सुप्रीम कोर्ट पैलेट गन आदेश: क्या है पूरा मामला?

सुप्रीम कोर्ट पैलेट गन आदेश

सुप्रीम कोर्ट पैलेट गन आदेश को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि संसद मार्च के दौरान पैलेट गन से घायल हुए प्रदर्शनकारियों का उचित इलाज सुनिश्चित किया जाए। साथ ही केंद्र सरकार को आदेश दिया गया कि जंतर-मंतर पर तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा इस्तेमाल किए गए हथियारों और गोला-बारूद का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए।

यह मामला केवल घायल प्रदर्शनकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि भीड़ नियंत्रण में पैलेट गन के इस्तेमाल, पुलिस की जवाबदेही और मानवाधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल भी उठाता है।

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सुप्रीम कोर्ट के 7 बड़े निर्देश

1. घायलों के इलाज का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि पैलेट गन से घायल सभी प्रदर्शनकारियों का उचित चिकित्सा उपचार कराया जाए।

2. हथियारों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश

केंद्र सरकार से कहा गया कि जंतर-मंतर पर तैनात RAF द्वारा इस्तेमाल किए गए सभी हथियारों और गोला-बारूद का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए।

3. पैलेट गन पर तत्काल रोक नहीं

कोर्ट ने फिलहाल पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

4. विशेष परिस्थितियों में इस्तेमाल संभव

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस विशेष परिस्थितियों में पैलेट गन का उपयोग कर सकती है।

5. केंद्र से मांगा जवाब

कोर्ट ने पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़ी गाइडलाइन और SOP पर केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।

6. नियमों को चुनौती जरूरी

कोर्ट ने कहा कि जब तक पैलेट गन के उपयोग की अनुमति देने वाले नियमों को चुनौती नहीं दी जाती, तब तक इस पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं होगा।

7. अगली सुनवाई में होगी विस्तृत चर्चा

अब इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाएगी।

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मामला कैसे शुरू हुआ?

20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला था। प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई।

आरोप लगाया गया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और भीड़ नियंत्रण के लिए बल प्रयोग किया। इसी दौरान पैलेट गन इस्तेमाल होने के आरोप भी सामने आए।


संसद मार्च में क्या हुआ था?

प्रदर्शन सुबह से शाम तक जारी रहा।

घटनाक्रम के दौरान—

  • कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों की झड़प हुई।
  • बैरिकेड तोड़े गए।
  • संसद की ओर मार्च करने की कोशिश हुई।
  • आंसू गैस के गोले छोड़े गए।
  • पत्थरबाजी की घटनाएं भी सामने आईं।
  • 100 से अधिक लोगों के घायल होने का दावा किया गया।

पैलेट गन पर सुप्रीम कोर्ट का रुख

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सुप्रीम कोर्ट पैलेट गन आदेश में अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल पैलेट गन पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है।

कोर्ट का कहना है कि यदि हालात बेहद गंभीर हों और अन्य विकल्प कारगर न हों, तो कानून के तहत निर्धारित परिस्थितियों में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

हालांकि अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि नियमों को कानूनी चुनौती दी जाती है, तो इस विषय पर व्यापक सुनवाई संभव है।


याचिका में क्या मांग की गई थी?

पूर्व आईपीएस अधिकारी और दो घायल प्रदर्शनकारियों ने याचिका दाखिल कर मांग की थी कि—

  • पैलेट गन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
  • संसद मार्च में इसके इस्तेमाल की जांच हो।
  • घायल लोगों को मुआवजा और बेहतर इलाज मिले।

राहुल गांधी का आरोप

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विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि संसद मार्च के दौरान पैलेट गन चलने से एक छात्र की आंख की रोशनी चली गई।

उन्होंने घायल छात्र से मुलाकात कर उसके शरीर पर चोटों के निशान भी दिखाए और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।


सरकार और भाजपा का पक्ष

सरकार और भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संसद मार्च के दौरान किसी प्रकार की गोलीबारी नहीं हुई।

सरकार का कहना है कि भीड़ नियंत्रण की कार्रवाई कानून के अनुसार की गई तथा किसी मंत्री द्वारा फायरिंग का आदेश नहीं दिया जा सकता।


भारत में पैलेट गन को लेकर क्या नियम हैं?

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भारत में पैलेट गन पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है।

गृह मंत्रालय की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के अनुसार—

  • इसे कम घातक (Less Lethal) हथियार माना जाता है।
  • केवल हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • न्यूनतम बल प्रयोग के सिद्धांत का पालन जरूरी है।
  • सुरक्षा बलों को इसके लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • आम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की सुरक्षा प्राथमिकता होती है।

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आगे क्या हो सकता है?

आने वाले दिनों में केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगी। यदि अदालत को लगे कि मौजूदा दिशा-निर्देश पर्याप्त नहीं हैं, तो भविष्य में नई गाइडलाइन या अतिरिक्त सुरक्षा उपायों पर विचार किया जा सकता है।


निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट पैलेट गन आदेश केवल एक न्यायिक निर्देश नहीं बल्कि भीड़ नियंत्रण, मानवाधिकार और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अदालत ने एक ओर घायलों के इलाज को प्राथमिकता दी है तो दूसरी ओर सुरक्षा एजेंसियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया है।

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FAQs

क्या सुप्रीम कोर्ट ने पैलेट गन पर प्रतिबंध लगा दिया है?

नहीं, फिलहाल अदालत ने प्रतिबंध लगाने से इनकार किया है।

दिल्ली सरकार को क्या निर्देश मिला?

घायल प्रदर्शनकारियों का इलाज सुनिश्चित करने का।

केंद्र सरकार को क्या आदेश दिया गया?

RAF द्वारा इस्तेमाल किए गए हथियारों और गोला-बारूद का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का।

पैलेट गन का इस्तेमाल कब किया जा सकता है?

केवल विशेष परिस्थितियों में और निर्धारित SOP के तहत।

इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?

अगली तारीख पर केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा जाएगा।

Abhishek Ranga is the founder and editor-in-chief of Sach Ka Samay News. With a commitment to journalistic integrity, he focuses on delivering accurate, unbiased, and real-time news to the public. He oversees the digital strategy and content management for the portal, ensuring that every story meets the highest standards of reporting