हमारे चैंपियन की दुर्दशा: देव मीणा ने नेशनल रिकॉर्ड बनाकर कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए किया क्वालिफाई, चंद घंटों बाद ई-रिक्शा में ढोने पड़े पोल!

एथलेटिक्स फेडरेशन कप में पोल से छलांग लगाते देव मीणा।

भारत में जब भी कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए मेडल लेकर आता है, तो पूरा देश और सरकारें उनकी तारीफों के पुल बांधने में पीछे नहीं हटतीं। लेकिन उसी चैंपियन को अपने मुकाम तक पहुंचने के लिए ग्राउंड लेवल पर किस तरह की दुर्दशा और प्रशासनिक बेरुखी का सामना करना पड़ता है, इसकी एक जीती-जागती और झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है।

ई-रिक्शा में पोल लादते देव मीणा और उनके साथी।

ई-रिक्शा में पोल लादते देव मीणा और उनके साथी।

रांची में आयोजित एथलेटिक्स फेडरेशन कप में मध्य प्रदेश के भोपाल के दो युवा जांबाजों ने मेंस पोल वॉल्ट प्रतियोगिता में इतिहास रच दिया। लेकिन इस ऐतिहासिक जीत के चंद घंटों बाद ही देश का मान बढ़ाने वाले इन स्टार एथलीटों को अपने कीमती और बेहद नाजुक उपकरणों (पोल) को एक आम ई-रिक्शा में लादकर अपने होटल तक ले जाना पड़ा। सोशल मीडिया पर वायरल हुई यह तस्वीर हमारे खेल सिस्टम पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

1. नेशनल रिकॉर्ड बनाने के चंद घंटों बाद ई-रिक्शा में पोल ढोने को मजबूर हुए चैंपियंस

रांची में चल रहे एथलेटिक्स फेडरेशन कप के दौरान भोपाल के देव कुमार मीणा और उनके साथी एथलीट कुलदीप कुमार ने मैदान पर अपने प्रदर्शन से सबको हैरान कर दिया। दोनों ही खिलाड़ियों ने मेंस पोल वॉल्ट स्पर्धा में 5.45 मीटर की एक समान ऐतिहासिक छलांग लगाते हुए एक नया देव मीणा नेशनल रिकॉर्ड और संयुक्त रिकॉर्ड कायम किया।

मगर मैदान पर तिरंगा लहराने और देश के शीर्ष एथलीट बनने के कुछ ही समय बाद दोनों खिलाड़ियों को अपनी व्यवस्था खुद करनी पड़ी। खेल संघ या स्थानीय प्रशासन की तरफ से लॉजिस्टिक्स या वाहनों की कोई उचित व्यवस्था न होने के कारण, दोनों एथलीट करीब 15 फीट से भी लंबे अपने फाइबरग्लास पोल को एक छोटे से ई-रिक्शा में लादकर ले जाते हुए दिखाई दिए।

2. समान ऊंचाई की छलांग: देव मीणा को मिला गोल्ड, कुलदीप को सिल्वर

प्रतियोगिता के तकनीकी नियमों के अनुसार, भले ही दोनों एथलीटों ने 5.45 मीटर की एक समान ऊंचाई को पार किया था, लेकिन प्रयासों (Attempts) के आधार पर विजेता का फैसला किया गया।

एथलेटिक्स फेडरेशन कप में पोल से छलांग लगाते देव मीणा।

एथलेटिक्स फेडरेशन कप में पोल से छलांग लगाते देव मीणा।

समान ऊंचाई (5.45 मीटर) ➔ कम प्रयासों में क्लियर किया ➔ देव मीणा को मिला GOLD MEDAL
समान ऊंचाई (5.45 मीटर) ➔ अधिक प्रयासों में क्लियर किया ➔ कुलदीप कुमार को मिला SILVER MEDAL

चूंकि देव कुमार मीणा ने इस तय ऊंचाई को अपने साथी कुलदीप के मुकाबले कम प्रयासों में हासिल कर लिया था, इसलिए नियमानुसार देव मीणा को स्वर्ण पदक (गोल्ड) से नवाजा गया, जबकि कुलदीप कुमार को रजत पदक (सिल्वर) से संतोष करना पड़ा।

3. कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए किया क्वालिफाई, पर सिस्टम ने दिखाई बेरुखी {#section3}

इन दोनों खिलाड़ियों की यह छलांग इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि इसके साथ ही उन्होंने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में 23 जुलाई से आयोजित होने जा रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए आधिकारिक तौर पर क्वालिफाई कर लिया है।

तस्वीर ने खोली पोल: जो खिलाड़ी आने वाले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय मंच पर दुनिया के सामने भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रहे हैं, उनकी सुरक्षा और गरिमा को लेकर खेल विभागों का यह रवैया निराशाजनक है। ई-रिक्शा में पोल लादने की इस तस्वीर ने भारतीय खेल इंफ्रास्ट्रक्चर की जमीनी हकीकत को पूरी तरह उजागर कर दिया है।

4. पनवेल स्टेशन का वो कड़वा सच: जब TC ने पोल वॉल्टर्स को ट्रेन से नीचे उतारा

पनवेल ने TC ने देव मीणा और उनके साथ से बहस भी की थी

पनवेल ने TC ने देव मीणा और उनके साथ से बहस भी की थी।

खिलाड़ियों के साथ इस तरह का दुर्व्यवहार पहली बार नहीं हुआ है। इसी साल जब ये दोनों एथलीट ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में हिस्सा लेकर वापस लौट रहे थे, तो मुंबई के पनवेल स्टेशन पर तैनात एक टिकट कलेक्टर (TC) ने इन्हें बोगी में चढ़ने से रोक दिया था।

TC का तर्क था कि इतने लंबे पोल्स को यात्री बोगी के भीतर ले जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। काफी बहस और विवाद के बाद खिलाड़ियों को स्टेशन पर ही उतार दिया गया था। हालांकि, बाद में इस मामले के तूल पकड़ने पर मध्य प्रदेश के खेल मंत्री विश्वास सारंग ने हस्तक्षेप किया था और रेलवे अधिकारियों से बात कर एथलीटों के लिए विशेष अनुमति दिलाने का आश्वासन दिया था, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थितियां अब भी वैसी ही बनी हुई हैं।

5. कितने संवेदनशील और महंगे होते हैं फाइबरग्लास पोल?

स्पोर्ट्स एक्सपर्ट्स के अनुसार, पोल वॉल्ट स्पर्धा में इस्तेमाल होने वाले ये विशेष फाइबरग्लास पोल बेहद महंगे होने के साथ-साथ अत्यंत नाजुक और संवेदनशील होते हैं। इन पोल्स का संतुलन बहुत सटीक होता है:

  • रखरखाव में भारी सावधानी: परिवहन के दौरान इन पर थोड़ा सा भी अतिरिक्त दबाव या हल्का सा स्क्रैच (खरोंच) आने पर इनकी लाइफ खत्म हो सकती है, या छलांग लगाते समय इनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे खिलाड़ी को जानलेवा चोट लग सकती है।
  • सड़क पर खतरा: इन्हें एक खुले ई-रिक्शा में इस तरह असुरक्षित तरीके से ले जाना न सिर्फ खिलाड़ियों के करियर बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य वाहनों के लिए भी बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

6. कौन हैं भारत के उभरते हुए पोल-वॉल्टर देव मीणा?

मध्य प्रदेश के खातेगांव तहसील के एक छोटे से गांव सिल्फोड़खेड़ा के रहने वाले 19 वर्षीय देव कुमार मीणा देश के सबसे होनहार और उभरते हुए एथलीटों में से एक हैं। वे लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर खुद अपने ही रिकॉर्ड्स को तोड़ते आ रहे हैं:

  1. फरवरी 2025: उत्तराखंड नेशनल गेम्स में 5.32 मीटर की छलांग लगाकर सुर्खियां बटोरीं।
  2. अप्रैल 2025: नेशनल फेडरेशन सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 5.35 मीटर का नया रिकॉर्ड बनाया।
  3. मई 2026 (ताजा): अब रांची में 5.45 मीटर की ऐतिहासिक छलांग लगाकर उन्होंने देव मीणा नेशनल रिकॉर्ड को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। उनके कोच घनश्याम यादव का मानना है कि यदि उन्हें विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलें, तो वे ओलंपिक में भी भारत का नाम रोशन कर सकते हैं।

Abhishek Ranga is the founder and editor-in-chief of Sach Ka Samay News. With a commitment to journalistic integrity, he focuses on delivering accurate, unbiased, and real-time news to the public. He oversees the digital strategy and content management for the portal, ensuring that every story meets the highest standards of reporting