क्लास 8 की सोशल साइंस की नई टेक्स्टबुक ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: पार्ट 2’ को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। किताब में न्यायपालिका के अंदर भ्रष्टाचार (Corruption in Judiciary) जैसे संवेदनशील मुद्दे को शामिल करने पर NCERT ने माफी मांगी है और किताब की बिक्री पर तुरंत रोक लगा दी है।
NCERT की सफाई: “अनजाने में हुई गलती”
विवाद बढ़ने के बाद NCERT ने बुधवार को बयान जारी कर कहा कि वे न्यायपालिका का सर्वोच्च सम्मान करते हैं। संस्था के मुताबिक:
- यह मटेरियल ‘अनजाने में’ शामिल हो गया था, जिसका उन्हें गहरा अफसोस है।
- शिक्षा मंत्रालय के निर्देश पर किताब का डिस्ट्रीब्यूशन पूरी तरह रोक दिया गया है।
- अब इस विवादित चैप्टर को विशेषज्ञों की सलाह लेकर फिर से लिखा जाएगा और नए सत्र (2026-27) में छात्रों को उपलब्ध कराया जाएगा।
CJI सूर्यकांत की सख्त चेतावनी: “खुद हैंडल करूँगा यह केस”
सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने जब यह मुद्दा उठाया, तो CJI सूर्यकांत ने बेहद तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने कहा:
“दुनिया में किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। यह एक सोची-समझी और गहरी साजिश लगती है। मुझे पता है इससे कैसे निपटना है।”
किताब में आखिर क्या था विवादित?
24 फरवरी को जारी हुई इस नई किताब के चैप्टर ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी’ में लिखा गया था कि भ्रष्टाचार, लंबित मामले और जजों की कमी सिस्टम के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। इसमें यह भी दावा किया गया था कि लोग न्यायपालिका के अलग-अलग स्तर पर करप्शन का सामना करते हैं, जिससे गरीबों की न्याय तक पहुंच और मुश्किल हो जाती है।
किताब का वो हिस्सा जिसमें करप्शन और पेंडिंग केस का जिक्र है।

आगे क्या होगा?
NCERT ने अपनी वेबसाइट से भी यह किताब हटा दी है। अब नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) और NEP-2020 के तहत इस चैप्टर को संशोधित (Update) किया जाएगा ताकि किसी संवैधानिक संस्था की गरिमा को ठेस न पहुंचे।

