Farmers Burn Effigies Of Narendra Modi And Donald Trump In Karnal

खेती पर विदेशी साया? करनाल में मोदी-ट्रंप का पुतला दहन; समझें भारत-अमेरिका ट्रेड डील की वो ‘कड़वी’ सच्चाई जिससे डरे हैं किसान

करनाल/घरौंडा: हरियाणा के करनाल में किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। भाकियू (चढूनी) ग्रुप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पुतला फूंककर अपना विरोध दर्ज कराया है। किसानों का सीधा आरोप है कि सरकार ने ‘बैक डोर’ से ऐसी डील की है, जो भारतीय खेती को बर्बाद कर देगी।

🔍 व्यापार समझौते (Trade Deal) की ‘अंदरूनी’ हकीकत:

किसानों के विरोध के पीछे कुछ ठोस कारण और इस डील की वो बातें हैं जो अक्सर हेडलाइंस में नहीं आतीं:

  1. सब्सिडी का खेल: अमेरिका अपने किसानों को अरबों डॉलर की सरकारी सब्सिडी देता है, जिससे वहां की फसलें (मक्का, सोयाबीन, फल) बहुत सस्ती होती हैं।
  2. सस्ता आयात (Cheap Imports): इस डील के तहत अमेरिका से कृषि उत्पाद भारत में सस्ते दामों पर आएंगे। भारतीय किसान, जो पहले से ही लागत और MSP के लिए लड़ रहा है, वह इन विदेशी ‘सस्ते’ उत्पादों का मुकाबला नहीं कर पाएगा।
  3. बाजार पर कब्जा: अगर अमेरिका का माल भारतीय मंडियों में भर गया, तो स्थानीय किसानों की फसलें गोदामों में सड़ जाएंगी या उन्हें औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ेंगी।

🚜 किसानों का आरोप: “पूंजीपतियों के लिए है यह डील”

भाकियू नेता अजय राणा का कहना है कि यह समझौता छोटे किसानों को खत्म करने की साजिश है। उनका मानना है कि सरकार खेती को कॉर्पोरेट और विदेशी ताकतों के हाथों में सौंपना चाहती है, जिससे किसान अपने ही खेत में मजदूर बन जाएगा।


🗓️ आंदोलन का ‘रोडमैप’: तैयार है महापंचायत

किसानों ने अपनी रणनीति साफ कर दी है:

  • 10 मार्च: हरियाणा की हर तहसील में कैंडल मार्च निकालकर विरोध जताया जाएगा।
  • 23 मार्च: कुरुक्षेत्र के पिपली में महापंचायत होगी, जहां भविष्य के बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार होगी।

⚠️ सरकार की ‘पोल’ या मजबूरी?

एक तरफ सरकार इसे ‘ग्लोबल ट्रेड’ में भारत की बढ़ती धमक बता रही है, तो दूसरी तरफ ग्राउंड जीरो पर किसान इसे अपनी ‘मौत का वारंट’ कह रहे हैं। सवाल यह है कि क्या अमेरिका से ऊर्जा और विमानों की डील करने के चक्कर में भारतीय कृषि की बलि चढ़ाई जा रही है?