को अमेरिकी हमले में उनकी मौत के बाद से ही यह जंग शुरू हुई थी। आज तेहरान की सड़कों पर दो तरह का माहौल है—एक तरफ गमगीन समर्थक उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ Iran America Ceasefire की खुशी में लोग सड़कों पर झंडे लहरा रहे हैं।


क्या यह स्थायी शांति की शुरुआत है?

भले ही अमेरिका ने अपने ‘ऑफेंसिव ऑपरेशंस’ रोक दिए हैं, लेकिन व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि डिफेंसिव मोड अभी भी एक्टिव है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने भी इसे एक ‘अस्थायी कदम’ बताया है।

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