चुनाव आयोग विवाद गहराने के साथ ही Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग बढ़ गई है। जानें इसमें शामिल 5 मुख्य लोग और आगे क्या होगा।
Gyanesh Kumar इस्तीफा विवाद: चुनाव आयोग घमासान के 5 अहम किरदार और आगे की राह
Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग और चुनाव आयोग के भीतर मचे घमासान ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। पिछले दो दिनों से विपक्षी दल चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगातार तीखे हमले कर रहे हैं।
एक खोजी रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या आयोग के भीतर सब कुछ ठीक चल रहा है या फैसलों में बड़ी गड़बड़ियां हुई हैं।
Table of Contents
- चुनाव आयोग में घमासान की मुख्य वजह
- Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग: 5 बड़ी गड़बड़ियों के आरोप
- विवाद के 5 मुख्य किरदार
- आगे क्या होगा: कानूनी और संवैधानिक रास्ते
चुनाव आयोग में घमासान की मुख्य वजह

इलेक्शन कमिश्नर डॉ. सुखबीर संधू, चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार और इलेक्शन कमिश्नर डॉ. विवेक जोशी
जून 2025 में चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट सुधार के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया शुरू की थी। इस प्रक्रिया के तहत देशभर में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए। विपक्ष ने आरोप लगाया कि ये नाम गलत नीयत से काटे गए हैं।
23 सितंबर 2026 को सामने आई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार आधिकारिक आपत्तियां जताईं। आयोग के भीतर कई फैसले दोनों आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए।
Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग: 5 बड़ी गड़बड़ियों के आरोप
वोटर लिस्ट संशोधन की पूरी प्रक्रिया में 5 प्रमुख सवाल और आरोप सामने आए हैं:
- फॉर्म-6 में नया सवाल: वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने वाले फॉर्म में माता-पिता या दादा-दादी के पुराने वोटर लिस्ट रिकॉर्ड का सवाल अनिवार्य रूप से जोड़ा गया। इसे बिना नियम बदले लागू करने का आरोप है।
- अधिकारियों का एक्सेस सीमित करना: जिलों के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (ERO) का पोर्टल पर एक्सेस सीमित कर दिया गया।
- पश्चिम बंगाल में विवादित अपीलें: लाखों वोटरों के नाम हटाने को लेकर आयोग की तरफ से ही अपीलें दायर करने के आरोप लगे।
- अपील दायर करने की अनुमति पर संशय: चुनाव आयुक्त संधू के अनुसार, इन अपीलों को दायर करने का अधिकार किसे दिया गया, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
- सॉफ्टवेयर की तकनीकी खामी: गोवा में योग्य पाए गए 97 वोटरों के नाम पोर्टल की तकनीकी समस्याओं के कारण समय पर नहीं जोड़े जा सके।
विवाद के 5 मुख्य किरदार
इस पूरे मामले के केंद्र में 5 प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी हैं:
1. Gyanesh Kumar (मुख्य चुनाव आयुक्त)
1988 बैच के केरल कैडर के पूर्व IAS अधिकारी ज्ञानेश कुमार मार्च 2024 में चुनाव आयुक्त बने और बाद में मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभाला। उन पर बहुमत की अनदेखी कर मनमाने फैसले लेने के आरोप लग रहे हैं।
2. सुखबीर सिंह संधू (चुनाव आयुक्त)
1988 बैच के उत्तराखंड कैडर के पूर्व IAS अधिकारी संधू ने आयोग के भीतर प्रक्रियागत कमियों और फैसलों पर 14 में से कई आपत्तियां दर्ज करवाईं।
3. विवेक जोशी (चुनाव आयुक्त)
1989 बैच के हरियाणा कैडर के पूर्व IAS अधिकारी जोशी ने भी फॉर्म-6 में बदलाव और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं पर आधिकारिक ऐतराज जताया था।
4. सीमा खन्ना (IT महानिदेशक)
ECINet पोर्टल और IT व्यवस्थाओं की प्रमुख सीमा खन्ना पर सॉफ्टवेयर एक्सेस और तकनीकी संचालन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
5. टीवी सोमनाथन (कैबिनेट सचिव)
देश के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी, जिन्हें आयोग के भीतर उठ रही आपत्तियों से संबंधित पत्र लिखे जाने की बात सामने आई है।
आगे क्या होगा: कानूनी और संवैधानिक रास्ते
चुनावी नियमों और 2023 के कानून के तहत चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कार्यों के लिए आपराधिक मुकदमों से सुरक्षा प्राप्त है। ऐसे में मुख्य रूप से दो स्थितियां बन सकती हैं:
- संसदीय प्रक्रिया (महाभियोग): मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाना होता है, जो एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है।
- न्यायिक समीक्षा: सुप्रीम कोर्ट में प्रक्रियागत नियमों के उल्लंघन को लेकर याचिकाएं दायर की जा सकती हैं, जिस पर अदालत संज्ञान ले सकती है।
चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और वैश्विक मानकों की विस्तृत जानकारी के लिए आप BBC News और Reuters की आधिकारिक रिपोर्ट्स देख सकते हैं।
इस मामले में आगे के राजनीतिक घटनाक्रम और अपडेट के लिए हमारी वेबसाइट के संबंधित सेक्शन चुनाव आयोग अपडेट्स और राष्ट्रीय राजनीति पर बने रहें।
SEMICON India 2026: PM मोदी ने बताया भारत कैसे बनेगा सेमीकंडक्टर हब

SEMICON India 2026 में PM मोदी ने भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर की प्रगति, Semicon 2.0, चिप निर्माण और सप्लाई चेन को लेकर अहम बातें बताईं।




