बॉम्बे हाई कोर्ट ने FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे की कार्रवाई पर कड़ी फटकार लगाई। जानिए कौन हैं IAS तुकाराम मुंढे, क्यों हुई MCA और सिप्ला पर कार्रवाई और क्या है हाईकोर्ट के आदेश का सच।
Table of Contents
- बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी और पूरा मामला
- केस 1: मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) लाइसेंस सस्पेंशन
- केस 2: फार्मा दिग्गज सिप्ला (Cipla) का लाइसेंस रद्द
- कौन हैं IAS तुकाराम मुंढे? बीड के गांव से ऑल इंडिया रैंक-20 का सफर
- करियर के प्रमुख एक्शन: ‘महाराष्ट्र का वॉटरमैन’ से FDA कमिश्नर तक
- भारत में फूड सेफ्टी के आंकड़े और मुंढे का ‘क्विक एक्शन’ मॉडल
बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी और पूरा मामला
महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर और 2005 बैच के IAS तुकाराम मुंढे अपने त्वरित और कड़े फैसलों के लिए जाने जाते हैं। पदभार संभालने के महज 3 महीनों के भीतर उन्होंने 1,100 से अधिक छापों की अगुवाई की और 165 लाइसेंस सस्पेंड किए। हालांकि, हाल ही में दो बड़े मामलों में बॉम्बे हाई कोर्ट ने FDA के फैसलों को रद्द करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया।
चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखड की बेंच ने सुनवाई के दौरान FDA के अड़ियल रवैये को देखते हुए तीखी टिप्पणी की:
“मच्छर को तलवार से मत मारो। क्या आप खुद को लॉर्ड समझते हैं कि कुछ भी कर सकते हैं?”
कोर्ट की इस सख्ती का मुख्य कारण FDA द्वारा ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट’ (FSSAct) की तय कानूनी प्रक्रियाओं और प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के नियमों की अनदेखी करना था।
केस 1: मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) लाइसेंस सस्पेंशन
20 अगस्त को FDA ने BKC स्थित मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के 5 आउटलेट्स पर इंस्पेक्शन के बाद FSSAI लाइसेंस सस्पेंड कर दिए थे।
- कानूनी खामी: FSS Act की धारा 32 के तहत कमियों को दूर करने के लिए पहले ‘इम्प्रूवमेंट नोटिस’ दिया जाना चाहिए था, जो नहीं दिया गया।
- स्कोरिंग रिपोर्ट में लापरवाही: निरीक्षण रिपोर्ट में मानक स्कोर दर्ज नहीं किए गए थे।
- अदालत का रुख: दोबारा इंस्पेक्शन में जब 88% कंप्लायंस मिला, तब भी FDA ने नए तकनीकी आधार (ऑपरेटर का नाम) पर सस्पेंशन हटाने से मना किया। कोर्ट ने इस जल्दबाजी को अवमानना की श्रेणी में मानते हुए आदेश रद्द कर दिया।
केस 2: फार्मा दिग्गज सिप्ला (Cipla) का लाइसेंस रद्द
पुणे स्थित सिप्ला यूनिट में रिकॉर्ड्स और स्टोरेज की विसंगतियों के आधार पर FDA ने सुनवाई के तुरंत बाद सेल्स लाइसेंस कैंसिल कर दिया।
| पैमाना | सिप्ला केस में FDA का रुख | हाई कोर्ट की टिप्पणी |
| कारण | पैकेजिंग व खरीद-बिक्री रिकॉर्ड्स में गड़बड़ी | दवाओं की सुरक्षा/गुणवत्ता पर कोई खतरा नहीं दर्शाया गया |
| कार्रवाई | एक ही दिन में सेल्स लाइसेंस रद्द करना | अधिकारों का दुरुपयोग और ‘लिमिट क्रॉस’ करना |
| परिणाम | FDA को आदेश वापस लेना पड़ा | नया नोटिस जारी कर वैधानिक सुनवाई का निर्देश |
कौन हैं IAS तुकाराम मुंढे? बीड के गांव से ऑल इंडिया रैंक-20 का सफर

तुकाराम मुंढे ने अपने चौथे प्रयास में UPSC की परीक्षा पास की।
तुकाराम मुंढे का जन्म 3 जून 1975 को महाराष्ट्र के बीड जिले के सूखाग्रस्त गांव ताडसोन्ना में हुआ था।
- प्रारंभिक संघर्ष: किसान परिवार में पले-बढ़े मुंढे बचपन में अपने पोलियोग्रस्त भाई को कंधे पर उठाकर बिना चप्पल स्कूल जाते थे और रात में खेतों की सिंचाई करते थे।
- शिक्षा व UPSC: औरंगाबाद से बी.ए. में टॉप करने के बाद, उन्होंने सिविल सर्विसेज की तैयारी की। 2005 में अपने चौथे प्रयास में उन्होंने UPSC ऑल इंडिया रैंक (AIR) 20 हासिल की।
करियर के प्रमुख एक्शन: ‘महाराष्ट्र का वॉटरमैन’ से FDA कमिश्नर तक

तुकाराम मुंढे को साल 2015-16 में ‘बेस्ट कलेक्टर’ का अवॉर्ड मिला था।
तुकाराम मुंढे का 21 साल का सेवाकाल कड़े फैसलों और 25 से अधिक बार हुए तबादलों के लिए जाना जाता है:
- सोलापुर (2014-16): वॉटर टैंकर माफियाओं पर शिकंजा कसा। 673 टैंकरों की जरूरत को घटाकर महज 40 पर ला दिया, जिससे उन्हें ‘महाराष्ट्र का वॉटरमैन’ और बेस्ट कलेक्टर अवॉर्ड मिला।
- नवी मुंबई व नागपुर (2016-20): ‘वॉक विद कमिश्नर’ अभियान से जनशिकायतें सुनीं। फिजूलखर्ची वाले प्रोजेक्ट्स रद्द किए और ठेकेदारों की मनमानी पर रोक लगाई।
- हेल्थ डिपार्टमेंट (2022): सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया।
भारत में फूड सेफ्टी के आंकड़े और मुंढे का ‘क्विक ACTION’ मॉडल
भारत में खाद्य सुरक्षा की स्थिति काफी चिंताजनक है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 5 सालों में जांचे गए 8.8 लाख सैंपल्स में से लगभग 20% (1.85 लाख) घटिया या असुरक्षित पाए गए। CAG की रिपोर्ट बताती है कि 10 राज्यों में फूड सेफ्टी ऑफिसर्स के आधे से ज्यादा पद खाली हैं।
तुकाराम मुंढे का FDA एक्शन प्लान:
- क्विक कॉमर्स पर नकेल: Blinkit और Instamart के वेयरहाउसेज पर कार्रवाई कर 14 लाइसेंस सस्पेंड किए।
- भ्रामक विज्ञापन: पान मसाला प्रमोशन के मामले में बॉलीवुड स्टार्स (शाहरुख खान, अजय देवगन, टाइगर श्रॉफ) को नोटिस भेजा।
- सख्त नीतियां: रेस्टोरेंट्स में अनिवार्य रूप से मुफ्त साफ पानी देना और मिलावटी/एनालॉग पनीर पर 1 साल का बैन।
निष्कर्ष
IAS तुकाराम मुंढे की सख्त कार्यशैली ने उपभोक्ताओं के बीच खाद्य सुरक्षा को लेकर एक नई उम्मीद जगाई है। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट का यह फैसला यह स्पष्ट करता है कि विधि के शासन (Rule of Law) में प्रशासनिक सख्ती को भी तय कानूनी सीमाओं, प्रक्रियाओं और प्राकृतिक न्याय के दायरे में ही लागू किया जाना चाहिए।




