25 जुलाई 2026 को भारत के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। नीट (NEET) परीक्षा से जुड़े विवादों और उसके बाद पैदा हुए राजनीतिक व सामाजिक दबाव के बीच यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के पीछे के प्रमुख कारण और परिस्थितियां इस प्रकार हैं:
1. NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद का बढ़ता दबाव
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का सबसे मुख्य कारण नीट-यूजी 2026 (NEET-UG 2026) परीक्षा में कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों को लेकर देश भर में फैला भारी आक्रोश था। सरकार ने मामले की सीबीआई (CBI) जांच सौंपी थी और कई सुधार लागू किए थे, फिर भी अभ्यर्थियों और जनता के बीच असंतोष शांत नहीं हुआ।
2. जंतर-मंतर पर 36 दिनों का विशाल छात्र आंदोलन

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में मेडिकल अभ्यर्थियों और नागरिक समाज के सदस्यों ने राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक लंबा और अभूतपूर्व आंदोलन चलाया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने तीन प्रमुख शर्तें रखी थीं:
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तुरंत इस्तीफा।
- 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर (FIR) और पुलिस केस वापस लेना।
- पेपर लीक विवाद के मानसिक तनाव के कारण जान गंवाने वाले नीट अभ्यर्थियों के परिवारों के लिए ₹1-1 करोड़ का मुआवजा।
3. नैतिक एवं राजनीतिक जवाबदेही
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे अपने त्यागपत्र और ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर जारी बयान में धर्मेंद्र प्रधान ने अपने फैसले को राजनीतिक व नैतिक जवाबदेही का उदाहरण बताया। उन्होंने लिखा:
“पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम से मुझे गहरा दुख पहुंचा है। यह मेरे व्यक्तिगत सम्मान का विषय नहीं है… भारत की युवा शक्ति इस देश की असली ताकत है। मेरा संकल्प है कि हम देश के युवाओं की ऊर्जा को किसी भी भ्रम या अनिश्चितता के चक्रव्यूह में नहीं फंसने देंगे।”
गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित शीर्ष नेताओं ने उनके इस कदम की सराहना करते हुए इसे छात्र हित और राजनीतिक शुचिता का प्रतीक बताया।
4. गतिरोध समाप्त करने और सुधार की राह बनाने की रणनीति
जंतर-मंतर पर बढ़ते आंदोलन और विपक्ष के कड़े हमलों के कारण बने प्रशासनिक गतिरोध को खत्म करना सरकार के लिए अनिवार्य हो गया था। उनके इस्तीफे के बाद:
- केंद्र सरकार ने CJP प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर जंतर-मंतर का धरना समाप्त करवाया।
- प्रह्लाद जोशी को नया केंद्रीय शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया।
- संसद में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 पेश करने का रास्ता साफ हुआ, ताकि भविष्य में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं को पूर्ण पारदर्शी बनाया जा सके।
छात्र शक्ति की बड़ी जीत: जंतर-मंतर पर 36 दिनों से जारी CJP का आंदोलन समाप्त; शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, सभी मांगें मंजूर


