तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और अमित शाह की मुलाकात के बाद परिसीमन मुद्दे पर नया मोड़। जानिए विजय के बयान में आए बदलाव के क्या हैं राजनीतिक मायने।
Table of Contents
- अमित शाह और सीएम विजय की मुलाकात के बाद नया मोड़
- परिसीमन के मुद्दे पर क्या बदला सीएम विजय का रुख?
- 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में उठा सवाल
- कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की मांग
- दक्षिण भारतीय राज्यों की मुख्य चिंता और तर्क
अमित शाह और सीएम विजय की मुलाकात के बाद नया मोड़
तमिलनाडु की राजनीति में परिसीमन (Delimitation) के मुद्दे पर बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मामल्लपुरम में आयोजित 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। बैठक से ठीक पहले अमित शाह और मुख्यमंत्री विजय के बीच मुलाकात हुई थी, जिसके बाद से ही उनके राजनीतिक रुख को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुलाकात के बाद परिसीमन प्रक्रिया को लेकर तमिलनाडु के रुख में एक सूक्ष्म बदलाव देखा गया है। जहां पहले इस प्रक्रिया का पूरी तरह विरोध किया जा रहा था, वहीं अब प्रतिनिधित्व के प्रतिशत को सुरक्षित रखने की बात कही जा रही है।
परिसीमन के मुद्दे पर क्या बदला सीएम विजय का रुख?
12 अगस्त को तमिलनाडु विधानसभा में पेश किए गए प्रस्ताव में परिसीमन की योजना का कड़ा विरोध किया गया था और मांग की गई थी कि संसद में लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या को यथावत रखा जाए। हालांकि, दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने एक नया दृष्टिकोण सामने रखा।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को यह स्पष्ट गारंटी देनी चाहिए कि परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण में सफलता प्राप्त करने के कारण किसी भी राज्य का संसद में मौजूदा प्रतिनिधित्व प्रतिशत कम नहीं होना चाहिए। इस बयान से संकेत मिलता है कि अब ध्यान सीटों की संख्या के बजाय संसद में कुल सीटों के अनुपात में राज्यों की हिस्सेदारी को बनाए रखने पर केंद्रित हो रहा है।
31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में उठा सवाल
मामल्लपुरम में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री विजय ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों के आवंटन पर लगी रोक की अवधि अब समाप्त होने की दिशा में है और परिसीमन 2026 की तैयारियां चर्चा में हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि मुख्य रूप से जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन किए जाने से संसद में दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक आवाज कमजोर होने की वास्तविक और साझी चिंता बनी हुई है। इसलिए केंद्र सरकार को सभी पक्षों को विश्वास में लेकर कदम उठाना चाहिए।
कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की मांग
परिसीमन के मुद्दे पर दक्षिणी राज्यों के बीच रुख में कुछ अंतर भी देखा जा रहा है। एक तरफ जहां तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधित्व के प्रतिशत की गारंटी की मांग की, वहीं कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अधिक सख्त रुख अपनाया।
डीके शिवकुमार ने केंद्र सरकार के समक्ष मांग रखी कि अगले 25 वर्षों तक लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या में कोई बदलाव न किया जाए और इसे स्थिर रखा जाए। उनका तर्क है कि जनसंख्या नियंत्रण अभियानों को सफलतापूर्वक लागू करने वाले राज्यों को इसका राजनीतिक नुकसान नहीं होना चाहिए।
दक्षिण भारतीय राज्यों की मुख्य चिंता और तर्क
दक्षिण भारत के राज्यों का मानना है कि उन्होंने बीते दशकों में परिवार नियोजन, मानव विकास सूचकांक (HDI) और आर्थिक वृद्धि के क्षेत्रों में देश में अग्रणी भूमिका निभाई है। यदि परिसीमन केवल वर्तमान जनसंख्या के आधार पर होता है, तो जिन राज्यों की जनसंख्या तेजी से बढ़ी है, उन्हें अधिक सीटें मिल सकती हैं और बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों का प्रतिनिधित्व घट सकता है।
मुख्यमंत्री विजय ने भी इस बात को रेखांकित करते हुए कहा कि ये उपलब्धियां राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की सफलता की कहानी हैं। इस सफलता के कारण किसी भी राज्य के लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व में कमी नहीं आनी चाहिए।
निष्कर्ष
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की मुलाकात के बाद परिसीमन विवाद में चर्चा का दायरा बदल गया है। हालांकि, दक्षिणी राज्यों की मुख्य चिंता अभी भी वही है कि जनसांख्यिकी नियंत्रण के सकारात्मक प्रयासों का असर उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर न पड़े। आने वाले समय में केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया से ही इस मुद्दे का भावी रुख तय होगा।
- दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठकों से जुड़ी जानकारी के लिए Ministry of Home Affairs Official Portal पर जाएं।
- तमिलनाडु सरकार के आधिकारिक बयानों के लिए Tamil Nadu Government Portal देखें।
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