Delhi PG Collapse: 6 Dead in ‘Shocking’ Satya Niketan Disaster

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Delhi PG Collapse: सत्य निकेतन में इमारत ढहने से 6 लोगों की दर्दनाक मौत। ‘Official’ जांच और रेस्क्यू अपडेट्स के लिए तुरंत पढ़ें। पूरी खबर देखें!

विषय सूची (Table of Contents)

  1. Delhi PG Collapse: सत्य निकेतन में ढही 5 मंजिला इमारत
  2. हादसे की मुख्य वजह: बेसमेंट में अवैध निर्माण और लापरवाही
  3. Delhi PG Collapse: रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासनिक कार्रवाई
  4. छात्र संगठनों का विरोध और सुरक्षा पर उठे सवाल
  5. दिल्ली में जर्जर इमारतों का बढ़ता खतरा

Delhi PG Collapse: सत्य निकेतन में ढही 5 मंजिला इमारत

Delhi PG Collapse की घटना ने पूरी राजधानी को झकझोर कर रख दिया है। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन इलाके में एक 5 मंजिला इमारत अचानक ढह गई, जिसमें अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। हादसे के वक्त इमारत और बेसमेंट में कई मजदूर और छात्र मौजूद थे, जो देखते ही देखते मलबे के नीचे दब गए।

हादसे की सूचना मिलते ही दमकल विभाग, एनडीआरएफ (NDRF) और स्थानीय पुलिस की टीमों ने मौके पर पहुँचकर राहत कार्य शुरू किया। मलबे से 12 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जबकि 5 गंभीर रूप से घायलों का इलाज एम्स (AIIMS) के ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है। यह इलाका छात्रों का मुख्य गढ़ माना जाता है, जिससे इस हादसे के बाद परिजनों में भारी दहशत का माहौल है।

हादसे की मुख्य वजह: बेसमेंट में अवैध निर्माण और लापरवाही

सत्य निकेतन में हुआ यह हादसा किसी प्राकृतिक आपदा का परिणाम नहीं, बल्कि मानवीय लापरवाही का नतीजा माना जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 40 साल पुरानी इस इमारत के बेसमेंट में पिछले सात दिनों से अवैध रूप से तोड़फोड़ और खुदाई का काम चल रहा था।

बेसमेंट की नींव पहले से ही कमजोर थी और उसमें पानी भरा हुआ था। खुदाई के दौरान एक मुख्य पिलर खिसक गया, जिसके कारण पूरी 5 मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। दिल्ली नगर निगम (MCD) के रिकॉर्ड में इस पुरानी इमारत को पहले खतरनाक घोषित नहीं किया गया था, जो सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही को उजागर करता है।

Delhi PG Collapse rescue operations at Satya Niketan building site

हादसे के बाद पूरी बिल्डिंग मलबे में बदल गई।

Delhi PG Collapse rescue operations at Satya Niketan building site

स्थानीय लोग और प्रशासन रेस्क्यू में जुटे। शुरुआत में हाथ से ही मलबा हटाया गया, थोड़ी देर में मशीनें आईं।

Delhi PG Collapse: रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासनिक कार्रवाई

SNIFER DOG HELP TO RESCUE PEOPLE

NDRF की टीम स्निफर डॉग की मदद से मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रही है।

Delhi PG Collapse के बाद प्रशासन ने त्वरित कदम उठाते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी किए हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले की मजिस्ट्रेट जांच के निर्देश दिए हैं, वहीं मेयर प्रवेश वाही ने 4 मंजिल से अधिक वाले अवैध निर्माणों को तुरंत सील करने के आदेश दिए हैं।

  • लुकआउट सर्कुलर जारी: पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम बंसल के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या और लापरवाही की धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया है।
  • तकनीकी रेस्क्यू: मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए स्निफर डॉग्स, सेंसिटिव कैमरे और ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
  • पड़ोसी इमारतों को सुरक्षा: ढही इमारत के बगल वाली बिल्डिंग में दरारें आने के बाद उसे लोहे के जैक और पिलर लगाकर अस्थायी सपोर्ट दिया गया है ताकि कोई दूसरा हादसा न हो।

छात्र संगठनों का विरोध और सुरक्षा पर उठे सवाल

इस दर्दनाक दुर्घटना के बाद छात्र राजनीति भी गरमा गई है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के सदस्यों ने सिविक सेंटर स्थित नगर निगम मुख्यालय के बाहर देर रात ‘Official’ प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

राष्ट्रीय भारतीय छात्र संगठन (NSUI) ने भी रेस्क्यू ऑपरेशन की गति पर सवाल उठाते हुए इसे प्रशासनिक विफलता करार दिया है। छात्र संगठनों ने मांग की है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के आसपास संचालित सभी निजी पीजी (PG) का सेफ्टी ऑडिट कराया जाए और जर्जर इमारतों को गिराकर छात्रों के लिए सुरक्षित सरकारी हॉस्टल का निर्माण किया जाए।

दिल्ली में जर्जर इमारतों का बढ़ता खतरा

Delhi PG Collapse जैसी घटनाएं दिल्ली के बुनियादी ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 3 वर्षों में राजधानी के भीतर इमारत ढहने की 1,133 से अधिक घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें 98 लोगों ने अपनी जान गंवाई है।

सत्य निकेतन जैसे संकरे और घनी आबादी वाले इलाकों में बिना नक्शा पास कराए बहुमंजिला इमारतों का निर्माण धड़ल्ले से जारी है। एमसीडी ने हादसे के बाद आसपास की जर्जर इमारतों पर नोटिस चिपकाकर उन्हें खाली करने का आदेश दिया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सख्त निर्माण नियमों का पालन नहीं होगा, तब तक ऐसे खतरों को टालना मुश्किल है।

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