फ्रांस के खूबसूरत शहर एवियान में आयोजित हो रहे जी-7 (G7) शिखर सम्मेलन के बीच वैश्विक कूटनीति से जुड़ी एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक हाई-प्रोफाइल द्विपक्षीय (Bilateral) बैठक होने जा रही है।
पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और सुरक्षा संकट के बीच दोनों महाशक्तियों के राष्ट्रप्रमुखों की यह महामुलाकात ऐसे समय पर हो रही है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। sachksameynews.in की इस विशेष रिपोर्ट में जानिए आखिर इस बहुप्रतीक्षित पीएम मोदी डोनाल्ड ट्रंप मुलाकात का मुख्य एजेंडा क्या है और किन गंभीर मुद्दों पर दोनों देशों के बीच आर-पार की बात होने वाली है।
टेबल ऑफ कंटेंट (Table of Content)
- 1. होर्मुज स्ट्रेट संकट और भारतीय नाविकों की सुरक्षा
- 2. भारत-अमेरिका ऐतिहासिक व्यापार समझौता (Trade Deal)
- 3. पश्चिम एशिया संकट और अमेरिका-ईरान विवाद का असर
- 4. रक्षा सौदे: F-35 फाइटर जेट और आतंकवाद पर प्रहार
- 5. H-1B वीजा और ग्लोबल सप्लाई चेन पर बड़ा फैसला
1. होर्मुज स्ट्रेट संकट और भारतीय नाविकों की सुरक्षा
इस महामुलाकात का सबसे बड़ा, संवेदनशील और प्राथमिक एजेंडा होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में खड़ा हुआ गंभीर सुरक्षा संकट है। हाल ही में ओमान की खाड़ी और इस समुद्री मार्ग में हुए सैन्य हमलों के दौरान कई निर्दोष भारतीय नाविकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, जिसे लेकर पूरे भारत में गहरा आक्रोश है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस गंभीर मुद्दे को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने बेहद कड़े और स्पष्ट शब्दों में उठाने जा रहे हैं। भारत का साफ मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापारिक मार्ग (International Maritime Trade Routes) पूरी तरह से सुरक्षित होने चाहिए और यह सभी वैश्विक शक्तियों की सामूहिक जिम्मेदारी है ताकि भविष्य में किसी भी निर्दोष नाविक की जान खतरे में न पड़े।
2. भारत-अमेरिका ऐतिहासिक व्यापार समझौता (Trade Deal)

रणनीतिक और सुरक्षा मामलों के अलावा इस बैठक में दोनों देशों के आर्थिक और व्यापारिक हितों पर सबसे ज्यादा फोकस रहेगा।
मुख्य आर्थिक एजेंडा: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित पड़े बड़े ‘ट्रेड डील’ (Trade Deal) को अंतिम रूप देने की तैयारी है। इस दौरान दोनों देशों के बीच मौजूद व्यापारिक बाधाओं (Tariffs and Trade Barriers) को दूर करने और द्विपक्षीय निवेश को बढ़ावा देने के रास्तों पर अंतिम मुहर लग सकती है।
3. पश्चिम एशिया संकट और अमेरिका-ईरान विवाद का असर
पश्चिम एशिया (West Asia Crisis) में गहराते जा रहे युद्ध और तनाव के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है। बैठक के दौरान दोनों नेता इस वैश्विक संकट के स्थायी समाधानों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
इसके साथ ही, अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी और संभावित समझौतों का भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) और कच्चे तेल की आपूर्ति पर क्या असर पड़ेगा, इस रणनीतिक एजेंडे पर भी गहन मंथन किया जाएगा। भारत अपनी तेल आपूर्ति को निर्बाध रखने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर एक सुरक्षित रोडमैप तैयार करना चाहता है।
4. रक्षा सौदे: F-35 फाइटर जेट और आतंकवाद पर प्रहार
इस पीएम मोदी डोनाल्ड ट्रंप मुलाकात में डिफेंस पार्टनरशिप को एक नए स्तर पर ले जाने की पूरी उम्मीद है। रक्षा क्षेत्र में बहुप्रतीक्षित F-35 फाइटर जेट डील सहित कई अन्य महत्वपूर्ण मिलिट्री एग्रीमेंट्स को आगे बढ़ाने पर सहमति बन सकती है। इसके अलावा, वैश्विक मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ मिलकर कड़ा कदम उठाने और इंटेलिजेंस शेयरिंग को मजबूत करने पर भी दोनों देशों के राष्ट्रप्रमुख बड़ा फैसला ले सकते हैं।
5. H-1B वीजा और ग्लोबल सप्लाई चेन पर बड़ा फैसला
भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और प्रवासियों के लिहाज से भी यह बैठक बेहद खास होने वाली है।
- H-1B वीजा नीतियां: भारतीय पेशेवरों के लिए सबसे जरूरी माने जाने वाले H-1B वीजा के नियमों और आप्रवासन (Immigration) की नीतियों को सरल बनाने पर पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति से बात करेंगे।
- ग्लोबल सप्लाई चेन: चीन पर वैश्विक निर्भरता को कम करने के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद ग्लोबल सप्लाई चेन विकसित करने में भारत की केंद्रीय भूमिका पर चर्चा होगी।
- ऊर्जा सहयोग: दोनों देशों के बीच क्लीन एनर्जी और ग्रीन टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप को और तेजी से आगे बढ़ाने की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
जी-7 शिखर सम्मेलन और इस महामुलाकात से जुड़े हर पल के लाइव अपडेट्स और दोनों देशों के आधिकारिक बयानों के लिए हमारी वेबसाइट sachksameynews.in के साथ लगातार बने रहें। अधिक आधिकारिक विवरण के लिए आप Ministry of External Affairs, India (MEA) की वेबसाइट को भी देख सकते हैं।



