राहुल गांधी पैलेट गन FIR मामला: 3 घंटे धरने पर बैठे, पीड़ित छात्र के छर्रे दिखाकर पुलिस को घेरा

Rahul Gandhi pellet gun controversy protest outside police station

राहुल गांधी पैलेट गन FIR की मांग को लेकर शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर करीब तीन घंटे तक धरने पर बैठे रहे। नेता प्रतिपक्ष का कहना था कि जब तक पैलेट गन से घायल हुए छात्र साहिल लोहबच की शिकायत पर औपचारिक मामला दर्ज नहीं होता, वे वहां से नहीं हटेंगे। इस दौरान उन्होंने मीडिया के सामने छात्र के शरीर से निकाले गए छर्रे भी दिखाए, जिससे यह घटना और सुर्खियों में आ गई।

विषय-सूची (Table of Contents)

  1. दोपहर 12.30 बजे से क्यों शुरू हुआ धरना
  2. राहुल गांधी का आरोप क्या है
  3. दिल्ली पुलिस का जवाब
  4. घायल छात्र साहिल की हालत कैसी है
  5. सुप्रीम कोर्ट की जांच कमेटी
  6. भारत में पैलेट गन को लेकर नियम

दोपहर 12.30 बजे से क्यों शुरू हुआ धरना

Rahul Gandhi interacting with police officials outside Parliament Street Police Station.
Rahul Gandhi interacting with police officials outside Parliament Street Police Station.

राहुल गांधी पैलेट गन FIR की मांग लेकर शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे अचानक संसद मार्ग थाने पहुंचे। कुछ ही मिनटों बाद वे घायल छात्र साहिल और उसकी मां के साथ डीसीपी कार्यालय गए और अधिकारियों से मुलाकात की। बातचीत के बाद जब उन्हें FIR दर्ज होने का भरोसा नहीं मिला, तो वे थाने के बाहर जमीन पर ही धरने पर बैठ गए। कुछ ही देर में उनके साथ प्रियंका गांधी, अधीर रंजन चौधरी, सलमान खुर्शीद और जयराम रमेश भी वहां पहुंच गए। धरने की खबर फैलते ही कांग्रेस कार्यकर्ता भी थाने के बाहर जमा होकर नारेबाजी करने लगे, जिसके बाद पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाते हुए रैपिड एक्शन फोर्स को भी मौके पर तैनात कर दिया।

राहुल गांधी का आरोप क्या है

राहुल गांधी का कहना है कि 20 जुलाई को हुए संसद मार्च के दौरान प्रदर्शन कर रहे छात्र साहिल पैलेट गन से घायल हुए थे। उनके मुताबिक, 14 अगस्त को दिल्ली पुलिस को इस बारे में लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन शिकायत की रसीद तक नहीं दी गई। इसके बाद 17 अगस्त को ईमेल और फोन के जरिए भी कार्रवाई की मांग दोहराई गई, फिर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

नेता प्रतिपक्ष ने साफ शब्दों में कहा कि अगर पुलिस ने पैलेट गन नहीं चलाई, तो फिर यह हथियार किसने इस्तेमाल किया। उन्होंने दावा किया कि छात्र के शरीर में करीब 200 छर्रे मौजूद हैं, जिनमें से 3 सीधे आंख में हैं और कुछ दिल के पास इतने संवेदनशील स्थान पर हैं कि उन्हें छुआ तक नहीं जा सकता। राहुल गांधी का यह भी आरोप है कि पहले संसद में दिए अपने बयान में उन्होंने गृहमंत्री पर छात्रों के खिलाफ पैलेट गन इस्तेमाल की अनुमति देने का आरोप लगाया था, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई थी।

दिल्ली पुलिस का जवाब

राहुल गांधी पैलेट गन FIR की मांग पर दिल्ली पुलिस सूत्रों ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि पीड़ित छात्र की शिकायत खुद उसी ने दर्ज कराई थी। पुलिस के अनुसार, 20 जुलाई की घटना से जुड़े सभी मामलों की जांच पहले से ही क्राइम ब्रांच कर रही है, इसलिए इस शिकायत को भी उसी टीम को भेजा जाएगा। नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा लगातार राहुल गांधी के संपर्क में बताए जा रहे हैं। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में पहले यह भी कहा था कि 20 जुलाई का संसद मार्च गैरकानूनी था, इसकी अनुमति नहीं ली गई थी और प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड तोड़े गए तथा पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट भी हुई थी, जिसके चलते हालात नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा।

घायल छात्र साहिल की हालत कैसी है

घटना में घायल हुए साहिल लोचाब की उम्र 19 साल है और वे दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के नजफगढ़ इलाके के रहने वाले हैं। वे दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग में पढ़ाई कर रहे हैं। 20 जुलाई को जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई में उनकी दाहिनी आंख की रोशनी चली गई थी, जिसके बाद AIIMS के ट्रॉमा सेंटर में उनकी सर्जरी करनी पड़ी। परिवार के अनुसार डॉक्टरों ने बताया है कि आंख की पुतली को गंभीर नुकसान पहुंचने के कारण रोशनी लौटने की संभावना सिर्फ 1 प्रतिशत है। साहिल की मां ने बताया कि उनका बेटा हमेशा से पुलिस अधिकारी बनना चाहता था और वह इससे पहले भी छात्र आंदोलनों में शामिल होता रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की जांच कमेटी

इस पूरे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच के लिए एक हाई पावर्ड कमेटी गठित की है। इस पांच सदस्यीय कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी को सौंपी गई है। कमेटी में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश, सीबीआई के पूर्व निदेशक और मेघालय के रिटायर्ड पुलिस महानिदेशक जैसे अनुभवी सदस्य शामिल किए गए हैं। इस कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग नियमों के मुताबिक था या नहीं।

भारत में पैलेट गन को लेकर नियम

भारत में पैलेट गन पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है। इसके इस्तेमाल को लेकर गृह मंत्रालय ने एक तय स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर बनाई है, ताकि इसका उपयोग सीमित और नियंत्रित तरीके से हो। सरकार इसे अपेक्षाकृत कम घातक हथियार मानती है, जिसका इस्तेमाल हिंसक भीड़ को काबू करने के लिए आखिरी विकल्प के तौर पर किया जा सकता है। नियमों के अनुसार पैलेट गन का प्रयोग सिर्फ उतना ही होना चाहिए जितना हालात संभालने के लिए जरूरी हो, और आम नागरिकों तथा सुरक्षाकर्मियों दोनों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाना अनिवार्य है। इसी वजह से जवानों को इसके इस्तेमाल की खास ट्रेनिंग भी दी जाती है। गृह मंत्रालय की गाइडलाइंस से जुड़ी अधिक जानकारी आप गृह मंत्रालय, भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं। पुलिस बल प्रयोग से जुड़े कानूनी पहलुओं की विस्तृत जानकारी के लिए भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की वेबसाइट भी एक भरोसेमंद स्रोत है।

निष्कर्ष

राहुल गांधी पैलेट गन FIR का यह मामला अब सिर्फ एक छात्र की शिकायत भर नहीं रह गया है, बल्कि विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच बड़ी राजनीतिक टकराव की वजह बन चुका है। एक तरफ राहुल गांधी दिल्ली पुलिस पर FIR दर्ज न करने का आरोप लगाकर धरने पर बैठे हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस का कहना है कि मामला पहले से क्राइम ब्रांच के पास है। घायल छात्र साहिल की आंख की रोशनी लौटने की संभावना बेहद कम बताई जा रही है, जिसने इस पूरे मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई नियमों के दायरे में थी या नहीं। इस मामले से जुड़े हर ताज़ा अपडेट के लिए sachkasameynews.in पर बने रहें

  • गृह मंत्रालय, भारत सरकार — https://www.mha.gov.in
  • प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), भारत सरकार — https://pib.gov.in

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