नीट (NEET) पेपर लीक और देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक तहलका मचाने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) एक बार फिर देश की राजधानी में अपनी ताकत दिखाने की तैयारी में है। आगामी 20 जून को दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर पार्टी एक बार फिर बड़ा प्रदर्शन (Protest) करने जा रही है।
दिलचस्प बात यह है कि देश के 7 बड़े शहरों में हजारों युवाओं को सड़कों पर उतारने वाले इस संगठन का न तो कोई औपचारिक दफ्तर है और न ही कोई रजिस्टर्ड कड़े नियम। sachksameynews.in की इस विशेष खोजी रिपोर्ट में जानिए आखिर क्या है कॉकरोच जनता पार्टी का प्लान और कैसे सिर्फ फोन कॉल्स और चैट्स के जरिए यह पूरा आंदोलन ऑपरेट हो रहा है।
बिना ऑफिस और मीटिंग के कैसे चल रही है CJP?

आमतौर पर किसी भी राजनीतिक या सामाजिक आंदोलन को चलाने के लिए बड़े कार्यालयों, फंड और कोर कमेटी की बैठकों की जरूरत होती है। लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी की कार्यशैली इसके बिल्कुल उलट है।
इनफॉर्मल कॉरपोरेट स्ट्रक्चर: CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विजेता दहिया के मुताबिक, “हमारी कोई रजिस्टर्ड पार्टी या पारंपरिक कॉरपोरेट ढांचा नहीं है। यह पूरी तरह से एक इनफॉर्मल ग्रुप है। हम कोई औपचारिक मीटिंग्स नहीं करते, बल्कि आपस में फोन कॉल्स और चैट ग्रुप्स के जरिए ही सारे सुझाव लिए जाते हैं और रणनीतियां तय होती हैं।”
संगठन के विजन को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य विजन फाउंडर अभिजीत दीपके का ही है। किसी भी बड़े मूवमेंट या संगठन में हर छोटे फैसले के लिए फिल्म मेकर की तरह हर सीन पर वोटिंग नहीं कराई जा सकती, बल्कि सामूहिक समझ से फैसले होते हैं।
नेपाल और बांग्लादेश जैसा हिंसक आंदोलन नहीं करेगा भारत का युवा
हाल के दिनों में पड़ोसी देशों जैसे नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में युवाओं के उग्र आंदोलनों के बाद भारत के इस मूवमेंट की तुलना भी उनसे की जा रही थी। हालांकि, CJP ने इस पर अपना स्टैंड पूरी तरह साफ कर दिया है।

विजेता दहिया ने बताया कि, “हम बिल्कुल नहीं चाहते कि नेपाल या बांग्लादेश जैसी हिंसक परिस्थितियां भारत में पैदा हों। हमारा देश महात्मा बुद्ध और महात्मा गांधी की धरती है। हम पूरी तरह से शांति, अहिंसा और संवैधानिक दायरे में रहकर सत्याग्रह करना चाहते हैं। हमारा मकसद सिर्फ युवाओं के दिमाग में लोकतांत्रिक अधिकारों की भावना को जगाना है, चाहे वह शिक्षा का मुद्दा हो, स्वास्थ्य का हो या किसानों की एमएसपी (MSP) का।”
20 जून को जंतर-मंतर पर फिर से महाप्रोटेस्ट का ऐलान
6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर से अपने आंदोलन की शुरुआत करने वाली CJP अब तक पुणे, लखनऊ, अमृतसर, बेंगलुरु, जयपुर और नागपुर में सफल प्रदर्शन कर चुकी है। अब 20 जून को एक बार फिर जंतर-मंतर पर देश भर के छात्र जुटने वाले हैं।
- मुख्य मांग: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा।
- शर्त: आंदोलन में शामिल होने के लिए विपक्षी दलों या सत्ता पक्ष के कार्यकर्ताओं का स्वागत है, बशर्ते वे अपनी पार्टी का झंडा छोड़कर सिर्फ तिरंगे के साथ आएं।
- टोकनिज्म का विरोध: आंदोलन में महिलाओं और अल्पसंख्यकों की कम उपस्थिति पर प्रवक्ता ने कहा कि वे केवल दिखाने के लिए भीड़ नहीं जुटाना चाहते; महिलाएँ बैकएंड पर बतौर डिजाइनर और स्टेट कोऑर्डिनेटर बड़े पैमाने पर जुड़ी हुई हैं।
CJP के आंदोलन पर भाजपा (BJP) और राजनीतिक विशेषज्ञों का बड़ा दावा
जमीन पर भीड़ और आंदोलन के वास्तविक असर को लेकर सत्ता पक्ष और एक्सपर्ट्स की राय थोड़ी अलग नजर आ रही है:
| पक्ष | मुख्य दावा / ओपिनियन | वर्तमान स्थिति का विश्लेषण |
| भाजपा (BJP) सूत्र | आंदोलन का असर सिर्फ इंटरनेट तक सीमित है। | जमीनी स्तर पर बड़ी भीड़ न जुटने के कारण सरकार इसे बड़ा राजनीतिक खतरा नहीं मान रही। |
| प्रो. विजेंद्र सिंह चौहान (DU) | पुराने पैमानों से इस आंदोलन को नहीं आंका जा सकता। | यह आंदोलन मिडिल क्लास, अपर-मिडिल क्लास और जेन जी (Gen Z) युवाओं की हताशा को मजबूती से सामने ला रहा है। |
विशेषज्ञों का मानना है कि इस आंदोलन में अभी पूरे भारत के हर वर्ग के युवाओं को एक साथ लेकर चलने की विविधता या सांगठनिक क्षमता नहीं दिखाई दी है, लेकिन यह युवाओं के गुस्से को एक डिजिटल मंच देने में जरूर कामयाब रहा है।
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी छोड़ एआई (AI) और यूट्यूब से रिसर्च करें युवा
जयपुर में पिछले दिनों अभिजीत दीपके पर हुए थप्पड़ कांड और वैचारिक मतभेदों के कारण हो रहे हमलों पर CJP ने कड़ी नाराजगी जताई है। संगठन का कहना है कि किसी को उसके विचारों की वजह से डराना या हमला करना एक तरह का मानसिक आतंकवाद है।
प्रवक्ता विजेता दहिया ने देश के युवाओं से अपील करते हुए कहा कि आज के आधुनिक दौर में युवाओं के पास जेमिनाई (Gemini), चैटजीपीटी (ChatGPT) और यूट्यूब (YouTube) जैसे बेहतरीन साधन उपलब्ध हैं। युवाओं को भ्रामक सूचनाएं फैलाने वाली ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ से बाहर निकलकर खुद तथ्यों पर रिसर्च करनी चाहिए ताकि उनका ब्रेनवाश न हो सके और देश में कॉमन सेंस और लोकतंत्र की भावना बची रहे।
नीट परीक्षा और देशव्यापी छात्र आंदोलन से जुड़ी हर छोटी-बड़ी लाइव अपडेट के लिए हमारी वेबसाइट sachksameynews.in को लगातार विजिट करते रहें। शिक्षा व्यवस्था से जुड़े आधिकारिक सरकारी आदेशों के लिए आप Ministry of Education की वेबसाइट भी देख सकते हैं।


