लखनऊ में अवैध निर्माण को लेकर लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अब सख्त रुख अपनाया है। एलडीए ने साफ कर दिया है कि सिर्फ शमन के लिए आवेदन कर देने से नियमों के विपरीत किए गए निर्माण पर कार्रवाई नहीं रुकेगी। ऐसे बिल्डरों और भवन स्वामियों को चिह्नित किया जा रहा है जिन्होंने शमन के लिए आवेदन तो किया लेकिन आगे की जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं की।
एलडीए की इस कार्रवाई से उन भवन मालिकों की मुश्किल बढ़ सकती है जो प्रवर्तन की कार्रवाई से बचने के लिए शमन आवेदन का सहारा ले रहे थे। प्राधिकरण अब ऐसे मामलों की अलग से जांच कर रहा है और नियमों का पालन नहीं करने वाले निर्माण पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

शमन आवेदन करने वालों पर क्यों होगी कार्रवाई?
एलडीए की समीक्षा बैठक में सामने आया कि कुछ बिल्डरों और भवन स्वामियों ने प्रवर्तन की कार्रवाई शुरू होने के बाद शमन मानचित्र के लिए ऑनलाइन आवेदन किया। हालांकि आवेदन करने के बाद उन्होंने निर्धारित शुल्क जमा नहीं किया और जरूरी दस्तावेज या मानचित्र की प्रक्रिया भी पूरी नहीं की।
अधिकारियों की ओर से संपर्क किए जाने पर कुछ लोग मामले को आगे बढ़ाने के बजाय टालमटोल कर रहे थे। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
प्राधिकरण अब उन सभी मामलों को चिह्नित करेगा जहां शमन की प्रक्रिया सिर्फ कार्रवाई से बचने के लिए शुरू की गई लेकिन उसे पूरा नहीं किया गया। नियमों के अनुसार कार्रवाई योग्य पाए जाने वाले निर्माण पर सीलिंग और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
लखनऊ में अवैध निर्माण पर एक सप्ताह में चलेगा सीलिंग अभियान
एलडीए की ओर से ऐसे मामलों के खिलाफ एक सप्ताह के भीतर अभियान चलाने की तैयारी है। इस अभियान के दौरान नियमों के विपरीत पाए गए निर्माण को सील किया जा सकता है।
मामला न्यायालय से जुड़ा होने पर संबंधित प्राधिकारी के माध्यम से कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। जरूरत पड़ने पर नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी कराई जा सकती है।
इस फैसले का सीधा असर उन निर्माणों पर पड़ेगा जिनके मालिकों ने शमन आवेदन करने के बाद निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं की है। एलडीए की कोशिश है कि लंबित मामलों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उनका तेजी से निस्तारण किया जाए।
शमन का मतलब क्या होता है?

शमन का सामान्य अर्थ ऐसे निर्माण या बदलाव को नियमानुसार स्वीकृत कराने की प्रक्रिया से है जो निर्धारित नियमों के दायरे में नियमित किए जा सकते हैं। हालांकि हर अवैध निर्माण को शमन के जरिए वैध नहीं किया जा सकता।
इसी वजह से एलडीए अब मामलों की जांच के बाद तय करेगा कि कौन से निर्माण नियमानुसार निस्तारित किए जा सकते हैं और किन मामलों में कार्रवाई जरूरी है।
सही मामलों का जल्द होगा निस्तारण
समीक्षा बैठक में केवल कार्रवाई की बात नहीं हुई। अधिकारियों को उन मामलों को भी जल्द निपटाने के निर्देश दिए गए हैं जहां भवन मालिक नियमों के अनुसार प्रक्रिया पूरी करने के लिए तैयार हैं।
बैठक में सामने आया कि कुछ भवन स्वामी एफएआर खरीदने के लिए तैयार हैं। साथ ही वे निर्धारित शुल्क भी जमा करना चाहते हैं। ऐसे मामलों में अनावश्यक देरी नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसका मतलब साफ है कि एलडीए की नीति केवल कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है। जिन मामलों को नियमों के तहत नियमित किया जा सकता है उनमें प्रक्रिया पूरी करके निस्तारण किया जाएगा। वहीं नियमों के दायरे से बाहर आने वाले निर्माण पर कार्रवाई जारी रहेगी। READ MORE
भू-उपयोग परिवर्तन पर ऑनलाइन आपत्ति की सुविधा

एलडीए ने नागरिकों के लिए एक और महत्वपूर्ण व्यवस्था की जानकारी दी है। अब भू-उपयोग परिवर्तन से जुड़े मामलों में लोग ऑनलाइन आपत्ति और सुझाव दर्ज कर सकेंगे।
इससे लोगों को अपनी आपत्ति दर्ज कराने के लिए कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सकती है। ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए लोग संबंधित प्रस्ताव पर अपनी बात रख सकेंगे।
यह कदम शहर में जमीन के उपयोग से जुड़े मामलों में लोगों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भवन मालिकों और बिल्डरों के लिए क्या संदेश?
एलडीए की कार्रवाई से साफ है कि केवल आवेदन कर देने से प्रवर्तन कार्रवाई अपने आप नहीं रुकने वाली। यदि किसी निर्माण को शमन के दायरे में लाया जा सकता है तो संबंधित व्यक्ति को निर्धारित प्रक्रिया और शुल्क की शर्तें पूरी करनी होंगी।
बिल्डरों और भवन स्वामियों को अपने निर्माण से जुड़े स्वीकृत मानचित्र, शुल्क और अन्य दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट रखनी होगी। किसी भी निर्माण को लेकर भ्रम होने पर संबंधित प्राधिकरण के नियमों की जानकारी लेना जरूरी है।
खासकर नए निर्माण के मामले में स्वीकृत मानचित्र और निर्धारित नियमों का पालन करना भविष्य की कार्रवाई से बचने का सबसे सुरक्षित तरीका है।
लखनऊ में अवैध निर्माण पर क्यों बढ़ी सख्ती?

लखनऊ में तेजी से बढ़ते निर्माण के बीच शहर की योजना और निर्धारित भूमि उपयोग का पालन कराना एलडीए की बड़ी जिम्मेदारी है। बिना स्वीकृति या स्वीकृत मानचित्र के विपरीत किए गए निर्माण से सड़क, पार्किंग, यातायात और आसपास के क्षेत्रों की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
इसी वजह से प्राधिकरण समय-समय पर अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान चलाता है। इस बार शमन आवेदन की आड़ में लंबित रखे गए मामलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
एलडीए की ताजा समीक्षा के बाद यह संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में ऐसे मामलों में प्रवर्तन कार्रवाई और तेज हो सकती है।
आगे क्या होगी कार्रवाई?
एलडीए पहले ऐसे मामलों को चिह्नित करेगा जिनमें शमन आवेदन करने के बाद निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। इसके बाद संबंधित निर्माण की स्थिति की जांच की जाएगी।
नियमों के अनुसार कार्रवाई योग्य पाए गए निर्माण को सील किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर न्यायालय में पैरवी के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी की जा सकती है।
दूसरी ओर जो भवन स्वामी निर्धारित नियमों के तहत एफएआर और शुल्क से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करना चाहते हैं उनके मामलों का जल्द निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस पूरी कार्रवाई का उद्देश्य शहर में निर्माण को निर्धारित नियमों के दायरे में लाना है।
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निष्कर्ष
लखनऊ में अवैध निर्माण के खिलाफ एलडीए ने अब सख्त अभियान की तैयारी कर ली है। शमन के लिए आवेदन करने मात्र से कार्रवाई से राहत मिलने वाली नहीं है। जिन मामलों में आवेदन के बाद जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है उन्हें चिह्नित करके सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।
एलडीए ने एक सप्ताह के भीतर अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। वहीं नियमों के तहत निस्तारित किए जा सकने वाले मामलों को तेजी से पूरा करने पर भी जोर दिया गया है।
भवन मालिकों और बिल्डरों के लिए संदेश साफ है कि निर्माण से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी है। केवल शमन आवेदन के भरोसे कार्रवाई से बचना अब आसान नहीं होगा।
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