नई दिल्ली, 25 जुलाई 2026: नीट (NEET) पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर देश की राजधानी के जंतर-मंतर पर चल रहा ऐतिहासिक छात्र आंदोलन आखिरकार शनिवार को समाप्त हो गया।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, डॉ. जितेंद्र सिंह और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ताओं सौरभ दास व आशुतोष रांका ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंदोलन खत्म होने का औपचारिक ऐलान किया।

🏛️ सरकार ने मानी CJP की तीनों मुख्य मांगें
CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि सरकार के साथ तीन दौर की वार्ता के बाद हमारी तीनों प्रमुख मांगों को केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया है:
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मोदी सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल में यह पहला मौका है जब किसी जन-आंदोलन के दबाव में किसी कैबिनेट मंत्री को पद छोड़ना पड़ा है।
- दर्ज FIR और केस वापस: प्रदर्शनकारी छात्रों पर 20 जुलाई के संसद मार्च और अन्य आयोजनों के दौरान दर्ज किए गए सभी 15-20 मुकदमे पूरी तरह वापस लिए जाएंगे।
- ₹1 करोड़ का मुआवजा: नीट पेपर लीक से आहत होकर जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों (मृतकों) के परिजनों को ₹1-1 करोड़ का सम्मानजनक मुआवजा दिया जाएगा।
🎤 संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में जेपी नड्डा और सौरव दास का वक्तव्य
- केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा: “आज CJP के प्रतिनिधियों के साथ सकारात्मक चर्चा हुई। सरकार ने उनकी मुख्य मांगों पर सहमति व्यक्त की है। परीक्षा सुधारों के लिए CJP द्वारा दिए गए 5 बिंदुओं वाले प्रस्ताव पर सरकार गहन चिंतन करेगी और 4 सप्ताह बाद पुनः बैठक आयोजित की जाएगी।”
- CJP प्रवक्ता सौरव दास: “हमारी लड़ाई विशुद्ध रूप से देश के भविष्य और बच्चों के न्याय के लिए थी। सरकार ने लिखित ड्राफ्ट पर मंगलवार तक हस्ताक्षर का आश्वासन दिया है। अब सभी साथी शांतिपूर्वक अपने घर लौट जाएं।”
🎉 जंतर-मंतर पर आतिशबाजी, जश्न और भावुक क्षण
जैसे ही जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और मांगें माने जाने की खबर पहुंची, पूरे परिसर में जयकारे गूंज उठे:
- प्रदर्शनकारी छात्रों ने राष्ट्रगान गाया और नीट पीड़ितों की याद में 2 मिनट का मौन रखा।
- CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमा पर शीश नवाया।
- इस्तीफे की पुष्टि होते ही पूरे देश भर से आए छात्र-छात्राएं ‘छात्र एकता जिंदाबाद’ के नारों के साथ ढोल-नगाड़ों पर झूमते नजर आए।
🗳️ राजनीतिक हलचल: “झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए”
- विपक्ष के नेता राहुल गांधी: “शाबाश देशभर के युवाओं! आप सभी की इस लोकतांत्रिक लड़ाई और अटूट एकजुटता पर पूरे देश को गर्व है।”
- बीजेपी का रुख: बीजेपी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि देशहित को सर्वोपरि रखते हुए धर्मेंद्र प्रधान का यह निर्णय सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही और ईमानदारी की मिसाल है।
⚖️ निष्कर्ष: देश के युवाओं की ऐतिहासिक मिसाल
36 दिनों तक चला यह आंदोलन साबित करता है कि जब देश का युवा एकजुट होकर शांतिपूर्ण और संवैधानिक मार्ग पर चलता है, तो बड़ी से बड़ी सत्ता को जवाबदेह बनना पड़ता है। जंतर-मंतर से अब सुरक्षाबल और छात्र अपने-अपने गंतव्य की ओर लौटने लगे हैं, लेकिन यह आंदोलन भारतीय शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलावों की नींव रख चुका है।
💬 आपकी क्या राय है?
क्या इस ऐतिहासिक जीत से भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक पर पूरी तरह रोक लग पाएगी?
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