अयोध्या में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर के गर्भगृह और दर्शन पथ पर बने दानपात्रों से चढ़ावे की चोरी की खबरों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। शुरुआती अनुमानों और मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो यह राम मंदिर घोटाला 200 करोड़ रुपए से अधिक का हो सकता है। इस मामले के सामने आने के बाद से ही उत्तर प्रदेश शासन से लेकर केंद्र सरकार तक एक्शन मोड में आ गई है।
इस कथित घोटाले की गूंज अब अयोध्या की गलियों से निकलकर देश के बड़े राजनेताओं और संसद तक पहुंच चुकी है। sachksameynews.in की इस खोजी रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि आखिर कैसे नोटों की गिनती करने वाले साधारण कर्मचारी महज 5 साल में करोड़पति बन गए और इस पूरे मामले का सच क्या है।
कथित राम मंदिर घोटाला क्या है और यह कैसे सामने आया?
अयोध्या के राम मंदिर में हर रोज करीब 1 से 1.5 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इन श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले करोड़ों रुपए के कैश और सोने-चांदी के आभूषणों के प्रबंधन में एक बड़ी चूक सामने आई है। इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब मंदिर परिसर में काम करने वाले कुछ चुनिंदा कर्मचारियों की जीवनशैली (Lifestyle) अचानक से बहुत ज्यादा बदल गई।
जो कर्मचारी महज 14,500 रुपए के मासिक वेतन पर काम कर रहे थे, वे अचानक महंगी गाड़ियों, जमीनों और आलीशान मकानों के मालिक बन बैठे। जब स्थानीय स्तर पर इस बात की सुगबुगाहट तेज हुई, तो रामकोट मोहल्ले के ही एक सजग कर्मचारी ने इस गड़बड़ी की चर्चा को सार्वजनिक कर दिया। देखते ही देखते यह मामला राजनीतिक गलियारों में पहुंचा और अब इसे देश का सबसे चर्चित राम मंदिर घोटाला कहा जा रहा है। जांच एजेंसियों ने अब तक शुरुआती कार्रवाई में करीब 2 करोड़ रुपए कैश, महंगी कारें और आईफोन बरामद किए हैं।
गोपनीय कक्ष का सुरक्षा तंत्र और संदेह के घेरे में आए 50 कर्मचारी
रामलला के दरबार में लगे 14 अलग-अलग दानपात्रों से जो भी धन राशि निकलती है, उसे परिसर के भीतर ही बने एक बेहद ‘गोपनीय कक्ष’ में ले जाया जाता है। इस कमरे की सुरक्षा इतनी कड़ी होती है कि बाहरी व्यक्ति का वहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता।
नोटों की गिनती के लिए इस कमरे में कुल 50 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी, जिन्हें तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया था ताकि पारदर्शिता बनी रहे:
- 24 निजी कर्मचारी: इन्हें एक प्राइवेट एजेंसी के जरिए ट्रस्ट ने नोटों के बंडल बनाने के काम पर रखा था। इनका वेतन करीब 14,500 रुपए प्रति माह था।
- 12 ट्रस्ट के कर्मचारी: इनका मुख्य काम इन 24 कर्मचारियों की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखना था।
- 14 बैंकिंग व ऑडिट एक्सपर्ट: इसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के अधिकारी और टीसीएस (TCS) की ऑडिट टीमें शामिल थीं।
इतने कड़े त्रिकोणीय सुरक्षा घेरे के बावजूद इतनी बड़ी रकम का गायब हो जाना सीधे तौर पर एक बड़े आंतरिक सांठगांठ (Internal Nexus) की ओर इशारा करता है।
करोड़पति बने कर्मचारियों की कुंडली: फॉर्च्यूनर से लेकर 70 कमरों के हॉस्टल तक
इस राम मंदिर घोटाला मामले में सबसे चौंकाने वाली बात उन कर्मचारियों की अचल संपत्ति है, जो पिछले 5 सालों में फर्श से अर्श पर पहुंच गए। पुलिस की रडार पर आए मुख्य संदिग्धों की सूची इस प्रकार है:
1. टिन्नू यादव (चंपत राय के सहयोगी)

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के सहयोगी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव पर सबसे गंभीर आरोप हैं। कभी अयोध्या की सड़कों पर ऑटो चलाने वाले टिन्नू की आज अयोध्या और लखनऊ में करीब 50 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति का अनुमान लगाया गया है। जांच में सामने आया है कि अयोध्या एयरपोर्ट के पास उसका 70 कमरों का एक हॉस्टल है, तीन बड़े रेस्टोरेंट में उसकी हिस्सेदारी है और उसके पास फॉर्च्यूनर जैसी लग्जरी गाड़ियां हैं।
2. मनीष यादव
टिन्नू यादव ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके अपने भतीजे मनीष यादव को भी नोटों की गिनती वाले काम में लगवा दिया था। सूत्रों के मुताबिक, मनीष के पास से अब तक करीब 36 लाख रुपए का कैश बरामद किया जा चुका है और उससे पीसीएफ (PCF) यात्री सुविधा केंद्र में पूछताछ की जा रही है।
3. लवकुश और अनुकल्प मिश्रा
लवकुश पहले एक साधारण कार मैकेनिक था, लेकिन मंदिर में काम मिलने के बाद उसकी किस्मत ऐसी बदली कि वह फैजाबाद में अपना आलीशान मकान बनवा रहा है। जांच टीम को उसके घर में बक्से, अलमारी और यहां तक कि उपलों/गोबर के बीच छिपाकर रखे गए 10 लाख रुपए बरामद हुए हैं। वहीं उसके साले अनुकल्प मिश्रा ने अयोध्या के पॉश इलाके कौशलपुरी में 65 लाख रुपए का घर खरीदा और अपने गांव में एक बड़ा फार्म हाउस भी तैयार करवाया है।
4. केडी तिवारी (सोने-चांदी के प्रभारी)
दान में आने वाले बहुमूल्य आभूषणों को संभालने वाले केडी तिवारी पर 5 करोड़ की संपत्ति जुटाने और डेढ़ करोड़ की जमीन खरीदने के आरोप हैं। हालांकि, उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि उनके बेटे सेना और आईबी (IB) जैसे प्रतिष्ठित विभागों में हैं और यह संपत्ति उनकी मेहनत की है।
SIT और IPS अधिकारी की एंट्री: कैसे हो रही है जांच?
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही बेहद गंभीर हैं। 4 दिन पहले दिल्ली से एक वरिष्ठ IPS अधिकारी को विशेष विमान के जरिए सीधे अयोध्या भेजा गया है, जो सीधे केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप रहे हैं।
इसके साथ ही उत्तर प्रदेश शासन ने इस राम मंदिर घोटाला की तह तक जाने के लिए एक उच्च स्तरीय विशेष जांच समिति (SIT) का गठन किया है। इस 3 सदस्यीय टीम को 15 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी है।
| SIT सदस्य का नाम | वर्तमान पद | जांच में मुख्य भूमिका |
| विजय विश्वास पंत (IAS) | कमिश्नर, लखनऊ (IIT कानपुर पूर्व छात्र) | इस पूरी जांच कमेटी की अध्यक्षता करेंगे और दान प्रबंधन को सुधारने के सुझाव देंगे। |
| किरन एस. (IPS) | आईजी रेंज (CBI में डीआईजी रह चुके हैं) | अपराध के एंगल से चोरों और उनके नेटवर्क का पर्दाफाश करेंगे। |
| नीलरतन | विशेष सचिव, वित्त विभाग | मंदिर के पिछले खातों, ऑडिट रिपोर्ट और वित्तीय लेन-देन का बारीक निरीक्षण करेंगे। |
संत समाज की प्रतिक्रिया और आगे की राह
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अयोध्या के संतों और स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश और चिंता का माहौल है। कुछ वरिष्ठ संतों का मानना था कि इस जांच समिति में किसी रिटायर्ड जज को भी शामिल किया जाना चाहिए था ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो सके। वहीं दूसरी ओर, मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने इस पूरे विवाद से खुद को दूर कर लिया है। उनका कहना है कि वे केवल निर्माण कार्यों के प्रति जवाबदेह हैं और ट्रस्ट के आंतरिक वित्तीय मामलों से उनका कोई सरोकार नहीं है।
प्रभु श्री राम के मंदिर से जुड़ा यह मामला बेहद संवेदनशील है। करोड़ों भक्तों की आस्था के इस केंद्र में पारदर्शिता का होना बेहद जरूरी है। अब देखना यह है कि SIT की 15 दिनों की जांच में क्या नए तथ्य सामने आते हैं।
अयोध्या और देश-दुनिया की तमाम सच्ची और सटीक खबरों के लिए हमारी वेबसाइट sachksameynews.in के साथ जुड़े रहें। इस मामले से जुड़े आधिकारिक अपडेट्स के लिए आप UP Police Official Twitter और Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra की आधिकारिक वेबसाइट्स को भी विजिट कर सकते हैं।



