नई दिल्ली: इजराइल-ईरान युद्ध के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें 83 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गई हैं, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल महँगा होने का डर सता रहा था। लेकिन अब अमेरिका के एक बड़े फैसले ने भारत को बड़ी राहत दी है।
🔹 अमेरिका ने दिया 30 दिन का ‘स्पेशल लाइसेंस’
ट्रम्प प्रशासन के ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को 3 अप्रैल 2026 तक रूसी कच्चा तेल खरीदने की अनुमति दे दी है।
- वजह: अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के अनुसार, वैश्विक तेल बाजार को स्थिर रखने और भारत जैसे महत्वपूर्ण पार्टनर की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह रियायत दी गई है।
- शर्त: भारत केवल उन्हीं जहाजों से तेल ले सकेगा जो 5 मार्च तक लोड हो चुके थे। वर्तमान में लगभग 95 लाख बैरल रूसी तेल एशियाई समुद्र में ‘वेटिंग मोड’ में खड़ा है।
🛡️ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की चेतावनी
मिडिल ईस्ट के हालातों पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गहरी चिंता व्यक्त की है:
“स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा की जीवन रेखा है। यहाँ तनाव का सीधा असर तेल-गैस की सप्लाई और हमारी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। दुनिया जिस तरह से युद्ध की ओर बढ़ रही है, वह अब एक ‘न्यू नॉर्मल’ बनता जा रहा है जो चिंता का विषय है।”
🌍 क्यों बढ़ा कच्चे तेल का दाम?
- होर्मुज की घेराबंदी: ईरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को ब्लॉक करने की कोशिश की है, जहाँ से दुनिया की 20% तेल सप्लाई गुजरती है।
- तेल क्षेत्रों पर हमले: सऊदी अरामको और इराक के बड़े तेल केंद्रों पर हालिया हमलों ने बाजार में डर पैदा कर दिया है।
- महँगा क्रूड: ब्रेंट क्रूड आज सुबह 84 डॉलर के स्तर को छू गया है।
भारत के लिए रूसी तेल क्यों है ‘संजीवनी’?
- भारी डिस्काउंट: रूस भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार से काफी सस्ती दरों पर तेल देता है।
- महंगाई पर लगाम: सस्ता तेल मिलने से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहेंगी और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट नहीं बढ़ेगी।
- विकल्प: खाड़ी देशों में युद्ध होने पर रूस भारत के लिए सबसे भरोसेमंद सप्लायर बनकर उभरा है। भारत अपनी जरूरत का 88% तेल आयात करता है।

