Super El Nino 2026: इस बार मानसून कमजोर पड़ सकता है, हरियाणा-पंजाब के किसानों के लिए बड़ी चिंता
इस साल गर्मी पहले से ही कहर बरपा रही है और अब एक और बुरी खबर सामने आई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस साल सुपर अल नीनो एक्टिव हो सकता है जिसकी वजह से भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है। इसका सबसे ज्यादा असर हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों पर पड़ने की आशंका है।
अल नीनो क्या होता है — आसान भाषा में समझें
अल नीनो एक मौसमी घटना है जिसमें प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इस गर्मी की वजह से हवाओं का रुख बदल जाता है और पूरी दुनिया में बारिश का चक्र गड़बड़ा जाता है। कहीं भयंकर सूखा पड़ता है तो कहीं बाढ़ आ जाती है।

भारत के मामले में जब अल नीनो एक्टिव होता है तो मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं और बारिश कम होती है।
इस बार कितना खतरा है?
अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA (नेशनल ओशेनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन) ने बताया है कि इस साल मई से जुलाई के बीच सुपर अल नीनो विकसित होने की संभावना 82% तक पहुंच गई है। पिछले महीने यही संभावना 61% थी यानी खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
इससे भी चिंताजनक बात यह है कि यह स्थिति दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 तक यानी सर्दियों तक बनी रहने की 96% आशंका है। साथ ही इसके ‘स्ट्रॉन्ग’ या ‘वेरी स्ट्रॉन्ग’ रहने की 67% संभावना जताई गई है।
भारत के किन इलाकों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा?
भारतीय मौसम विभाग के प्रमुख मृत्युंजय महापात्र ने साफ कहा है कि इसका सीधा असर मानसून की बारिश पर पड़ेगा। देश के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है।
सबसे ज्यादा खतरे वाले राज्य और क्षेत्र:
- हरियाणा और पंजाब — अगस्त-सितंबर में सबसे ज्यादा प्रभावित होने की आशंका
- राजस्थान — पहले से कम बारिश वाला इलाका, इस बार और मुश्किल हो सकता है
- उत्तर और मध्य भारत — लंबे सूखे और कृषि नुकसान का डर
- मध्य प्रदेश — इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर समेत कई संभागों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान
किसानों के लिए क्या मतलब है?
हरियाणा और पंजाब के किसान पहले से ही पानी की कमी से जूझ रहे हैं। अगर इस बार मानसून कमजोर रहा तो धान और खरीफ फसलों पर सीधा असर पड़ेगा। किसानों को अभी से पानी की बचत और कम पानी में उगने वाली फसलों की तरफ सोचना शुरू कर देना चाहिए।
दुनिया में बारिश बढ़ रही है फिर भी सूखा क्यों?
यह सुनने में अजीब लगता है लेकिन Nature पत्रिका में छपी एक ताजा रिसर्च बताती है कि बारिश अब पूरे साल बराबर नहीं होती। अब एक साथ बहुत तेज बारिश होती है और फिर लंबे समय तक बारिश नहीं होती। इतनी तेज बारिश से मिट्टी पानी सोख नहीं पाती, पानी बह जाता है या भाप बनकर उड़ जाता है। नतीजा — बारिश होने के बावजूद जमीन सूखी रह जाती है।
अभी क्या करें?
- पानी की बर्बादी बंद करें
- किसान भाई कृषि विभाग की सलाह लेते रहें
- मौसम अपडेट के लिए IMD की वेबसाइट mausam.imd.gov.in चेक करते रहें
- हमारी वेबसाइट sachkasameynews.in को फॉलो करें ताजा मौसम खबरों के लिए
❓ FAQ
Q1. अल नीनो 2026 कब एक्टिव होगा? मई से जुलाई 2026 के बीच सुपर अल नीनो के एक्टिव होने की 82% संभावना है।
Q2. क्या 2026 में मानसून कमजोर रहेगा? हां, अल नीनो की वजह से इस बार मानसून सामान्य से कम रहने की आशंका है।
Q3. हरियाणा में बारिश 2026 में कितनी होगी? हरियाणा में अगस्त-सितंबर के दौरान सामान्य से कम बारिश का अनुमान है।
Q4. अल नीनो से किसानों को क्या नुकसान होगा? कम बारिश से खरीफ फसलें जैसे धान, मक्का और बाजरा प्रभावित हो सकती हैं।
Q5. सूखे से बचने के लिए किसान क्या करें? कम पानी में उगने वाली फसलें चुनें और सरकारी कृषि योजनाओं की जानकारी लें
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