कहते हैं कि अगर हौसलों में जान हो और मेहनत में ईमानदारी, तो एक छोटे से शहर और साधारण परिवार से निकला लड़का भी देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक को पास कर इतिहास रच सकता है। कुछ ऐसी ही प्रेरणादायी कहानी सामने आई है करनाल से, जहां एक सीधे-सादे लड़के दीपांशू तिवारी ने इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) द्वारा आयोजित सीए फाइनल (CA Final) की परीक्षा को सफलतापूर्वक पास कर लिया है।
अब वे सिर्फ दीपांशू नहीं, बल्कि सीए दीपांशू तिवारी (CA Dipanshu Tiwari) बन चुके हैं। sachksameynews.in की इस खास रिपोर्ट में जानिए उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव से लेकर करनाल की ‘रीस्टार्ट लाइब्रेरी’ और फिर ‘सीए’ बनने तक का उनका यह भावुक और संघर्षपूर्ण सफर।
टेबल ऑफ कंटेंट (Table of Content)
- छोटे से गांव से सीए बनने तक का शुरुआती सफर
- जब परीक्षा की तैयारी के लिए चुनी ‘रीस्टार्ट लाइब्रेरी’
- रिजल्ट से पहले की वो रात: ‘2 दिन से उड़ गई थी नींद’
- हाथ कांप रहे थे, साइट क्रैश हुई और फिर निकले खुशी के आंसू
- मां को गले लगाकर रो पड़े दीपांशू— ‘मां, मैं सीए बन गया!’
- सफलता के बाद ‘रीस्टार्ट लाइब्रेरी’ में बांटी मिठाई, बढ़ाया छात्रों का मनोबल
छोटे से गांव से सीए बनने तक का शुरुआती सफर

दीपांशू तिवारी का जन्म उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के एक छोटे से गांव सहरी इस्लामपुर में हुआ था। हालांकि, उनका पालन-पोषण और पूरी पढ़ाई-लिखाई हरियाणा के करनाल शहर में हुई। दीपांशू बचपन से ही पढ़ाई में होनहार थे:
- 10वीं कक्षा: एस.डी. सीनियर सेकेंडरी स्कूल, करनाल से 80% अंकों के साथ पास की।
- 12वीं कक्षा: विवेकानंद सीनियर सेकेंडरी स्कूल, करनाल से 92% अंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
इसके बाद उन्होंने कॉमर्स फील्ड की सबसे प्रतिष्ठित और मुश्किल मानी जाने वाली चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) की राह चुनी। उन्होंने 54% अंकों के साथ सीए फाउंडेशन और 56% अंकों के साथ सीए इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। अपनी पढ़ाई के दौरान उन्होंने नोएडा की जानी-मानी फर्म ‘सिंघी एंड कंपनी’ (Singhi & Co.) से अपनी आर्टिकल्सिप ट्रेनिंग पूरी की, जहां उन्हें कॉर्पोरेट जगत का व्यावहारिक अनुभव मिला।
जब परीक्षा की तैयारी के लिए चुनी ‘रीस्टार्ट लाइब्रेरी’
सीए फाइनल की तैयारी को देश में यूपीएससी (UPSC) जितनी ही कठिन माना जाता है। इस अंतिम और सबसे मुश्किल पड़ाव को पार करने के लिए दीपांशू को एक शांत और बेहतर माहौल की जरूरत थी, जिसके लिए उन्होंने करनाल की प्रसिद्ध ‘रीस्टार्ट लाइब्रेरी’ (Restart Library) को जॉइन किया।
कड़ी मेहनत का शेड्यूल: ‘रीस्टार्ट लाइब्रेरी’ के अनुशासित माहौल में दीपांशू ने खुद को पूरी तरह पढ़ाई में झोंक दिया। वे यहां रोजाना बिना थके 8 से 9 घंटे की कड़ी सेल्फ-स्टडी किया करते थे। लाइब्रेरी का सकारात्मक माहौल और उनका खुद का दृढ़ संकल्प ही उनकी इस सफलता की सबसे मजबूत नींव बना।
रिजल्ट से पहले की वो रात: ‘2 दिन से उड़ गई थी नींद’
जैसे-जैसे रिजल्ट की तारीख नजदीक आ रही थी, दीपांशू के दिल की धड़कनें बढ़ती जा रही थीं। दीपांशू बताते हैं कि रिजल्ट आने से पहले के 2 दिनों से उन्हें रात को नींद तक नहीं आ रही थी। मन में बार-बार बस यही सवाल आ रहा था कि इतनी रातों की जागकर की गई मेहनत का नतीजा क्या रहेगा। यह वो मानसिक दबाव था, जिससे हर गंभीर छात्र परीक्षा के अंतिम दौर में गुजरता है।
हाथ कांप रहे थे, साइट क्रैश हुई और फिर निकले खुशी के आंसू
आखिरकार वह ऐतिहासिक तारीख आई— 18 जून, दोपहर के ठीक 12 बजे। आईसीएआई ने सीए फाइनल का रिजल्ट लाइव कर दिया। दीपांशू लैपटॉप के सामने बैठे थे, डर और उम्मीद के बीच उनके हाथ कांप रहे थे।
तभी अचानक एक पल ऐसा आया जब अत्यधिक ट्रैफिक के कारण आईसीएआई (ICAI) की आधिकारिक वेबसाइट थोड़ी देर के लिए क्रैश हो गई। उस कुछ मिनट के क्रैश ने दीपांशू के मन में कई शंकाएं पैदा कर दीं— उन्हें लगा कि शायद रिजल्ट अभी आया नहीं है, या फिर कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं हो गई? लेकिन जैसे ही दोबारा पेज खुला और स्क्रीन पर ‘PASSED’ लिखा आया, दीपांशू अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए। सालों का संघर्ष एक पल में सफल हो चुका था।
मां को गले लगाकर रो पड़े दीपांशू— ‘मां, मैं सीए बन गया!’

रिजल्ट देखते ही दीपांशू तुरंत दौड़कर अपनी माता जी के पास पहुंचे और उन्हें जोर से गले लगाकर फूट-फूटकर रोने लगे। मां अचानक बेटे को इस तरह लगातार रोता देख घबरा गईं कि पता नहीं क्या हुआ है। लेकिन जैसे ही दीपांशू ने सिसकियों के बीच हल्के से कहा— “मां, मैं सीए बन गया हूँ!”, तो मां की आंखों से भी खुशी के आंसू छलक पड़े। एक मां के लिए अपने बच्चे की बरसों की कड़ी मेहनत को इस तरह रंग लाते देखना जिंदगी का सबसे बड़ा पल था।
इसके तुरंत बाद दीपांशू ने अपने पिता को फोन लगाया और बेहद गर्व से कहा— “पापा, मेरा रिजल्ट हो गया है, मैं पास हो गया हूँ।” खबर सुनते ही पिता भी तुरंत सारे काम छोड़कर घर पहुंचे और बेटे को सीने से लगा लिया। इसके बाद रिश्तेदारों को फोन करने का सिलसिला शुरू हुआ कि ‘लड़का अब सीए बन गया है’।
सफलता के बाद ‘रीस्टार्ट लाइब्रेरी’ में बांटी मिठाई, बढ़ाया छात्रों का मनोबल
अपनी इस ऐतिहासिक सफलता के बाद सीए दीपांशू तिवारी अपनी उसी कर्मभूमि यानी ‘रीस्टार्ट लाइब्रेरी’ पहुंचे, जहां बैठकर उन्होंने सफलता के सपने बुने थे। वहां पहुंचकर उन्होंने लाइब्रेरी के सभी छात्रों और स्टाफ को मिठाई खिलाई।
| सीए दीपांशू तिवारी का संदेश |
| दीपांशू ने वहां पढ़ रहे अन्य सीए और प्रतियोगी परीक्षाओं के एस्पिरेंट्स से बात की। उन्होंने सभी का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि सीए की पढ़ाई बेशक मुश्किल है और इसे लोग यूपीएससी से कम नहीं आंकते, लेकिन अगर आप सही माहौल में रहकर बिना भटके रोजाना मेहनत करते हैं, तो सफलता निश्चित है। |
एक बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले दीपांशू तिवारी आज करनाल के साथ-साथ पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। sachksameynews.in की पूरी टीम की तरफ से सीए दीपांशू तिवारी और उनके पूरे परिवार को इस शानदार कामयाबी पर ढेर सारी शुभकामनाएं!
परीक्षाओं के परिणाम और ऐसी ही प्रेरित करने वाली सफलता की कहानियों के लिए हमारी वेबसाइट sachksameynews.in से जुड़े रहें। सीए परीक्षा और नए नोटिफिकेशन की अधिक जानकारी के लिए आप The Institute of Chartered Accountants of India (ICAI) की ऑफिशियल वेबसाइट पर भी जा सकते हैं।



