नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET-UG 2026) की मुख्य परीक्षा के बाद जब सरकार ने री-एग्जाम (पुनः परीक्षा) कराने का फैसला लिया, तब बड़े-बड़े विज्ञापन देकर यह दावा किया गया था कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था अभेद्य होगी। एयरफोर्स के जरिए प्रश्नपत्र ले जाने, हाईटेक बायोमेट्रिक जांच और कड़े प्रशासनिक पहरे के बड़े-बड़े दावे किए गए। लेकिन बिहार के लखीसराय से आई इस खौफनाक जमीनी रिपोर्ट ने एक बार फिर सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं।
इस परीक्षा में AIIMS, PMCH और गया मेडिकल कॉलेज जैसे देश के शीर्ष संस्थानों के मेधावी MBBS छात्र ₹15 से ₹20 लाख के लालच में ‘सॉल्वर’ बनकर असली परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा देते पकड़े गए हैं। sachksameynews.in की इस खोजी रिपोर्ट में जानिए कैसे एक बार फिर पूरा सिस्टम फेल हो गया और कैसे देश के लाखों होनहार छात्रों के भविष्य के साथ सरेआम खिलवाड़ किया गया।
टेबल ऑफ कंटेंट (Table of Content)
- 1. विज्ञापन बनाम हकीकत: एयरफोर्स का पहरा और बायोमेट्रिक की खुली पोल
- 2. ब्लैकलिस्टेड कंपनी ‘इनोवेटिव व्यू’ को कैसे सौंप दी देश की सबसे बड़ी परीक्षा?
- 3. लखीसराय ग्राउंड जीरो: कैसे हुआ इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़?
- 4. मुख्य साजिशकर्ता: PMCH के छात्र का कॉलेज से फर्जी हाजिरी का कनेक्शन
- 5. निष्कर्ष: गलतियों को छिपाने की जिद और बेबस छात्र
1. विज्ञापन बनाम हकीकत: एयरफोर्स का पहरा और बायोमेट्रिक की खुली पोल
नीट परीक्षा 2026 को लेकर मचे देशव्यापी बवाल के बाद जनता और कोर्ट के गुस्से को शांत करने के लिए प्रशासन ने बड़े स्तर पर अपनी पीठ थपथपाई थी। अखबारों में सुर्खियां बनीं कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए भारतीय वायुसेना (Air Force) की मदद ली जा रही है, ताकि परिंदा भी पर न मार सके।
लेकिन लखीसराय में जो हुआ, उसने साफ कर दिया कि सेंधमारी प्रश्नपत्रों के बक्से में नहीं, बल्कि सीधे परीक्षा केंद्रों के डिजिटल गेट पर हुई है। परीक्षा में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए जिस ‘बायोमेट्रिक आइडेंटिफिकेशन’ (आधार डेटा मिलान) को सबसे अचूक हथियार बताया जा रहा था, सॉल्वर गैंग ने सीधे उसी सिस्टम को ऑपरेट करने वाले इंसानों को ही खरीद लिया। जब सॉल्वरों के फिंगरप्रिंट असली छात्रों के बायोमेट्रिक डेटा से मैच नहीं हुए, तब भी मोटी रकम लेकर तैनात कर्मियों ने उन्हें चुपचाप परीक्षा हॉल के अंदर जाने दिया।
2. ब्लैकलिस्टेड कंपनी ‘इनोवेटिव व्यू’ को कैसे सौंप दी देश की सबसे बड़ी परीक्षा?
इस पूरे घोटाले में सबसे शर्मनाक और जवाबदेही तय करने वाला पहलू यह है कि NTA ने री-नीट परीक्षा के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का ठेका ‘EDCIL’ को दिया, जिसने आगे चलकर यह काम ‘इनोवेटिव व्यू’ (Innovative View) नामक निजी कंपनी को सौंप दिया।
बेशर्मी का रिकॉर्ड: जांच में सामने आया है कि इस ‘इनोवेटिव व्यू’ कंपनी को उत्तर प्रदेश सरकार (2022), झारखंड सरकार (2025) और तमिलनाडु सरकार पहले ही गंभीर धांधलियों और अनियमितताओं के कारण ब्लैकलिस्ट (प्रतिबंधित) कर चुकी हैं।
सवाल यह उठता है कि जिस कंपनी का इतिहास ही दागदार है और जिसे कई राज्य सरकारें प्रतिबंधित कर चुकी हैं, उसे देश के 24 लाख से अधिक मेडिकल एस्पिरेंट्स के भविष्य की चाबी किस आधार पर सौंप दी गई?
3. लखीसराय ग्राउंड जीरो: कैसे हुआ इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़?
लखीसराय के तीन परीक्षा केंद्रों (हसनपुर हाई स्कूल, केआरके हायर सेकेंडरी और केंद्रीय विद्यालय) से कुल 9 फर्जी परीक्षार्थी पकड़े गए हैं। हसनपुर हाई स्कूल के प्रिंसिपल मृत्युंजय कुमार को दोपहर 12:30 बजे एक गुप्त इनपुट मिला कि उनके केंद्र पर फर्जी परीक्षार्थी बैठने वाले हैं।
इसके बाद मजिस्ट्रेट प्राची कुमारी और पुलिस निरीक्षक विजय कुमार ने सघन जांच शुरू की। गेट पर मंतोष कुमार नाम का एक युवक पकड़ा गया, जो न्यू जलपाईगुड़ी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में MBBS फोर्थ ईयर का छात्र है। वह नालंदा के संजीत कुमार की जगह परीक्षा देने आया था। मंतोष की गिरफ्तारी के बाद बाहर गाड़ी में बैठे लाइनर रंजीत कुमार को भी पकड़ा गया। पूछताछ में पता चला कि इस गैंग ने मध्य प्रदेश, यूपी, दिल्ली और पश्चिम बंगाल के गरीब व जरूरतमंद मेडिकल छात्रों को ₹20 लाख तक का ऑफर देकर ‘सॉल्वर’ के रूप में हायर किया था।
4. मुख्य साजिशकर्ता: PMCH के छात्र का कॉलेज से फर्जी हाजिरी का कनेक्शन

लखीसराय पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार किए गए लोगों को मीडिया के सामने पेश किया।
इस सॉल्वर गैंग का मुख्य मास्टरमाइंड पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) का थर्ड ईयर का छात्र अश्विनी कुमार (फर्जी नाम- मयंक कश्यप) निकला। अश्विनी परीक्षा केंद्र के अंदर बायोमेट्रिक कंपनी का फर्जी कर्मी बनकर घुसा था ताकि फिंगरप्रिंट मिसमैच होने वाले सॉल्वरों को बिना किसी रुकावट के अंदर बैठा सके।
| आरोपी और संस्थान का नाम | घोटाले में भूमिका और वर्तमान स्थिति |
| अश्विनी कुमार (PMCH, पटना) | 2022 बैच का MBBS थर्ड ईयर छात्र। लखीसराय में फर्जी बायोमेट्रिक अधिकारी बनकर अंदर घुसने के आरोप में गिरफ्तार। |
| कॉलेज प्रशासन की मिलीभगत | परीक्षा के दिन पीएमसीएच के अटेंडेंस रजिस्टर में उसकी हाजिरी (Oped Class और सेमिनार में) दर्ज पाई गई, जिससे स्पष्ट है कि कॉलेज के भीतर से भी उसे बड़ा संरक्षण मिल रहा था। |
| पूनम कुमारी (झारखंड टॉपर) | 2021 में झारखंड एकेडमिक बोर्ड की साइंस स्ट्रीम की स्टेट टॉपर भी इस रैकेट में सॉल्वर के रूप में शामिल पाई गई। |
इसके अलावा गया के ANMMCH मेडिकल कॉलेज और पावापुरी के विम्स कॉलेज के भी कई छात्रों के नाम इसमें सामने आए हैं, जहां पूर्व में भी 6 छात्र जेल जा चुके हैं।
5. निष्कर्ष: गलतियों को छिपाने की जिद और बेबस छात्र
इस पूरे घटनाक्रम से एक बात पूरी तरह साफ हो चुकी है कि सरकार और परीक्षा नियामक एजेंसियां अपनी पिछली गलतियों से सबक लेने के बजाय केवल उन्हें ढकने और लीपापोती करने में जुटी हैं। पिछले रिकॉर्ड्स में भी सरकार ने कभी यह खुलकर स्वीकार नहीं किया कि पेपर लीक और सिंडिकेट का जाल कितना गहरा है। बड़े-बड़े सुरक्षा दावों के ढोंग के पीछे का कड़वा सच यही है कि आज भी चंद रुपयों और रसूख के दम पर पूरी शिक्षा व्यवस्था को मंडी बनाकर रख दिया गया है।
दिन-रात एक कर, अपनी पुश्तैनी जमीनें बेचकर (जैसा कि गिरफ्तार छात्र हिमांशु के पिता ने किया) पढ़ाई करने वाले ईमानदार छात्रों के भविष्य के साथ यह सरेआम क्रूरता है। जब तक शीर्ष स्तर पर बैठे अधिकारियों और ब्लैकलिस्टेड कंपनियों के आकाओं पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक देश की परीक्षाओं की पवित्रता बहाल नहीं की जा सकती।
शिक्षा क्षेत्र की इस धांधली और देश-प्रदेश की कानून व्यवस्था के निष्पक्ष विश्लेषणों के लिए हमारी वेबसाइट sachksameynews.in को पढ़ते रहें। नीट परीक्षा से जुड़े आधिकारिक स्पष्टीकरण को देखने के लिए आप National Testing Agency (NTA) की वेबसाइट भी विजिट कर सकते हैं।


