नई दिल्ली, 22 जुलाई 2026: नीट (NEET) पेपर लीक मामले और 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के इंदिरा भवन में एक 40 मिनट लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
अंकों, चार्ट्स और वीडियो प्रेजेंटेशन के साथ मीडिया के सामने आए राहुल गांधी ने पुलिस कार्रवाई और सरकार के रवैये पर तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि हिरासत में लिए जाने के दौरान जब पुलिसकर्मी उन्हें हटा रहे थे, तो उन्होंने राहुल के कान में कहा—“इस सरकार को हटाइए।”
📽️ प्रेजेंटेशन के जरिए राहुल का हमला: 4 प्रमुख स्लाइड में क्या दिखाया?

राहुल गांधी ने अपनी 5वीं पावरपॉइंट (PPT) प्रेस कॉन्फ्रेंस में 4 अलग-अलग स्लाइड्स के जरिए आंकड़े और वीडियो दिखाए:
- छात्रों पर बर्बरता का वीडियो: 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च की क्लिप्स दिखाते हुए राहुल ने आरोप लगाया कि महिला छात्रों से बदसलूकी की गई और निहत्थे छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ।
- 10 साल में 152 पेपर लीक: राहुल ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि पिछले 10 सालों में देश में 152 से ज्यादा पेपर लीक हुए हैं, जिससे 7.5 करोड़ छात्र और उनके परिवार प्रभावित हुए हैं, लेकिन किसी भी बड़े दोषी को सजा नहीं मिली।
- एजुकेशन बजट बनाम NEET का खर्च: भारत सरकार का वार्षिक शिक्षा बजट लगभग ₹1.4 लाख करोड़ है, जबकि देश के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार नीट परीक्षा व कोचिंग पर सालाना करीब ₹1.32 लाख करोड़ खर्च कर देते हैं।
- विपक्ष की 3 प्रमुख मांगें:
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा।
- छात्रों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद देश के छात्रों से माफी मांगें।
🚨 “मुंह से खून आया, दो-तीन पंच लगे, लेकिन यह देश के लिए छोटी कीमत”
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए राहुल गांधी ने कहा:
“21 जुलाई को जब पुलिस ने हमें हिरासत में लिया, तो धक्का-मुक्की में मुझे चोट लगी और मुंह से खून आया। मुझे दो-तीन पंच भी लगे, लेकिन देश के युवाओं और 7.5 करोड़ छात्रों के भविष्य के आगे यह बहुत छोटी कीमत है। मैं इन सब का आदी हूँ और विपक्ष के नेता के रूप में छात्रों की आवाज उठाना मेरा फर्ज है।”


🤫 सीक्रेट प्लानिंग: खड़गे के जन्मदिन से शुरू हुआ PM आवास मार्च
21 जुलाई को पीएम आवास के घेराव की इनसाइड स्टोरी भी सामने आई है:
- सरप्राइज प्लान: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सुबह पुलिस कार्रवाई के विरोध में जन्मदिन न मनाने का फैसला किया।
- सीक्रेट मीटिंग: दोपहर में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी बधाई देने के बहाने खड़गे के आवास पहुँचे।
- अचानक मार्च: खड़गे के आवास से पीएम आवास की दूरी महज 1 किलोमीटर थी। जैसे ही बैठक खत्म हुई, सभी नेता गाड़ियों में बैठने के बजाय अचानक पैदल ही मार्च करते हुए सड़कों पर निकल पड़े, जिससे दिल्ली पुलिस को बैरिकेडिंग करने का मौका तक नहीं मिला।
📜 29 साल पुराना इतिहास: जब धर्मेंद्र प्रधान ने भी खाई थीं लाठियां
दिलचस्प बात यह है कि जिस शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर पूरा विपक्ष अड़ा हुआ है, वे खुद 29 साल पहले पेपर लीक के खिलाफ लाठियां खा चुके हैं।
- 1997 का वाकया: वर्ष 1997 में ओडिशा में हुए एक पेपर लीक के खिलाफ छात्र नेता के रूप में धर्मेंद्र प्रधान ने 1,500 छात्रों के साथ प्रदर्शन किया था।
- तब्कालीन पुलिस लाठीचार्ज में धर्मेंद्र प्रधान को भी गंभीर चोटें आई थीं और चेहरे पर फ्रैक्चर हुआ था। आज 29 साल बाद वे खुद उसी मुद्दे पर कठघरे में खड़े हैं।
⚖️ निष्कर्ष: बैकफुट पर सरकार, गहराता राजनीतिक संकट
जंतर-मंतर से लेकर संसद के सत्र और पीएम आवास तक फैला यह नीट विवाद अब केवल छात्रों का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि मोदी सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक संकट बन चुका है। राहुल गांधी का प्रेजेंटेशन मॉडल और आक्रामक तेवर यह दर्शाते हैं कि विपक्ष अब इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
🗣️ आपकी क्या राय है?
क्या शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए? या फिर इस मुद्दे का समाधान केवल प्रशासनिक सुधारों से संभव है? कमेंट करके जरूर बताएं!
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