AAP ने राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाया; अशोक मित्तल संभालेंगे राज्यसभा में कमान

AAP ने राघव चड्ढा को पद से हटाया: क्या पार्टी में मची है रार? अशोक मित्तल होंगे राज्यसभा में नए उपनेता

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर एक बड़ा राजनीतिक फेरबदल देखने को मिला है। गुरुवार को पार्टी ने अपने कद्दावर नेता और पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता (Deputy Leader) पद से मुक्त कर दिया है। उनकी जगह अब जाने-माने उद्योगपति और सांसद अशोक मित्तल सदन में पार्टी की कमान संभालेंगे।

पार्टी ने इस संबंध में राज्यसभा सचिवालय को आधिकारिक पत्र लिखकर सूचित किया है। हैरानी की बात यह है कि इस पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अब सदन में राघव चड्ढा को पार्टी की तरफ से बोलने का समय न दिया जाए।



राघव चड्ढा की छुट्टी: आखिर क्या है कारण?

आम आदमी पार्टी (AAP) ने अचानक लिए गए इस फैसले के पीछे कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राघव चड्ढा पिछले कुछ समय से पार्टी की गतिविधियों से दूर नजर आ रहे थे। साल 2022 में पंजाब से राज्यसभा पहुंचे राघव का कार्यकाल 2028 तक है, लेकिन उपनेता के पद से हटाए जाने को उनके कद में कटौती के रूप में देखा जा रहा है।


कौन हैं अशोक मित्तल: AAP के नए उपनेता

अशोक मित्तल

AAP ने अब राज्यसभा में उपनेता की जिम्मेदारी अशोक मित्तल को सौंपी है। अशोक मित्तल न केवल एक सफल राजनेता हैं, बल्कि शिक्षा और व्यापार जगत का भी बड़ा नाम हैं।

  • पृष्ठभूमि: वे जालंधर के रहने वाले हैं और देश की प्रसिद्ध ‘लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी’ (LPU) के संस्थापक और चांसलर हैं।
  • बिज़नेस: उनका परिवार ‘लवली ग्रुप’ का मालिक है, जो ऑटोमोबाइल और मिठाई (लवली स्वीट्स) के क्षेत्र में काफी लोकप्रिय है।
  • संसदीय अनुभव: मित्तल 2022 में राज्यसभा सांसद बने थे और अब वे सदन में पार्टी की मुख्य आवाज होंगे।

राघव चड्ढा के चर्चित मुद्दे: जनता की आवाज बने सांसद

भले ही AAP ने उन्हें पद से हटा दिया हो, लेकिन पिछले दो संसदीय सत्रों में राघव चड्ढा ने आम आदमी से जुड़े कई क्रांतिकारी मुद्दे उठाए थे, जिनकी सोशल मीडिया पर काफी तारीफ हुई थी।

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पांच दिसंबर को राघव चड्‌ढा ने गिग वर्कर्स का मामला संसद में उठाया था

1. गिग वर्कर्स की सुरक्षा: चड्ढा ने जोमैटो, स्विगी और ब्लिंकिट जैसे डिलीवरी पार्टनर्स के कम वेतन और 10-मिनट डिलीवरी मॉडल के खिलाफ आवाज उठाई थी। 2. मोबाइल रिचार्ज का गणित: उन्होंने मांग की थी कि मोबाइल रिचार्ज 28 दिन के बजाय पूरे कैलेंडर महीने (30 या 31 दिन) का होना चाहिए। 3. बैंक पेनल्टी और टैक्स: मिनिमम बैलेंस न रखने पर लगने वाले जुर्माने को खत्म करने और शादीशुदा जोड़ों के लिए ‘जॉइंट इनकम टैक्स फाइलिंग’ की वकालत भी उन्होंने की थी। 4. एयरपोर्ट पर सस्ता खाना: उन्होंने राज्यसभा में प्रस्ताव रखा था कि एयरपोर्ट के डिपार्चर एरिया में यात्रियों के लिए किफायती कैफे होने चाहिए।


पार्टी से बढ़ती दूरियों की अटकलें

जानकारों का मानना है कि AAP और राघव चड्ढा के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। फरवरी में जब दिल्ली शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल को राहत मिली थी, तब भी राघव की तरफ से कोई बयान नहीं आया था। पार्टी के कार्यक्रमों में उनकी अनुपस्थिति अब एक बड़े विवाद का रूप ले रही है।


AAP की भविष्य की रणनीति

1. राज्यसभा सचिवालय को सख्त निर्देश

AAP ने केवल पद से ही नहीं हटाया, बल्कि सचिवालय को भेजे पत्र में यह भी साफ़ कर दिया है कि अब राघव चड्ढा को पार्टी के कोटे से आवंटित होने वाले ‘स्पीकिंग स्लॉट’ (बोलने का समय) न दिया जाए। इसका मतलब है कि अब राघव राज्यसभा में पार्टी की तरफ से आधिकारिक बयान नहीं दे पाएंगे। यह किसी भी सांसद के लिए एक बड़ा झटका माना जाता है।

2. लंदन यात्रा और ‘विदेशी’ विवाद

सूत्रों का मानना है कि राघव चड्ढा की पिछले कुछ महीनों की विदेशी यात्राओं और उनकी लंबी अनुपस्थिति ने पार्टी हाईकमान को नाराज किया है। जब दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेता जेल में थे या कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे, तब राघव की गैर-मौजूदगी पर AAP के अंदरूनी हलकों में सवाल उठे थे।

3. अशोक मित्तल का ‘इमेज बिल्डर’ अवतार

अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी देने के पीछे AAP की मंशा राज्यसभा में अधिक संतुलित और पेशेवर दिखने की है। मित्तल एक शांत छवि वाले उद्योगपति हैं और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के जरिए उनकी पकड़ युवाओं और शिक्षा जगत में काफी मजबूत है। पार्टी को लगता है कि वे सदन में डेटा और फैक्ट्स के साथ बेहतर तरीके से बात रख सकेंगे।

4. सोशल मीडिया पर राघव की लोकप्रियता बनी चुनौती?

राघव चड्ढा ने ‘मोबाइल रिचार्ज’ और ‘बैंक पेनल्टी’ जैसे जो मुद्दे उठाए, वे सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि क्या राघव की व्यक्तिगत लोकप्रियता पार्टी के मूल एजेंडे से बड़ी होने लगी थी? पार्टी अक्सर ‘व्यक्ति पूजा’ के बजाय ‘संगठन’ को महत्व देने की बात करती है, ऐसे में यह फेरबदल एक संदेश हो सकता है।

राघव का अगला कदम क्या होगा?

वर्तमान में राघव चड्ढा पंजाब से सांसद हैं, लेकिन पार्टी के इस सख्त रवैये के बाद अब उनकी भविष्य की भूमिका पर सस्पेंस बना हुआ है। क्या वे वापस मुख्यधारा में लौटेंगे या पार्टी से उनकी दूरियां और बढ़ेंगी, यह आने वाले कुछ हफ़्तों में साफ़ हो जाएगा।

राघव चड्ढा को पद से हटाना AAP की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है या फिर यह अंदरूनी कलह का नतीजा। अशोक मित्तल जैसे शांत और प्रभावशाली व्यक्तित्व को आगे लाकर पार्टी राज्यसभा में अपनी छवि को नए सिरे से गढ़ने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि राघव चड्ढा का अगला कदम क्या होता है।

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