पंचकूला/चंडीगढ़ | सच का समय न्यूज़ हरियाणा के शिक्षित युवाओं के लिए ‘होली’ खुशियां नहीं बल्कि पुलिसिया कार्रवाई की टेंशन लेकर आई है। 20 फरवरी को विधानसभा घेराव करने पहुंचे युवाओं पर चंडीगढ़ के सेक्टर-17 थाने में शांति भंग का केस दर्ज किया गया है। 17 युवाओं को 11 मार्च को पेश होने का नोटिस थमाया गया है।

🔴 HPSC की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल (खामियां):
भर्ती प्रक्रिया में ऐसी खामियां हैं जिन्हें जानकर आप हैरान रह जाएंगे:
- पद खाली, युवा बाहर: इंग्लिश विषय की भर्ती में 613 पद खाली हैं, लेकिन पास सिर्फ 151 कैंडिडेट हुए। यानी 75% सीटें खाली रहने की नौबत आ गई है।
- 35% का ‘कठिन’ बैरियर: युवाओं का आरोप है कि HPSC ने जानबूझकर ‘सब्जेक्ट नॉलेज टेस्ट’ में 35 प्रतिशत अंक का ऐसा क्राइटेरिया रखा है जिससे योग्य उम्मीदवार भी बाहर हो रहे हैं।
- पैटर्न पर सवाल: जब 2143 में से 10% युवा भी क्वालिफाई नहीं कर पा रहे, तो सवाल चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पैटर्न पर उठता है। क्या यह पदों को खाली रखकर बैकलॉग में डालने की साजिश है?
📍 क्या था पूरा मामला?
बजट सत्र के पहले दिन जब अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से विधानसभा घेरने निकले थे, तो चंडीगढ़ पुलिस ने उन्हें सेक्टर-17 बस स्टैंड पर ही रोक लिया। इस दौरान पुलिस और युवाओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई। पुलिस ने बल प्रयोग कर उन्हें बसों में भरकर डिटेन किया और अब उन पर केस दर्ज कर दिया गया है।
⚖️ सियासत भी गरमाई

इस मुद्दे पर कांग्रेस भी हमलावर है। सांसद दीपेंद्र हुड्डा और वरुण मुलाना पहले ही पंचकूला में बैरिकेड्स फांदकर युवाओं के समर्थन में गिरफ्तारी दे चुके हैं। विपक्ष का सीधा आरोप है कि सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय उन पर लाठियां और केस थोप रही है।
“सवाल यह है कि क्या लोकतंत्र में अपनी बात रखना अपराध है? HPSC को जवाब देना होगा कि सीटें खाली क्यों रह रही हैं और क्राइटेरिया इतना जटिल क्यों है?”

