Bihar Jamui Assault Case ने पूरे देश में भारी आक्रोश फैला दिया है, जब एक दिल देहलाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। बिहार के जमुई जिले में 10वीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा से सारेआम छेड़छाड़ की गई और उसके दोस्त के साथ बेरहमी से मारपीट की गई।
विषय सूची (Table of Contents)
- Bihar Jamui Assault Case: जमुई घटना का पूरा सच
- वायरल वीडियो और पुलिस की त्वरित कार्रवाई
- राजनीतिक बयानबाजी और विवादित बयान
- कानूनी धाराएं और 32 सोशल मीडिया खातों पर एक्शन
- राष्ट्रीय महिला आयोग और विपक्ष का कड़ा रुख
Bihar Jamui Assault Case: जमुई घटना का पूरा सच

Bihar Jamui Assault Case की यह घटना 19 सितंबर को उस समय घटी जब कोचिंग पढ़कर लौट रहे दो स्कूली छात्र-छात्राएं जमुई में फोटो खींचने गए थे। स्थानीय बदमाशों के एक समूह ने दोनों नाबालिगों को घेर लिया और उनके साथ दुर्व्यवहार शुरू कर दिया।
सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि छात्र लगातार मिन्नतें कर रहा है, लेकिन आरोपी उसे थप्पड़ मारते हैं और कॉलर पकड़कर खींचते हैं। वहीं, छात्रा से सरेआम अश्लील हरकतें की जाती हैं।
| विवरण | घटना से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी |
| घटना स्थल | जमुई जिला, बिहार |
| पीड़ित | 10वीं कक्षा के दो नाबालिग छात्र-छात्राएं |
| मुख्य धाराएं | पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और बीएनएस की सख्त धाराएं |
| कार्रवाई | 3 नाबालिग आरोपी गिरफ्तार, एसआईटी (SIT) गठित |
वायरल वीडियो और पुलिस की त्वरित कार्रवाई
घटना के समय पीड़ितों ने डर के मारे पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। हालांकि, सोमवार को वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने गाड़ियों के नंबर के आधार पर बच्चों का पता लगाया और केस दर्ज किया।
जमुई पुलिस प्रमुख विश्वजीत दयाल के अनुसार, पीड़िता की लिखित शिकायत के बाद पोक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन नाबालिग आरोपियों को गिरफ्तार किया है और दो अन्य संदिग्धों की पहचान कर ली है।
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राजनीतिक बयानबाजी और विवादित बयान
Bihar Jamui Assault Case के तूल पकड़ने के बाद राज्य सरकार के मंत्रियों के बयानों ने विवाद को और बढ़ा दिया। बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने इसे “इक्का-दुक्का घटना” करार दिया, जिससे जनता में भारी नाराजगी देखने को मिली।
- विपक्ष का हमला: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस घटना को पुरुषसत्तात्मक मानसिकता का उदाहरण बताया।
- तेजस्वी यादव का बयान: बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य में महिला सुरक्षा के दावों पर सवाल उठाए।
- स्थानीय विधायक की प्रतिक्रिया: जमुई से विधायक श्रेयसी सिंह ने घटना पर शर्मिंदगी जताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
कानूनी धाराएं और 32 सोशल मीडिया खातों पर एक्शन
![Bihar Police Senior Officer statement on Jamui Assault Case]](https://sachkasameynews.in/wp-content/uploads/2026/09/images-46.jpg)
पुलिस ने इस मामले में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) के अलावा महिला की लज्जा भंग करने और मारपीट से जुड़ी कई गंभीर आपराधिक धाराएं लगाई हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, पीड़ित बच्चों की पहचान उजागर करने और घटना का वीडियो वायरल करने वाले 32 सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
राष्ट्रीय महिला आयोग और विपक्ष का कड़ा रुख
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने बिहार पुलिस से पूरी रिपोर्ट मांगी है और निर्देश दिया है कि वीडियो का प्रसार तुरंत रोका जाए ताकि पीड़ित बच्ची की प्राइवेसी बनी रहे।
निष्कर्ष: इस भयावह घटना ने एक बार फिर समाज में नैतिक पुलिसिंग (Moral Policing) और महिलाओं की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि बाकी बचे आरोपियों को जल्द ही कानून के दायरे में लाया जाएगा।
पोक्सो एक्ट (POCSO Act – Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012) भारत में बच्चों को यौन उत्पीड़न, यौन शोषण और पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया एक विशेष और सख्त कानून है।
यह कानून 14 नवंबर 2012 को लागू किया गया था। इस कानून की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जेंडर-न्यूट्रल (Gender-Neutral) है, यानी यह लड़कों और लड़कियों दोनों को समान रूप से सुरक्षा प्रदान करता है।
1. पोक्सो एक्ट की मुख्य विशेषताएं
- बालक की परिभाषा: इस कानून के तहत 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति को ‘बच्चा’ माना गया है।
- सहमति का कोई महत्व नहीं: 18 वर्ष से कम उम्र में शारीरिक संबंध के मामलों में कानूनन ‘सहमति’ (Consent) का कोई मतलब नहीं होता।
- समयबद्ध न्याय: पोक्सो मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट (Special Courts) बनाए जाते हैं। इस कानून के तहत घटना के 1 साल के भीतर मामले का निपटारा करने का प्रावधान है।
- बच्चे के अनुकूल माहौल: पुलिस या अदालत में बच्चे से पूछताछ के दौरान उसे मानसिक तनाव न हो, इसके लिए पुलिस को सादे कपड़ों में होना जरूरी है और बच्चे को बार-बार कोर्ट नहीं बुलाया जाता।
2. पोक्सो एक्ट के तहत मुख्य अपराध और सजा के प्रावधान
पोक्सो कानून में अपराध की गंभीरता के हिसाब से कड़े दंड तय किए गए हैं। 2019 में इस कानून में संशोधन करके सजा को और अधिक सख्त बना दिया गया है:
1. गंभीर यौन हमला (Aggravated Penetrative Sexual Assault – Section 5 & 6)
- क्या है: यदि कोई व्यक्ति (जैसे पुलिसकर्मी, सरकारी कर्मचारी, शिक्षक, रिश्तेदार या भरोसेमंद व्यक्ति) बच्चे के साथ गंभीर यौन शोषण करता है या 12 साल से कम उम्र के बच्चे के साथ दुष्कर्म करता है।
- सजा: कम से कम 20 साल की जेल, जिसे बढ़ाकर आजीवन कारावास (उम्रकैद) या मृत्युदंड (फांसी की सजा) तक किया जा सकता है। साथ ही जुर्माना भी लगाया जाता है।
2. यौन हमला (Penetrative Sexual Assault – Section 3 & 4)
- क्या है: बच्चे के साथ किसी भी प्रकार का जबरन शारीरिक/यौन संबंध बनाना।
- सजा: कम से कम 10 साल की कठोर जेल, जिसे बढ़ाकर उम्रकैद तक किया जा सकता है और जुर्माना।
3. यौन उत्पीड़न (Sexual Assault – Section 7 & 8)
- क्या है: बिना संबंध बनाए बच्चे को गलत इरादे से छूना या शारीरिक संपर्क बनाना।
- सजा: कम से कम 3 साल की जेल, जिसे 5 साल तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना।
4. यौन उत्पीड़न/इशारे करना (Sexual Harassment – Section 11 & 12)
- क्या है: बच्चे को गलत तरीके से देखना, अश्लील बातें बोलना, सीटी बजाना, अपने शरीर के अंग दिखाना या पीछा करना।
- सजा: 3 साल तक की जेल और जुर्माना।
5. चाइल्ड पोर्नोग्राफी (Child Pornography – Section 14 & 15)
- क्या है: बच्चों के अश्लील फोटो या वीडियो बनाना, उन्हें स्टोर करना, शेयर करना या इंटरनेट पर देखना।
- सजा:
- पहली बार स्टोर करने/देखने पर: जुर्माना या 1 साल तक की सजा।
- व्यवसाय/शेयर करने के इरादे से रखने पर: 3 से 5 साल की जेल और जुर्माना।
3. रिपोर्ट दर्ज न कराने पर भी सजा का प्रावधान (Section 21)
पोक्सो एक्ट की धारा 21 के तहत यदि किसी व्यक्ति (जैसे डॉक्टर, शिक्षक, पड़ोसी या रिश्तेदार) को किसी बच्चे के साथ हो रहे यौन अपराध की जानकारी मिलती है, तो उसकी रिपोर्ट पुलिस को देना अनिवार्य है।
यदि कोई व्यक्ति जानकारी होने के बावजूद रिपोर्ट दर्ज नहीं कराता या मामले को छुपाता है, तो उसे 6 महीने से 1 साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है।




