पीएम मोदी की अपील और सुरजेवाला के आरोप; जानें सरकार क्यों तिजोरियों में भर रही है सोना और जनता को क्यों कर रही मना

RBI Gold Reserve History PM Modi Appeal

(आरबीआई गोल्ड रिजर्व इतिहास और पीएम मोदी की अपील): मई 2026 के इस हफ्ते में देश के भीतर सोने (Gold) की राजनीति और अर्थशास्त्र को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को देश की जनता से अपील करते हुए कहा कि हमें यह तय करना होगा कि सालभर तक घर में कोई भी कार्यक्रम हो, हम सोने के गहने नहीं खरीदेंगे।

इस अपील के बाद, 15 मई को कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि एक तरफ पीएम मोदी जनता को मंगलसूत्र और जेवर न खरीदने की सलाह दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार खुद पिछले कुछ महीनों में ताबड़तोड़ सोना खरीद रही है।

(sachkasameynews.in) के इस विशेष एक्सप्लेनर में हम समझेंगे कि आखिर सरकार के इस कदम और पीएम मोदी की अपील के पीछे की असली आर्थिक कहानी क्या है।

1. आरबीआई का ऑल-टाइम हाई गोल्ड रिजर्व: सुरजेवाला के दावे का सच

रणदीप सिंह सुरजेवाला के दावों में पूरी सच्चाई नहीं है, लेकिन यह सच है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपने सोने के भंडार में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की है।

  • ऑल-टाइम हाई रिजर्व: आरबीआई के पास वर्तमान में 880.5 टन गोल्ड रिजर्व है, जो कि अब तक का सबसे उच्च स्तर (All-Time High) है। इस भंडार के साथ भारत दुनिया में गोल्ड रिजर्व के मामले में 5वें नंबर पर पहुंच गया है।
  • 10 साल में 57% की बढ़त: पिछले 10 वर्षों में आरबीआई का स्वर्ण भंडार 560 टन से बढ़कर 880.5 टन हो गया है। अकेले 2021 से 2025 के बीच भारत ने 185 टन सोना खरीदा है।
  • फॉरेन रिजर्व में हिस्सेदारी: भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserve) में अब सोने की हिस्सेदारी बढ़कर 16.7% हो गई है।

भारतीय रिजर्व बैंक के आधिकारिक और अद्यतन आंकड़ों के लिए आप Reserve Bank of India (RBI) की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।

2. सोने की ‘घरवापसी’: विदेशी बैंकों से भारत क्यों आ रहा है सोना?

RBI Gold Reserve History PM Modi Appeal के बीच सबसे क्रांतिकारी बदलाव यह आया है कि भारत अब अपने सोने को विदेशी तिजोरियों (जैसे बैंक ऑफ इंग्लैंड) में रखने के बजाय देश के भीतर ला रहा है।

  • देश में 77% सोना: साल 2023 तक भारत के कुल सोने का केवल 38% हिस्सा देश के भीतर था, लेकिन आज 77% सोना (680.05 टन) भारत की अपनी तिजोरियों में सुरक्षित रखा जा चुका है।
  • विदेशी तिजोरियों में कमी: अब केवल 197.67 टन सोना ही विदेशी बैंकों में पड़ा है, जबकि 2.8 टन सोना गोल्ड डिपॉजिट (ब्याज कमाने के लिए) के रूप में निवेशित है।
RBI Gold Reserve History PM Modi Appeal Explained with Gold Bars

3. पूरी दुनिया में डॉलर के प्रति घटा भरोसा: रूस-यूक्रेन युद्ध का वो एक फैसला

आखिर भारत समेत दुनिया भर के केंद्रीय बैंक (जैसे चीन, ब्राजील, तुर्किये) अचानक इतना सोना क्यों खरीद रहे हैं? इसके पीछे अमेरिका का एक भयावह फैसला है।

  1. करेंसी को बनाया हथियार: 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस के 300 बिलियन डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार (ट्रेजरी बिल) को फ्रीज कर दिया था।
  2. पूरी दुनिया में डर: अमेरिका के इस कदम से दुनिया भर के देश सहम गए। उन्हें समझ आ गया कि अमेरिका कभी भी अपनी करेंसी (डॉलर) को हथियार बनाकर किसी भी देश को कंगाली की कगार पर ला सकता है।
  3. डॉलर की हिस्सेदारी घटी: साल 2016 में वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर की हिस्सेदारी 65% थी, जो अब घटकर मात्र 57% रह गई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, दुनिया के 76% केंद्रीय बैंक अगले 5 वर्षों में डॉलर पर निर्भरता घटाकर सोना खरीदना चाहते हैं।

वैश्विक स्वर्ण बाजारों और प्रवृत्तियों के विश्लेषण के लिए World Gold Council एक अतुल्य और प्रामाणिक स्रोत है।

4. सरकार खुद खरीद रही, तो जनता को क्यों कर रही है मना?

यही वह मुख्य सवाल है जो विपक्ष उठा रहा है, लेकिन इसके पीछे का अर्थशास्त्र भारत के आयात बिल (Import Bill) से जुड़ा है।

  • 99% सोना विदेशों से आता है: भारत अपनी जरूरत का लगभग 99% सोना दूसरे देशों से आयात करता है। इसके लिए भारत को भारी मात्रा में अमेरिकी डॉलर का भुगतान करना पड़ता है।
  • दूसरा सबसे बड़ा आयात: भारत के कुल आयात बिल में अकेले सोने की हिस्सेदारी 9% है (पहले नंबर पर कच्चा तेल है)। पिछले कारोबारी साल में भारत ने 6.4 लाख करोड़ रुपए का सोना खरीदा।
  • आसमान छूती कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 76 हजार डॉलर प्रति किलो से बढ़कर 1.52 लाख डॉलर प्रति किलो तक पहुंच गई है। भारत के घरेलू बाजार में भी सोना करीब 1.60 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है।

Crucial Fact: यदि देश की जनता भारी मात्रा में सोना खरीदेगी, तो भारत को विदेशों को भुगतान करने के लिए अपने विदेशी मुद्रा भंडार से अरबों डॉलर निकालने पड़ेंगे। इससे डॉलर की कमी होगी, भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ेगा और भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तेजी से कमजोर हो जाएगा।

देशस्वर्ण भंडार (टन में अनुमानित)वैश्विक स्थिति
चीन (China)2313.46 टनलगातार 18 महीने से खरीद जारी
भारत (India)880.5 टनवैश्विक रैंकिंग में 5वां स्थान
आरबीआई का घरेलू स्टॉक680.05 टनकुल रिजर्व का 77% भारत में सुरक्षित

देश की अर्थव्यवस्था और रुपए को मज़बूती देने का मास्टरप्लान

(आरबीआई गोल्ड रिजर्व इतिहास और पीएम मोदी की अपील) की पूरी इनसाइड स्टोरी यह साफ करती है कि सरकार का यह कदम विरोधाभासी नहीं बल्कि बेहद शक्तिशाली रणनीतिक योजना का हिस्सा है। सरकार चाहती है कि देश का कीमती विदेशी मुद्रा भंडार (डॉलर) जनता के आभूषण खरीदने में बर्बाद न हो, बल्कि वह रिजर्व बैंक के पास सोने के रूप में सुरक्षित रहे। ऐसा होने से वैश्विक आर्थिक मंदी या युद्ध जैसी आपातकालीन स्थितियों में भारत की अर्थव्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनी रहेगी।

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Abhishek Ranga is the founder and editor-in-chief of Sach Ka Samay News. With a commitment to journalistic integrity, he focuses on delivering accurate, unbiased, and real-time news to the public. He oversees the digital strategy and content management for the portal, ensuring that every story meets the highest standards of reporting