करनाल ईडी रेड: 155 करोड़ के बैंक घोटाले में हड़कंप, 11 ठिकानों पर एक्शन

करनाल ईडी रेड: 155 करोड़ के बैंक घोटाले

हरियाणा के करनाल में मंगलवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने एक बड़े बैंक घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तड़के छापेमारी शुरू कर दी। यह पूरी कार्रवाई करीब 155.21 करोड़ रुपये के कथित बैंकिंग फ्रॉड से जुड़ी हुई है।

इस हाई-प्रोफाइल मामले में ईडी ने लक्कड़ कारोबारी के घर और दफ्तर समेत देश के अलग-अलग राज्यों में एक साथ दबिश दी है। sachksameynews.in की इस विशेष खोजी रिपोर्ट में जानिए आखिर क्या है यह पूरा घोटाला और कौन-कौन से बड़े नाम इस वक्त केंद्रीय जांच एजेंसी की रडार पर हैं।

तड़के 5 बजे लक्कड़ कारोबारी के घर पहुंची ED की टीम

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चंडीगढ़ जोनल यूनिट की टीम मंगलवार सुबह करीब 5 बजे भारी सुरक्षा बल के साथ करनाल के पॉश इलाके सेक्टर-13 में पहुंची। यहां टीम ने प्रसिद्ध लकड़ी कारोबारी अशोक मित्तल के आवास को चारों तरफ से घेर लिया। इसके साथ ही लक्कड़ मार्केट में स्थित उनके मुख्य कार्यालय पर भी एक साथ छापेमारी की गई।

केंद्रीय सुरक्षा बलों (Central Security Forces) के जवानों की मौजूदगी में अधिकारियों ने परिसरों के भीतर प्रवेश किया। कई घंटों तक चली इस गहन जांच में टीम ने बैंकिंग दस्तावेज, कंपनी के बही-खाते, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण वित्तीय कागजातों को अपने कब्जे में लेकर खंगाला। इस करनाल ईडी रेड की खबर फैलते ही पूरे शहर के व्यापारिक गलियारों में सनसनी फैल गई।

हरियाणा, दिल्ली और गोवा समेत 11 ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई

जांच एजेंसी के मुताबिक, यह कार्रवाई किसी एक जगह तक सीमित नहीं थी। ईडी ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत ‘महेश टिंबर प्राइवेट लिमिटेड’ से जुड़े पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए तीन राज्यों में एक साथ जाल बिछाया।

  • छापेमारी के क्षेत्र: हरियाणा (करनाल), देश की राजधानी दिल्ली और पर्यटन राज्य गोवा।
  • कुल ठिकाने: कुल 11 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ सर्च ऑपरेशन चलाया गया।
  • मकसद: इस घोटाले के जरिए कमाए गए पैसे (Proceeds of Crime) को कहां-कहां निवेश किया गया और संपत्तियां कैसे खरीदी गईं, इसका डिजिटल और दस्तावेजी सबूत जुटाना।

क्या है 155 करोड़ रुपये का यह पूरा बैंक घोटाला?

ईडी की तफ्तीश में सामने आया है कि यह पूरा मामला बैंकिंग प्रणाली में हेरफेर और विदेशी लेन-देन (Foreign Transactions) के जरिए किए गए फ्रॉड से जुड़ा है।

घोटाले का तरीका: आरोपियों ने विदेशी व्यापार से संबंधित ‘लेटर ऑफ क्रेडिट’ (Letter of Credit) की सीमा को गलत तरीके से बढ़वाया। इस वित्तीय हेरफेर के कारण तत्कालीन ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (OBC) और अन्य बैंकों के कंसोर्टियम (बैंकों का समूह) को लगभग 155.21 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा।

धोखाधड़ी से जुटाई गई इस भारी-भरकम राशि को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए विभिन्न फर्जी कंपनियों, अन्य बैंक खातों और अचल संपत्तियों में ट्रांसफर कर दिया गया। इसी वजह से अब इस मामले की जांच प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की जा रही है।

पुराना 134 करोड़ का जीएसटी चोरी मामला फिर चर्चा में

इस करनाल ईडी रेड के बाद कारोबारी अशोक मित्तल का पुराना इतिहास भी एक बार फिर शहर में चर्चा का विषय बन गया है। करीब दो साल पहले उन पर 134 करोड़ रुपये की जीएसटी (GST) चोरी का आरोप लगा था।

घटनाक्रमविवरणवर्तमान स्थिति
गिरफ्तारीजीएसटी चोरी मामले में पंचकूला से हुई थी गिरफ्तारी।कई महीने जेल में बिताए।
जमानतलंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद कोर्ट से मिली थी बेल।वर्तमान में जमानत पर बाहर हैं।
संपत्ति नीलामीबकाया वसूली के लिए संपत्तियों को नीलामी में डाला गया था।सौरभ ढींगरा ने ₹1.89 करोड़ में खरीदी थी संपत्ति।

शिकायतकर्ता अनिल अरोड़ा के दावों के मुताबिक, पुराने मामले की जांच अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि अब 155 करोड़ रुपये के इस नए बैंक फ्रॉड ने उनकी मुश्किलें और ज्यादा बढ़ा दी हैं।

जांच के दायरे में आए मुख्य संदिग्धों की सूची

‘महेश टिंबर प्राइवेट लिमिटेड’ और इस पूरे बैंकिंग फ्रॉड के तार कई रसूखदार लोगों से जुड़े हुए हैं। ईडी द्वारा जारी सूचना और सूत्रों के अनुसार, इस केस में निम्नलिखित लोग मुख्य रूप से जांच के घेरे में आ चुके हैं:

  • अशोक मित्तल: करनाल के मुख्य लक्कड़ कारोबारी, जिनके घर और ऑफिस पर मुख्य फोकस रहा।
  • सौरभ ढींगरा: अशोक मित्तल के व्यावसायिक सहयोगी और पूर्व में नीलाम हुई संपत्ति के खरीदार।
  • भारत भूषण मित्तल: कंपनी के वित्तीय लेन-देन और कागजी कार्यवाही से जुड़े सदस्य।
  • रमन सिंघल: कारोबारी नेटवर्क और विदेशी बैंकिंग व्यवस्था को संभालने में संदिग्ध भूमिका।

ईडी अब इन सभी आरोपियों के बैंक खातों के प्रवाह (Fund Flow) और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों (लैपटॉप, मोबाइल फोन) के डेटा का विश्लेषण कर रही है, ताकि यह साफ हो सके कि जनता के पैसे का गबन किस स्तर पर किया गया।

इस मामले से जुड़ी पल-पल की लाइव अपडेट्स और आधिकारिक बयानों के लिए हमारी वेबसाइट sachksameynews.in को फॉलो करते रहें। अधिक तकनीकी और कानूनी जानकारी के लिए आप Enforcement Directorate (ED) की आधिकारिक वेबसाइट पर भी विजिट कर सकते हैं।

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