भारत में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं से लेकर बोर्ड परीक्षाओं और मेडिकल-इंजीनियरिंग के भविष्य से जुड़े लाखों छात्रों के बीच इस समय देश की परीक्षा एजेंसियों के खिलाफ भारी आक्रोश है।
एक तरफ जहां देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 पेपर लीक के कारण रद्द होने के बाद दोबारा होने जा रही है, वहीं दूसरी तरफ CBSE 12वीं बोर्ड के रिजल्ट में पहली बार इस्तेमाल की गई डिजिटल तकनीक (OSM) के कारण लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है। आखिर हमारा सिस्टम कहाँ फेल हो रहा है, आइए विस्तार से समझते हैं।
1. NEET री-एग्जाम में सेना की एंट्री: एयरफोर्स संभालेगी लॉजिस्टिक्स का जिम्मा
3 मई 2026 को देशभर के 22.79 लाख छात्रों ने NEET-UG परीक्षा दी थी, जिसका पेपर सोशल मीडिया पर लीक होने के बाद मामला CBI को सौंपा गया। अब यह परीक्षा 21 जून 2026 को दोबारा आयोजित की जा रही है। लेकिन इस बार सरकार कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती।
रक्षा व शिक्षा मंत्रालय की बैठक ➔ पेपर छपाई व ट्रांसपोर्टेशन में सेना शामिल ➔ डाक विभाग के बजाय एयरफोर्स पहुंचाएगी पेपर ➔ NTA बोला: सेना केवल लॉजिस्टिक्स संभालेगी, निगरानी नहीं
सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बीच हुई हाई-लेवल बैठक में फैसला लिया गया कि प्रश्न-पत्रों की छपाई, ट्रांसपोर्टेशन और डिलीवरी की प्रक्रिया में भारतीय वायुसेना (Air Force) और थलसेना (Army) की मदद ली जाएगी। पहले यह काम अकेले डाक विभाग करता था, लेकिन इस बार पेपर लीक माफिया का नेटवर्क तोड़ने के लिए सुरक्षित हवाई रूट और सैन्य लॉजिस्टिक्स का इस्तेमाल होगा।
2. CBSE 12वीं के रिजल्ट में गड़बड़ी: ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) तकनीक बनी जी का जंजाल

छात्रों ने X पर अपनी आंसर शीट्स की तस्वीरें शेयर कीं। आरोप है कि स्कैन कॉपी ब्लर यानी धुंधली होने के बावजूद नंबर काटे गए।
इस साल सीबीएसई 12वीं का रिजल्ट आते ही हड़कंप मच गया। पिछले साल के 88.39% के मुकाबले इस बार पास प्रतिशत गिरकर 85.2% रह गया। नतीजा यह हुआ कि परीक्षा देने वाले 22% यानी 4 लाख से ज्यादा छात्रों ने कॉपियों की दोबारा जांच (Re-evaluation) के लिए आवेदन कर दिया है। इनमें कई ऐसे छात्र भी हैं जो JEE मुख्य परीक्षा क्वालिफाई कर चुके हैं, लेकिन बोर्ड में उनके फिजिक्स और मैथ्स में बेहद कम नंबर आए हैं।
इस गड़बड़ी की मुख्य वजह ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) तकनीक को बताया जा रहा है। इसमें छात्रों की आंसर शीट्स को स्कैन करके ऑनलाइन अपलोड किया जाता है और टीचर्स कंप्यूटर स्क्रीन पर देखकर नंबर देते हैं।
ब्लर स्कैनिंग और लापरवाही: छात्रों का आरोप है कि कॉपियों की स्कैनिंग बेहद धुंधली (Blur) थी, जिसके कारण नंबर काट दिए गए। दिल्ली के एक छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने तो यहाँ तक आरोप लगाया कि सीबीएसई द्वारा भेजी गई उसकी फिजिक्स की आंसर शीट में किसी और की हैंडराइटिंग है।
3. ब्लैकलिस्टेड कंपनियां और प्राइवेट वेंडर्स: क्यों फेल हो रहा है NTA का ढांचा?
संसद की स्थायी समिति की दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के जरिए होने वाली परीक्षाओं (जैसे UGC-NET, CSIR-NET, NEET-PG) में लगातार पेपर लीक और धांधली की शिकायतें आ रही हैं। इसके पीछे 3 सबसे बड़े कारण हैं:
- प्राइवेट वेंडर्स पर अत्यधिक निर्भरता: NTA सालाना 18 से ज्यादा राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं करवाती है, जिसमें करोड़ों छात्र बैठते हैं। लेकिन एजेंसी के पास खुद का स्थायी स्टाफ बेहद कम है (सिर्फ 22 लोग डेप्युटेशन पर और बाकी आउटसोर्स)। प्रश्न-पत्रों की प्रिंटिंग, पैकिंग और डिलीवरी का पूरा काम निजी वेंडर्स के भरोसे छोड़ दिया जाता है।
- दागी कंपनियों को ठेका: सीबीएसई ने जिस ‘कोएम्प्ट एडुटेक’ (Coempt Edutech) कंपनी को डिजिटल कॉपियां जांचने का ठेका दिया था, उसका पुराना नाम ‘ग्लोबरेना टेक्नोलॉजीज’ था। इस कंपनी पर 2019 में तेलंगाना बोर्ड परीक्षा में भारी डेटा प्रोसेसिंग गड़बड़ी के आरोप लगे थे, जहाँ 3 लाख से ज्यादा बच्चे फेल हो गए थे। शिक्षाविदों का कहना है कि एक राज्य में ब्लैकलिस्ट होने के बाद ये कंपनियां नाम बदलकर दूसरे राज्यों में काम हथिया लेती हैं।
- जवाबदेही का अभाव: NTA कोई UPSC या SSC की तरह संवैधानिक या वैधानिक निकाय नहीं है, बल्कि ‘सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860’ के तहत रजिस्टर्ड एक सोसायटी है। इस वजह से यह CAG (महालेखा परीक्षक) के परफॉरमेंस ऑडिट के दायरे से बाहर है और संसद के प्रति इसकी कोई सीधी जवाबदेही नहीं बनती।
4. UPSC और IIT-JEE में क्यों नहीं होते NEET जैसे बड़े स्कैम?
कई विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का मानना है कि परीक्षा के पैटर्न में बदलाव न करना ही NEET की सबसे बड़ी कमजोरी है:
| परीक्षा (Exam) | परीक्षा का मोड (Mode) | चयन की प्रक्रिया / कठिनाई का स्तर | लीक की संभावना |
| NEET-UG | ऑफलाइन (एक ही शिफ्ट में) | आसान पेपर, 85% से ऊपर कटऑफ, 1 नंबर पर हजारों रैंक | सबसे ज्यादा (छोटा सा लीक भी पूरे देश को प्रभावित करता है) |
| IIT-JEE | ऑनलाइन (कई शिफ्टों में) | कठिन पेपर, हर शिफ्ट का पेपर अलग, 25% स्कोर पर भी चयन संभव | बेहद कम (नॉर्मलाइजेशन के कारण असर सीमित रहता है) |
| UPSC (CSE) | ऑफलाइन (केंद्रीय ढांचा) | प्री, मेन्स (सब्जेक्टिव लिखित) और इंटरव्यू के 3 कड़े चरण | शून्य के बराबर (प्राइवेट आउटसोर्सिंग न के बराबर, सरकारी प्रिंटिंग) |
5. समाधान का रास्ता: कैसे सुधरेगा देश का परीक्षा सिस्टम?
नीट-यूजी 21 जून की परीक्षा के आधिकारिक दिशा-निर्देशों, एडमिट कार्ड डाउनलोड और एनटीए के नए नोटिफिकेशन्स को देखने के लिए आप National Testing Agency (NTA) के आधिकारिक वेब पोर्टल पर जा सकते हैं।
शिक्षाविदों और परीक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार को तुरंत ये 5 कदम उठाने होंगे:
- मल्टीपल शिफ्ट और ऑनलाइन मोड: NEET-UG को भी IIT-JEE की तर्ज पर साल में दो बार और कई शिफ्टों में ऑनलाइन मोड में कराया जाए, ताकि देशव्यापी पेपर लीक की गुंजाइश खत्म हो।
- सीमित प्रश्न संकलन (UPSC पैटर्न): किसी भी एक विषय विशेषज्ञ या टीचर को पूरे प्रश्न-पत्र की जानकारी न हो। हर एक्सपर्ट से सिर्फ 5 से 10 सवाल ही लिए जाएं और अंतिम पेपर का चयन रैंडम सॉफ्टवेयर से हो।
- सरकारी प्रिंटिंग और सरकारी केंद्र: प्रश्न-पत्रों की छपाई और लॉजिस्टिक्स का काम निजी वेंडर्स को देने के बजाय सरकारी प्रेस और सुरक्षा बलों की देखरेख में होना चाहिए। साथ ही सिर्फ चिन्हित सरकारी कॉलेजों को ही एग्जाम सेंटर बनाया जाए।
- सख्त परफॉरमेंस ऑडिट: NTA को एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) बनाकर संसद और CAG के प्रति जवाबदेह बनाया जाए ताकि इसके काम में पारदर्शिता आए।
- फास्ट ट्रैक कोर्ट और कठोर सजा: पब्लिक एग्जाम (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट 2024 के तहत पेपर लीक माफियाओं पर ₹1 करोड़ के जुर्माने और 10 साल की जेल के प्रावधान को फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए तुरंत लागू किया जाए, ताकि दोषियों में डर पैदा हो।



