Dairy Mela Karnal: चन्नो गाय ने 78 लीटर दूध देकर जीता चैंपियन का खिताब, मुर्रा भैंस भी रही अव्वल; जानें सुनील मेहला की सफलता का राज

पशु मेले में विजेता गाय चन्नो

करनाल: हरियाणा की दूध नगरी कहे जाने वाले करनाल में एक बार फिर पशुपालकों ने अपनी मेहनत का लोहा मनवाया है। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI) में आयोजित दुग्ध प्रतियोगिता में झिंझाड़ी गांव की ‘चन्नो’ गाय ने रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन करते हुए सबको हैरान कर दिया। इस मेले में न केवल गायों बल्कि मुर्रा नस्ल की भैंसों ने भी अपनी दूध उत्पादन क्षमता से पशुपालकों का सिर फख्र से ऊंचा कर दिया।

🥇 चन्नो गाय का रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन

चन्नो गाय ने 78 लीटर दूध देकर जीता चैंपियन का खिताब

Dairy Mela Karnal की सबसे बड़ी आकर्षण झिंझाड़ी गांव के ‘सिल्लु और शैंकी डेयरी फार्म’ की चन्नो गाय रही। चन्नो ने 24 घंटे की दुग्ध प्रतियोगिता में कुल 77.977 किलोग्राम दूध देकर चैंपियन का खिताब अपने नाम किया। पशुपालक सुनील मेहला ने बताया कि चन्नो के अलावा उनकी चार अन्य गायों ने भी 75 लीटर से अधिक दूध देकर प्रतियोगिता में शीर्ष स्थान हासिल किए।

🐃 मुर्रा नस्ल में ‘बाणी’ भैंस बनी विजेता

सिर्फ गाय ही नहीं, हरियाणा की शान ‘मुर्रा’ भैंसों ने भी अपना दम दिखाया। झज्जर जिले के सुंदरेठी गांव के अजय कुमार की मुर्रा भैंस ‘बाणी’ ने 31.140 किलोग्राम दूध देकर अपनी श्रेणी में पहला स्थान प्राप्त किया। यह उपलब्धि मुर्रा नस्ल की बेहतर ब्रीडिंग का परिणाम मानी जा रही है।


🌟 सुनील मेहला: ग्रेजुएशन के बाद नौकरी छोड़ चुना पशुपालन

झिंझाड़ी के रहने वाले सुनील मेहला की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद सुनील ने किसी दफ्तर में नौकरी करने के बजाय अपने पारिवारिक व्यवसाय यानी पशुपालन को आधुनिक तरीके से आगे बढ़ाने का फैसला किया।

  • शुरुआत: उन्होंने 2014 में खुद की ब्रीडिंग शुरू की।
  • सफलता का ग्राफ: 2017 से वे लगातार विभिन्न पशु मेलों में हिस्सा ले रहे हैं और जीत हासिल कर रहे हैं।
  • पुराना रिकॉर्ड: पिछले साल उनकी गाय ‘सोनी’ ने 87.740 किलो दूध देकर एशिया का रिकॉर्ड बनाया था।

🧊 पशुओं की लग्जरी देखभाल: कूलर से लेकर स्प्रिंकलर तक

सुनील मेहला ने अपनी सफलता का श्रेय पशुओं की ‘VIP देखभाल’ को दिया है। उनके डेयरी फार्म पर:

  1. खान-पान: पशुओं को संतुलित आहार में साइलेज, हरा चारा, फीड और तूड़ी दी जाती है।
  2. आराम: गर्मियों में पशुओं को तनाव मुक्त रखने के लिए कूलर और स्प्रिंकलर सिस्टम (Sprinkler System) का उपयोग किया जाता है।
  3. आजादी: पशुओं के घूमने के लिए पर्याप्त खुली जगह दी गई है ताकि वे प्राकृतिक वातावरण में रह सकें।

💰 डेयरी व्यवसाय से शानदार आमदनी

सुनील मेहला के पास वर्तमान में 100 से ज्यादा पशु हैं, जिनमें ज्यादातर हॉल्स्टीन फ्रिसियन (HF) नस्ल की गायें हैं। वे अपना दूध ‘नेस्ले’ जैसी बड़ी कंपनियों को 38 से 40 रुपए प्रति लीटर के भाव पर बेचते हैं। उन्होंने बताया कि अच्छी ब्रीडिंग और सही प्रबंधन से न केवल घर के खर्च निकलते हैं, बल्कि एक मोटी बचत भी होती है।

🚫 बेचने के ऑफर्स ठुकराए

चन्नो और सोनी जैसी रिकॉर्ड बनाने वाली गायों को खरीदने के लिए सुनील को देशभर से कई ऑफर मिलते हैं, लेकिन वे इन्हें बेचने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि ये पशु उनके परिवार के सदस्य की तरह हैं और इनकी वजह से ही उनके गांव का नाम पूरे भारत में रोशन हुआ है।

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