1 अप्रैल से देश में सिर्फ ‘एथेनॉल वाला पेट्रोल’: क्या यह सरकार का बड़ा दांव है या पुरानी गाड़ियों के लिए खतरा?

Fuel With 20% Ethanol Blending Mandatory From April 1

यह खबर आपकी जेब और आपकी गाड़ी की सेहत, दोनों से जुड़ी है। सरकार ने 1 अप्रैल से पूरे देश में E20 पेट्रोल (20% एथेनॉल मिक्स) अनिवार्य कर दिया है। जहाँ सरकार इसे मास्टरस्ट्रोक बता रही है, वहीं इसके पीछे की कड़वी हकीकत और आपकी पुरानी गाड़ी पर इसके असर को समझना भी जरूरी है।

यहाँ इस खबर का पूरा ‘कच्चा चिट्ठा’ है:

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल की मिलावट (E20) को अनिवार्य कर दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि अब तेल कंपनियों को हर हाल में E20 पेट्रोल ही सप्लाई करना होगा। सरकार का लक्ष्य 2030 से घटाकर अब 2025-26 तक पूरे देश को इस फ्यूल पर शिफ्ट करना है।

⚠️ पर्दे के पीछे की असलियत: आपकी गाड़ी पर क्या होगा असर?

सरकार कह रही है कि इससे प्रदूषण कम होगा, लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू आपकी चिंता बढ़ा सकता है:

  1. पुरानी गाड़ियों का माइलेज गिरेगा: विशेषज्ञों का मानना है कि 2023 से पहले बनी गाड़ियों का माइलेज 3% से 7% तक कम हो सकता है। यानी आप पैसे तो पूरे पेट्रोल के देंगे, लेकिन गाड़ी कम चलेगी।
  2. इंजन की उम्र पर खतरा: एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है। पुरानी गाड़ियों के इंजन के रबर के पार्ट्स, पाइप और प्लास्टिक के पुर्जे इस मिक्सचर को झेलने के लिए नहीं बने हैं। लंबे समय में इंजन में जंग (Corrosion) और खराबी आने का खतरा है।
  3. सिर्फ नई गाड़ियां ही सुरक्षित: केवल वही गाड़ियां जो E20 Compliant हैं (ज्यादातर 2023 के बाद बनी), इस पेट्रोल को सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल कर पाएंगी।

💸 सरकारी ‘पोल’ या बड़ा फायदा?

सरकार का दावा है कि इससे ₹1.40 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बची है। लेकिन सवाल ये है:

  • जनता को क्या मिला? पेट्रोल के दाम में अभी तक कोई बड़ी कटौती नहीं दिखी है, जबकि एथेनॉल कच्चे तेल के मुकाबले बहुत सस्ता है। मुनाफा तेल कंपनियां और सरकार रख रही हैं या आम जनता तक पहुँच रहा है, यह बहस का विषय है।
  • किसानों का नाम, कंपनियों का काम: कहा जा रहा है कि इससे किसानों को फायदा होगा, लेकिन असल कमाई बड़ी शुगर मिलों और एथेनॉल प्लांट मालिकों की हो रही है।

⚙️ RON 95: इंजन बचाने की कोशिश

सरकार ने इस फ्यूल के लिए 95 RON (ऑक्टेन नंबर) तय किया है। यह साधारण पेट्रोल (91 RON) से बेहतर है और इंजन में ‘खटखट’ (Knocking) की आवाज को रोकता है। लेकिन क्या हर पेट्रोल पंप पर यह क्वालिटी मेंटेन हो पाएगी? यह बड़ी चुनौती है।

♻️ एथेनॉल के प्रकार: 1G से 3G तक

  • 1G: गन्ने और मक्के से (अभी यही इस्तेमाल हो रहा है)।
  • 2G: पराली और कचरे से (शुरुआत हो चुकी है)।
  • 3G: समुद्री काई (Algae) से (भविष्य की योजना)।

📢 बड़ा सवाल: क्या सरकार को पुरानी गाड़ियों के मालिकों के लिए कोई ‘मुआवजा’ या ‘कन्वर्जन किट’ पर सब्सिडी देनी चाहिए? क्या एथेनॉल की वजह से पेट्रोल की कीमतें कम होनी चाहिए?

Abhishek Ranga is the founder and editor-in-chief of Sach Ka Samay News. With a commitment to journalistic integrity, he focuses on delivering accurate, unbiased, and real-time news to the public. He oversees the digital strategy and content management for the portal, ensuring that every story meets the highest standards of reporting