पश्चिम एशिया (West Asia) में लंबे समय से जारी भारी युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक शांति के लिहाज से एक ऐतिहासिक और बेहद बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका ईरान शांति समझौता के मसौदे (Draft MoU) पर आधिकारिक तौर पर अपने हस्ताक्षर कर दिए हैं।
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार शाम को फ्रांस के प्रसिद्ध वर्साय पैलेस (Versailles Palace) में आयोजित एक विशेष रात्रिभोज के दौरान इस समझौते को अपनी मंजूरी दी। sachksameynews.in की इस विशेष कूटनीतिक रिपोर्ट में विस्तार से जानिए आखिर इस 14 सूत्रीय समझौते में कौन-कौन सी बड़ी शर्तें शामिल हैं और इसका दुनिया पर क्या असर होगा।
टेबल ऑफ कंटेंट (Table of Content)
- लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्धविराम और संप्रभुता का सम्मान
- होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना
- आर्थिक प्रतिबंधों से राहत और $300 अरब का फंड
- ईरान का परमाणु कार्यक्रम और IAEA की कड़ी निगरानी
- फंड की वापसी और 60 दिनों का कड़ा टाइमफ्रेम
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का बाध्यकारी प्रस्ताव
लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्धविराम और संप्रभुता का सम्मान

फ्रांस में ट्रम्प के पीस डील पर साइन करने के बाद ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने इस पर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से दस्तखत किए।
इस ऐतिहासिक अमेरिका ईरान शांति समझौता के तहत दोनों महाशक्तियों और इस युद्ध में शामिल उनके सभी सहयोगी देशों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने की घोषणा की है।
- सैन्य कार्रवाई पर रोक: दोनों देश अब एक-दूसरे के खिलाफ किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई या युद्ध की शुरुआत नहीं करेंगे। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बल प्रयोग या उसकी धमकी देने से पूरी तरह परहेज करेंगे।
- आंतरिक मामलों में दखल नहीं: अमेरिका और ईरान दोनों एक-दूसरे की संप्रभुता (Sovereignty) और क्षेत्रीय अखंडता का पूर्ण सम्मान करेंगे। दोनों देश किसी भी स्थिति में एक-दूसरे के आंतरिक राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना
वैश्विक व्यापार और कच्चे तेल की आपूर्ति (Global Oil Supply) के लिहाज से यह इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग: ईरान इस एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर के बाद अधिकतम 60 दिनों के भीतर फारस की खाड़ी और ओमान सागर के बीच से गुजरने वाले तमाम वाणिज्यिक जहाजों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कानूनी व तकनीकी व्यवस्था करेगा।
इसके साथ ही, अगले 30 दिनों के भीतर समुद्री मार्ग में बिछाई गई बारूदी सुरंगों और अन्य सैन्य बाधाओं को हटाकर सामान्य वाणिज्यिक यातायात को पूरी तरह बहाल किया जाएगा। ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रशासन को लेकर ओमान और फारस की खाड़ी के अन्य तटीय देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में रहकर बातचीत आगे बढ़ाएगा।
आर्थिक प्रतिबंधों से राहत और $300 अरब का फंड
समझौते के लागू होते ही अमेरिका, ईरान के खिलाफ अपनी नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) और आर्थिक बाधाओं को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर देगा, जिसे 30 दिनों के भीतर पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा।
- पुनर्निर्माण के लिए बड़ा पैकेज: अमेरिका अपने क्षेत्रीय आर्थिक साझेदारों के साथ मिलकर ईरान के आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर ($300 Billion) की एक विशाल योजना तैयार करेगा।
- प्रतिबंधों की पूर्ण समाप्ति: अंतिम समझौते के तहत अमेरिका, ईरान पर लगाए गए सभी प्रकार के एकतरफा और बहुपक्षीय आर्थिक प्रतिबंधों को पूरी तरह समाप्त करने का वचन देगा। इसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और आईएईए (IAEA) के प्रस्तावों के तहत लगे प्रतिबंध भी शामिल हैं।
ईरान का परमाणु कार्यक्रम और IAEA की कड़ी निगरानी
इस अमेरिका ईरान शांति समझौता के अंतर्गत ईरान ने वैश्विक मंच पर एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि वह भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) हासिल या विकसित करने का प्रयास नहीं करेगा।
ईरान के पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की प्रत्यक्ष देखरेख में वहीं पर नष्ट किया जाएगा। जब तक अंतिम और पूर्ण समझौता धरातल पर लागू नहीं हो जाता, तब तक ईरान अपने किसी भी परमाणु कार्यक्रम को आगे नहीं बढ़ाएगा और वर्तमान स्थिति (Status Quo) को बनाए रखेगा।
फंड की वापसी और 60 दिनों का कड़ा टाइमफ्रेम
इस पूरे शांति समझौते को एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है:
| मुख्य बिंदु | निर्धारित समय सीमा |
| अंतिम वार्ता की अवधि | दोनों देश अधिकतम 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते की बातचीत पूरी करेंगे। |
| सैन्य वापसी | अंतिम समझौते के 30 दिनों के भीतर अमेरिका ईरान के निकटवर्ती क्षेत्रों से अपनी सैन्य मौजूदगी हटाएगा। |
| कच्चे तेल का निर्यात | अमेरिकी वित्त मंत्रालय ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों, बैंकिंग और बीमा सेवाओं के लिए तुरंत आवश्यक छूट जारी करेगा। |
इसके अलावा, अमेरिकी बैंकों या अन्य संस्थाओं द्वारा फ्रीज या जब्त की गई ईरान की तमाम वित्तीय संपत्तियों को वापस लौटाया जाएगा, जिससे ईरान का केंद्रीय बैंक अपनी जरूरत के अनुसार भुगतान कर सकेगा।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का बाध्यकारी प्रस्ताव
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इस समझौते की पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों राष्ट्रपतियों के हस्ताक्षर के साथ ही इसे अंतिम रूप दे दिया गया है, और अब असली परीक्षा इसके जमीन पर क्रियान्वयन (Implementation) की है। स्विट्जरलैंड के जिनेवा में प्रस्तावित दोनों देशों की आगामी बैठक भी अपने तय कार्यक्रम के अनुसार ही आयोजित की जाएगी।
इस पूरे शांति समझौते के सफल क्रियान्वयन और भविष्य में किसी भी प्रकार के उल्लंघन को रोकने के लिए एक विशेष कार्यकारी तंत्र (Executive Mechanism) स्थापित किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस अंतिम समझौते को कानूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक बाध्यकारी प्रस्ताव के माध्यम से वैश्विक समर्थन दिया जाएगा।
पश्चिम एशिया और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से जुड़ी ऐसी ही तमाम विश्वसनीय और लाइव खबरों के लिए हमारी वेबसाइट sachksameynews.in को नियमित रूप से फॉलो करें। इस शांति समझौते की अधिक कूटनीतिक पृष्ठभूमि को समझने के लिए आप United Nations Security Council की आधिकारिक वेबसाइट पर भी विजिट कर सकते हैं।


