Layoffs 2026: 98 कंपनियां करेंगी 92,000 कर्मचारियों की छंटनी

Layoffs 2026: AI में निवेश के दबाव के कारण माइक्रोसॉफ्ट और मेटा समेत 98 कंपनियां 92,000 कर्मचारियों की छंटनी करेंगी। रिपोर्ट्स और पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

Layoffs 2026 की शुरुआत वर्करों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस साल लगभग 92,000 लोगों की नौकरियां जा सकती हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दौड़ में बने रहने के लिए टेक दिग्गज अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं, जिसका सीधा असर कर्मचारियों की संख्या पर पड़ रहा है।

लेऑफ डॉट एफवाईआई (layoffs.fyi) के आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष अब तक 98 कंपनियों ने बड़े पैमाने पर कर्मचारी कम करने का इरादा जाहिर किया है। लागत घटाने की यह होड़ अब केवल नई कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां भी कड़े फैसले ले रही हैं।


AI में निवेश का दबाव: क्यों जा रही हैं हजारों नौकरियां?

Layoffs 2026 का सबसे बड़ा कारण AI के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा है। मेटा, अमेजन, गूगल, टेस्ला और स्पेसएक्स जैसी कंपनियां AI को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बना चुकी हैं। दूसरों से पीछे न रह जाएं, इसके लिए ये कंपनियां अरबों डॉलर झोंक रही हैं, जिससे उनकी परिचालन लागत (Operational Cost) में भारी बढ़ोतरी हुई है।

लागत को संतुलित करने के लिए कंपनियां वर्करों की छंटनी कर रही हैं। विशेष रूप से, AI टूल्स की सफलता भी कंपनियों पर भारी पड़ रही है क्योंकि ‘एजेंट टूल्स’ में कंप्यूटिंग पावर की खपत बहुत अधिक होती है, जिससे बिजली और सर्वर का खर्च बढ़ गया है।


दिग्गज कंपनियों का प्लान: माइक्रोसॉफ्ट और मेटा में कटौती

टेक जगत की दो सबसे बड़ी कंपनियों ने अपने खर्चों में कटौती के संकेत दिए हैं:

  • माइक्रोसॉफ्ट: कंपनी ने अमेरिका में अपने 7 फीसदी कर्मचारियों, विशेषकर सीनियर अधिकारियों को जल्द रिटायरमेंट (VRS) का ऑफर दिया है। माइक्रोसॉफ्ट का लक्ष्य इस बचाए गए पैसे को अपनी AI योजनाओं में लगाना है।
  • मेटा (Meta): मार्क जुकरबर्ग की कंपनी ने अपने 10 फीसदी (लगभग 8,000) कर्मचारियों को कम करने की घोषणा की है। मेटा के लिए फिलहाल AI ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

ओपन एआई और एंथ्रोपिक: तकनीक और पूंजी की भीषण जंग

Layoffs 2026 के बीच ओपन एआई (OpenAI) ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने खुद के डेटा सेंटर बनाने की खर्चीली योजना छोड़ दी है और अब वह मौजूदा क्लाउड कंपनियों से सर्वर किराए पर लेगी। इसके बावजूद, प्रतिस्पर्धा इतनी कड़ी है कि ओपन एआई को लगभग 56 लाख करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं।

दूसरी ओर, एंथ्रोपिक (Anthropic) ने अपने नए मॉडल ‘क्लॉड मायथोस’ (Claude Mythos) के जरिए तकनीकी दबाव बढ़ा दिया है। इसके जवाब में ओपन एआई ने जीपीटी-5.5 पेश किया है, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी क्षमता अभी भी उम्मीद से कम है। यह लड़ाई अब केवल तकनीक की नहीं, बल्कि पूंजी और प्रतिभा की जंग बन चुकी है।

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