जीरो किलोमीटर चलीं गाड़ियों ने खोली धान उठान की पोल: करनाल में ₹20 करोड़ का भुगतान रुका; 45 अधिकारियों-कर्मचारियों पर गिरी गाज

करनाल धान उठान घोटाला

हरियाणा के करनाल जिले की अनाज मंडियों से धान उठान (लिफ्टिंग) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा सामने आया है। डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों ने मंडियों में चल रहे कागजी खेल की पूरी पोल खोलकर रख दी है। जीपीएस (GPS) ट्रैकिंग सिस्टम की जांच में सामने आया है कि जिन गाड़ियों के जरिए मंडियों से लाखों क्विंटल धान उठाने का दावा किया गया था, वे असल में ‘शून्य (0) किलोमीटर’ चली थीं।

इस बड़े खुलासे के बाद खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने करीब 35% गाड़ियों का भुगतान तुरंत रोक दिया है, जिसकी कुल राशि लगभग 20 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। मामले की विस्तृत और गोपनीय रिपोर्ट उच्च अधिकारियों के माध्यम से सरकार को भेज दी गई है।

sachkasameynews.in की इस विशेष खोजी रिपोर्ट में पढ़िए कि कैसे डिजिटल तकनीक ने इस पूरे घालमेल को बेनकाब किया।

टेबल ऑफ कंटेंट (Table of Content)

  • 1. GPS रिकॉर्ड से खुला खेल: कागजों में उठ गया धान, गाड़ियां हिलीं तक नहीं
  • 2. ट्रांसपोर्टर्स की सफाई: बताई तकनीकी खामी, कुछ ने छोड़ दिया दावा
  • 3. फर्जी गेट पास और MSP पर डाका: समझिए पूरा मॉडस ऑपेरंडी
  • 4. अब तक 45 अधिकारियों-कर्मचारियों पर एक्शन, 6 FIR दर्ज

1. GPS रिकॉर्ड से खुला खेल: कागजों में उठ गया धान, गाड़ियां हिलीं तक नहीं

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करनाल मंडी में गेटपास के लिए अधिकारियों व किसानों के बीच होती बहस 

करनाल की मंडियों में धान सीजन के दौरान बड़े पैमाने पर लिफ्टिंग का काम किया गया था। नियमानुसार, परिवहन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी अधिकृत वाहनों में जीपीएस (GPS) ट्रैकिंग अनिवार्य की गई थी।

  • इलेक्ट्रॉनिक सबूतों ने पकड़ा झूठ: जब उच्च अधिकारियों के सामने परिवहन विभाग और राइस मिलर्स का डेटा मैच करने के लिए जीपीएस ट्रैकिंग की लॉग रिपोर्ट्स निकाली गईं, तो पूरा प्रशासनिक अमला हैरान रह गया।
  • जीरो किलोमीटर का सच: सरकारी फाइलों और बिलों में जो गाड़ियां मंडियों से धान भरकर राइस मिलों तक पहुंचाने का दावा कर रही थीं, वे जीपीएस सैटेलाइट डेटा में अपनी जगह से एक इंच भी नहीं हिली थीं (शून्य किलोमीटर रनिंग)। इस खुलासे ने सीधे तौर पर इशारा किया कि धान का उठान सिर्फ कागजों पर ही दिखा दिया गया था।

2. ट्रांसपोर्टर्स की सफाई: बताई तकनीकी खामी, कुछ ने छोड़ दिया दावा

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किसानों की धान एमएसपी रेट पर खरीदने के लिए प्रदर्शन करती इनेलो

जांच की आंच जैसे ही ठेकेदारों और ट्रांसपोर्टर्स तक पहुंची, महकमे में हड़कंप मच गया। खुद को फंसता देख ट्रांसपोर्ट ठेकेदारों ने विभाग के आला अधिकारियों के सामने एक विस्तृत प्रेजेंटेशन पेश की।

ठेकेदारों का तर्क: ट्रांसपोर्टर्स का दावा है कि गाड़ियों की लोकेशन ‘जीरो किलोमीटर’ दिखने के पीछे कोई घोटाला नहीं, बल्कि तकनीकी खामी (Technical Glitch) और सर्वर एरर है, जिसके कारण जीपीएस डिवाइस रनिंग किलोमीटर को रिकॉर्ड नहीं कर पाए।

  • दावा छोड़ भाग रहे ठेकेदार: हालांकि, सूत्रों के मुताबिक जैसे ही पुलिस और एसआईटी (SIT) की सख्ती बढ़ी, कई ठेकेदारों ने विवादित और बिना चली गाड़ियों के बदले मिलने वाले लाखों रुपये के भुगतान का दावा खुद ही छोड़ना शुरू कर दिया है। ठेकेदारों के इस कदम ने जांच एजेंसियों के संदेह को और पुख्ता कर दिया है।

3. फर्जी गेट पास और MSP पर डाका: समझिए पूरा मॉडस ऑपेरंडी

इस पूरे मामले के तार सिर्फ ट्रांसपोर्ट तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि यह मंडी के आउटर गेट पास और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की खरीद से भी जुड़ा है।

[मंडी अधिकारियों की मिलीभगत] ──► [फर्जी आउटर गेट पास काटना] ──► [कागजों में फर्जी धान खरीद]
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[करोड़ों का अवैध मुनाफा] ◄── [कागजों में '0 KM' धान उठान] ◄── [MSP के बजट का बंदरबांट]

जानकारों के अनुसार, मंडी अधिकारियों और आढ़तियों की मिलीभगत से पहले फर्जी गेट पास काटे गए ताकि कागजों में धान की आवक दिखाई जा सके। इसके बाद एमएसपी पर फर्जी खरीद दिखाकर सरकार से सीधे खाते में भुगतान उठाने का खेल खेला गया। जब धान असल में था ही नहीं, तो उसे उठाने के लिए गाड़ियों को सिर्फ कागजों पर दौड़ाया गया, जिससे यह ‘जीरो किलोमीटर घोटाला’ वजूद में आया।

4. अब तक 45 अधिकारियों-कर्मचारियों पर एक्शन, 6 FIR दर्ज

धान का सीजन खत्म होने के आठ महीने बीत जाने के बाद भी इस मामले में सरकार और पुलिस का सख्त रुख जारी है। प्रशासन द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) और स्थानीय पुलिस लगातार इस मामले की परतें उधेड़ रही है।

वर्तमान स्थिति व कार्रवाईविवरण
कुल रोकी गई राशिलगभग ₹20 करोड़ (35% गाड़ियों का पेमेंट होल्ड)
दर्ज की गई FIRअलग-अलग थानों में 6 आपराधिक मामले दर्ज
निलंबित/जेल भेजे गए अधिकारीखरीद एजेंसियों के स्टाफ से लेकर मंडी सचिवों सहित 45 पर कार्रवाई
जांच एजेंसीस्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) करनाल

डीएफएससी (DFSC) मुकेश का आधिकारिक बयान

इस पूरे मामले पर करनाल के डीएफएससी मुकेश ने बताया, “परिवहन ठेकेदारों ने जीपीएस सिस्टम में आ रही तकनीकी दिक्कतों का हवाला देते हुए अपनी प्रेजेंटेशन और दलीलें हमारे सामने रखी हैं। हमने पूरी स्थिति, तकनीकी पहलुओं और जीपीएस लॉग्स के साथ एक विस्तृत और व्यापक रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी है। अब इस पर अंतिम और निर्णायक फैसला उच्च स्तर पर लिया जाएगा।”

निष्कर्ष: यदि एसआईटी मंडियों के आउटर गेट पास और मिलों के फिजिकल स्टॉक का दोबारा कड़ाई से मिलान करती है, तो इस घोटाले का दायरा और भी बड़ा हो सकता है। फिलहाल, ₹20 करोड़ के भुगतान पर रोक और 45 कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि डिजिटल ट्रैकिंग ने भ्रष्ट तंत्र की कमर तोड़ दी है।

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Abhishek Ranga is the founder and editor-in-chief of Sach Ka Samay News. With a commitment to journalistic integrity, he focuses on delivering accurate, unbiased, and real-time news to the public. He oversees the digital strategy and content management for the portal, ensuring that every story meets the highest standards of reporting