Vehicle Transfer अब होगा आसान: दूसरे राज्य के लिए NOC की टेंशन खत्म, फिटनेस टेस्ट पास करने पर 15 साल बाद भी दौड़ेंगी पुरानी गाड़ियाँ

Rules 2026: अब बिना NOC के होगा वाहन ट्रांसफर, 15 साल पुराना नियम बदला।

नई दिल्ली: अपनी पुरानी गाड़ी को एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाने ( Vehicle Transfer) की सोच रहे लोगों के लिए केंद्र सरकार की ओर से बड़ी खुशखबरी आ रही है। नीति आयोग की एक हाई-लेवल कमेटी ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भेजा है, जिसमें सालों से चली आ रही ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) की अनिवार्यता को खत्म करने का सुझाव दिया गया है।

इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को होगा जो नौकरी के सिलसिले में एक शहर से दूसरे शहर शिफ्ट होते हैं या पुरानी गाड़ी (Second-hand car) खरीदते-बेचते हैं।

📑 क्या है नया प्रस्ताव? (NOC मुक्त Vehicle Transfer)

अभी तक मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के तहत, यदि आप अपनी गाड़ी को एक साल से अधिक समय के लिए दूसरे राज्य में रखते हैं, तो आपको पुराने RTO से NOC लाकर नए राज्य में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होता है। इस प्रक्रिया में हफ्तों का समय और दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

ऑटो-जेनरेटेड सिस्टम का जादू: कमेटी ने सुझाव दिया है कि अब NOC की जगह एक ‘ऑटो-जेनरेटेड क्लीयरेंस सिस्टम’ शुरू किया जाए। चूंकि अब सभी वाहनों का डेटा ‘वाहन’ (VAHAN) पोर्टल पर डिजिटल रूप में मौजूद है, इसलिए एक राज्य का RTO दूसरे राज्य की गाड़ी का रिकॉर्ड खुद ही ऑनलाइन चेक कर सकेगा। टैक्स बकाया, पेंडिंग चालान या किसी भी आपराधिक मामले की जांच ऑटोमैटिक तरीके से हो जाएगी।


🛠️ फिटनेस तय करेगी गाड़ी की उम्र, साल नहीं

Vehicle Transfer के नियमों के साथ-साथ सरकार स्क्रैपेज पॉलिसी (Scrappage Policy) में भी बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है।

  • उम्र आधारित पाबंदी खत्म: वर्तमान में 10 या 15 साल पुरानी गाड़ियों को कबाड़ (Scrap) घोषित कर दिया जाता है, भले ही उनकी स्थिति अच्छी हो।
  • फिटनेस टेस्ट अनिवार्य: नए प्रस्ताव के अनुसार, अब गाड़ी कितनी पुरानी है, इससे फर्क नहीं पड़ेगा। यदि आपकी 15 साल पुरानी कार सख्त ‘फिटनेस टेस्ट’ पास कर लेती है, तो आप उसे आगे भी सड़क पर चला सकेंगे। यह अंतरराष्ट्रीय मानकों (International Practices) के अनुरूप होगा और कमर्शियल वाहन मालिकों को बड़ी राहत देगा।

📈 इन बदलावों से होने वाले 3 मुख्य लाभ:

  1. समय की बचत: RTO के चक्कर काटने और NOC का इंतजार करने का समय बचेगा।
  2. भ्रष्टाचार पर लगाम: पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑटोमैटिक होने से बिचौलियों का खेल खत्म होगा।
  3. सेकेंड हैंड मार्केट को बूस्ट: सुरक्षित और फिट पुरानी गाड़ियों की रीसेल वैल्यू बढ़ेगी, जिससे Vehicle Transfer आसान होने पर सेकेंड हैंड गाड़ियों का बाजार तेजी पकड़ेगा।

📋 एक्सपर्ट कमेंट्री: क्या कहते हैं जानकार?

परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि ‘डिजिटल इंडिया’ के दौर में NOC जैसी कागजी कार्यवाही की जरूरत नहीं है। ‘वाहन’ (VAHAN) डेटाबेस इतना सक्षम है कि वह पल भर में गाड़ी का पूरा इतिहास बता सकता है। फिटनेस आधारित रजिस्ट्रेशन से उन लोगों को फायदा होगा जो अपनी गाड़ियों का अच्छे से रखरखाव करते हैं।

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