अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार आ रही तेजी के कारण भारतीय उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ बढ़ता ही जा रहा है। सरकारी तेल कंपनियों ने आज, 25 मई 2026 को देश में ईंधन की कीमतों में एक बार फिर से भारी बढ़ोतरी कर दी है। इस ताजा और बड़े इजाफे के बाद देश की राजधानी दिल्ली समेत कई प्रमुख शहरों में ईंधन के रेट रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं।
इस महीने के भीतर यह पहली बार नहीं है जब आम जनता को ईंधन के मोर्चे पर झटका लगा है। तेल कंपनियों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर जारी कूटनीतिक और सैन्य संकट के कारण कच्चे तेल का आयात लगातार महंगा हो रहा है, जिसके चलते घरेलू बाजार में दामों को बढ़ाना उनकी मजबूरी बन चुका है। आइए जानते हैं कि इस बढ़ोतरी के बाद आपके शहर में पेट्रोल-डीजल का क्या भाव है और इससे आपकी जेब पर कितना असर पड़ेगा।
1. दिल्ली में ईंधन की कीमतें ₹102 के पार: आम आदमी को बड़ा झटका

सरकारी तेल कंपनियों द्वारा जारी ताजा रेट के मुताबिक, देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमतों में सीधे ₹2.61 प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी की गई है। इस बड़े उछाल के बाद दिल्ली में अब एक लीटर पेट्रोल का भाव ₹102.12 पर पहुंच गया है।
सिर्फ पेट्रोल ही नहीं, बल्कि डीजल के उपभोक्ताओं को भी इस बार बड़ा झटका लगा है। दिल्ली में डीजल के दामों में ₹2.71 प्रति लीटर का भारी इजाफा किया गया है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में अब एक लीटर डीजल के लिए उपभोक्ताओं को ₹95.20 चुकाने होंगे।
2. मई महीने में चौथी बार बढ़ीं पेट्रोल और डीजल की दरें
आम उपभोक्ताओं के लिए सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि पिछले कुछ ही दिनों के भीतर पेट्रोल और डीजल के दाम में यह चौथी बड़ी वृद्धि है। तेल कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए बहुत ही कम अंतराल पर कीमतें बढ़ाई हैं:
- शुरुआती बढ़ोतरी: मध्य मई से शुरू हुआ कीमतों में इजाफे का सिलसिला लगातार जारी है।
- ताजा झटका (25 मई): आज की बढ़ोतरी इस महीने की सबसे बड़ी बढ़ोतरी में से एक है, जिसने दिल्ली में पेट्रोल को ₹100 के मनोवैज्ञानिक आंकड़े के पार पहुंचा दिया है।
3. महंगाई की चौतरफा मार: मालभाड़ा, राशन और ट्रांसपोर्ट पर असर
जब भी देश में कमर्शियल ईंधन यानी डीजल की कीमतों में इतनी बड़ी वृद्धि होती है, तो उसका सीधा असर सीधे तौर पर आम नागरिक के पूरे बजट और थाली पर पड़ता है। आने वाले दिनों में इसके कारण कई चीजें महंगी हो सकती हैं:
- मालभाड़े में तेजी: डीजल महंगा होने से ट्रक और टेम्पो ऑपरेटर अपना किराया बढ़ा देंगे। इसका सीधा असर दूसरे राज्यों से आने वाले फल, हरी सब्जियां, दूध और राशन के सामान पर पड़ेगा।
- खेती की बढ़ी लागत: भारतीय किसान अपनी फसलों की सिंचाई के लिए पंपिंग सेट और जुताई के लिए ट्रैक्टरों में बड़े पैमाने पर डीजल का उपयोग करते हैं। डीजल महंगा होने से अनाज की उत्पादन लागत बढ़ जाएगी।
- सफर होगा महंगा: स्कूल बसों, निजी कैब और सार्वजनिक परिवहन के वाहनों का किराया बढ़ने से रोजाना सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों का मासिक बजट बिगड़ना तय है।
4. क्रूड ऑयल का खेल: क्यों बेकाबू हो रहे हैं तेल के दाम?
इस ऐतिहासिक बढ़ोतरी के पीछे का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) का संकट है। विशेष रूप से ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते कूटनीतिक व सैन्य तनाव के कारण कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति पूरी तरह से प्रभावित हुई है।
100 डॉलर के पार क्रूड: इस संकट की शुरुआत से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) का भाव लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रहा था। लेकिन मौजूदा आपूर्ति संकट के कारण यह अब उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। इसी बढ़ते दबाव के कारण भारतीय तेल कंपनियों को अपने खुदरा दामों में बढ़ोतरी करनी पड़ रही है।
5. कच्चे तेल का गणित: बेस प्राइस से चार गुना तक कैसे बढ़ती है कीमत?
भारत अपनी घरेलू जरूरत को पूरा करने के लिए लगभग 90% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। देश में ईंधन के दाम ‘डेली प्राइस रिवीजन’ यानी डायनेमिक pricing व्यवस्था के तहत हर दिन सुबह 6 बजे तय किए जाते हैं। विदेशी बंदरगाहों से लेकर आपके वाहन की टंकी तक पहुंचते-पहुंचते तेल की कीमत कई चरणों में बदलती है:
कच्चा तेल (इंपोर्ट) ➔ रिफाइनिंग लागत और कंपनी मार्जिन ➔ केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी ➔ डीलर कमीशन (पेट्रोल पंप मालिक) ➔ राज्य सरकार का वैट (VAT) = अंतिम खुदरा मूल्य
चूंकि देश के प्रत्येक राज्य में वहां की सरकारों द्वारा लगाई जाने वाली वैट (VAT) या सेल्स टैक्स की दरें अलग-अलग होती हैं, इसीलिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे शहरों में ईंधन के अंतिम खुदरा दाम भी अलग-अलग दिखाई देते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के लाइव ग्राफ और वैश्विक ऊर्जा संकट की रिपोर्ट देखने के लिए आप Business Standard की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।
6. तेल कंपनियों का घाटा और सरकारी एक्साइज ड्यूटी का पूरा सच

देश में पेट्रोल और डीजल के दाम मार्च 2024 से लेकर लोकसभा चुनावों के समय तक लंबे समय के लिए स्थिर बने हुए थे। चुनाव से ठीक पहले जनता को राहत देने के लिए कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की कटौती भी की गई थी। लेकिन पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के महंगे होने से इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों को हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा था।
इससे पहले केंद्र सरकार ने आम जनता को महंगाई से बचाने के लिए पेट्रोल और डीजल पर स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में ₹10-10 की बड़ी कटौती की थी। इस फैसले के तहत पेट्रोल पर लगने वाली सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी को ₹21.90 से घटाकर ₹11.90 प्रति लीटर और डीजल पर इसे ₹17.8 से घटाकर ₹7.8 प्रति लीटर किया गया था ताकि खुदरा दाम स्थिर रहें। लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 100 डॉलर प्रति बैरल का दबाव बढ़ने के कारण कंपनियों ने लगातार चौथी बार कीमतें बढ़ाकर इस घाटे को कम करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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