Karnal Corruption Case ने हरियाणा की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। करनाल के घरौंडा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव गढ़ीभरल में ग्राम पंचायत और पूर्व सरपंच पर करीब 10 करोड़ रुपए के गबन के गंभीर आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के विकास के लिए आया करोड़ों का फंड अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से डकार लिया गया।
यह मामला तब प्रकाश में आया जब गांव के निवासी जितेंद्र कुमार ने आरटीआई (RTI) के माध्यम से सबूत जुटाए। सितंबर 2025 से लगातार शिकायतें करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने पर ग्रामीण अब लामबंद हो गए हैं। इस घोटाले की गूँज अब जिला सचिवालय तक पहुँच गई है, जहाँ ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई है।

Karnal Corruption Case villagers protesting at Secretariat against 10 crore scam
कागजों में बना 47 लाख का पार्क: धरातल पर कुछ भी नहीं
इस Karnal Corruption Case की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गांव में एक आधुनिक पार्क का निर्माण कागजों में पूरा दिखा दिया गया है। आरटीआई से मिले दस्तावेजों के अनुसार, इस पार्क के निर्माण पर सरकारी खजाने से 47 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। हालांकि, जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे, तो वहां पार्क का नामोनिशान तक नहीं था।
ग्रामीणों का आरोप है कि पार्क के नाम पर जारी की गई राशि का सीधा-सीधा दुरुपयोग किया गया है। यह “कागजी पार्क” भ्रष्टाचार का एक जीता-जागता उदाहरण बन गया है, जो सरकारी सिस्टम की खामियों को उजागर करता है।
237 मकानों का फर्जीवाड़ा: प्रधानमंत्री आवास योजना में सेंध
भ्रष्टाचार का यह खेल केवल पार्क तक सीमित नहीं रहा। Karnal Corruption Case में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत भी बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। शिकायतकर्ता जितेंद्र कुमार के अनुसार, सरकारी फाइलों में 237 मकानों के निर्माण की रिपोर्ट ‘कम्प्लीट’ दिखा दी गई है।
हकीकत यह है कि इनमें से अधिकांश मकानों का निर्माण धरातल पर हुआ ही नहीं है। इसके अलावा, गांव के चार जोहड़ों (तालाबों) को पोंड सिस्टम में बदलने का दावा किया गया था, लेकिन आज भी गंदा पानी खेतों में जा रहा है। आरटीआई से जुटाए गए ये सबूत चीख-चीख कर 10 करोड़ के घोटाले की कहानी बयां कर रहे हैं।
सीएम विंडो पर फर्जी साइन: शिकायत बंद करने का खेल
इस मामले में सबसे गंभीर मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता ने प्रशासन पर ही आरोप लगाए। जितेंद्र कुमार ने मुख्यमंत्री की ‘सीएम विंडो’ पर शिकायत दर्ज करवाई थी। लेकिन एक हफ्ते बाद जब स्टेटस चेक किया गया, तो शिकायत यह कहकर बंद कर दी गई कि शिकायतकर्ता ने समाधान से संतुष्ट होकर साइन कर दिए हैं।
जितेंद्र कुमार का दावा है कि उन्होंने किसी भी दस्तावेज पर साइन नहीं किए हैं। उनके अनुसार, विभाग के अधिकारियों ने फर्जी हस्ताक्षर कर शिकायत को जबरन रफा-दफा कर दिया। यह सीधे तौर पर जांच को प्रभावित करने और दोषियों को बचाने का प्रयास प्रतीत होता है।
ग्रामीणों की मांग और आगे की कार्रवाई
Karnal Corruption Case के उजागर होने के बाद अब जितेंद्र कुमार और अन्य ग्रामीणों को धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने पूर्व सरपंच शौकीन और उनके परिवार पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने हरियाणा के मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर जांच निष्पक्ष नहीं होती है, तो वे इस मामले को उच्च न्यायालय तक ले जाएंगे। करनाल में भ्रष्टाचार का यह मामला अब एक जन आंदोलन का रूप ले रहा है, जहाँ लोग अपने टैक्स के पैसों का हिसाब मांग रहे हैं।

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